पूर्व मंत्री लता उसेंडी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उठाया शराब होम डिलीवरी मुद्दा
May 6th, 2020 | Post by :- | 340 Views

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार लॉकडाउन की घोषणा करते हुए कहा था, जान है तो जहान है।

भारतीय जनता पार्टी जिला कोंडागाँव के द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई जिसमें पूर्व मंत्री छत्तीसगढ़ शासन लता उसेंडी जी एवं कोंडागाँव भाजपा जिला संगठन प्रभारी श्रीनिवास राव मद्दी जी,जिलाध्यक्ष दीपेश अरोरा जी,गोपाल दीक्षित जी, की उपस्थिति में लता उसेंडी जी ने कहा कि अभी हम लोग लॉकडाउन-3 से गुजर रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने पहली बार लॉकडाउन की घोषणा करते हुए कहा था- जान है तो जहान है। फिर दुबारा हमने ‘जान भी और जहान भी’ के ध्येय वाक्य के साथ काम किया। अब इस तीसरी श्रेणी के लॉकडाउन का ध्येय है जान बची तो लाख उपाय।

एकमात्र प्राथमिकता जान बचाने की थी। देश-दुनिया ने पहले कभी इस तरह के हालात नही देखे थे, जब पूरा देश बल्कि पूरी दुनिया एक साथ एक ही चुनौती से जूझ रहा था। लेकिन यह मोदी जी के सशक्त नेतृत्व की ताकत थी कि आज दुनिया भर में अपनी क्षति न्यूनतम है। जहां दुनिया के सबसे विकसित और समृद्ध कहे जाते अमेरिका और इटली जैसे देशों में हाहाकार है, भारत अपेक्षाकृत न्यूनतम क्षति के साथ इस महामारी का सामना कर रहा है। अगर कुछ समुदाय विशेष की समस्या नहीं होती तो हालात और बेहतर होते। अब यह उम्मीद की जा रही है कि स्थिति नियंत्रण में होगी।

जान बची तो लाख उपाय, के ध्येय को सामने रख कर देश ने धीरे-धीरे जन जीवन को पटरी पर लाने का सोचा। इसी सन्दर्भ में केंद्र का निर्देश आया कि कुछ ख़ास श्रेणियों के कारोबार को छोड़ कर शेष सभी कारोबार तय शर्तों के अधीन राज्य अपनी-अपनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शुरू कर सकते हैं। ऐसा करते समय निश्चय ही यह ध्यान में था कि कोरोना से भी नहीं और भूख से भी नहीं मरें लोग। रोजी-रोजगार आदि शुरू हो।

अत्यंत दुर्भाग्य की बात है कि केंद्र केउस औपचारिक निर्देश में छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार को केवल मदिरा की दुकान खोलने का निर्देश समझ आया। प्रदेश भर में सारा आवश्यक कार्य ठप पड़ा हुआ है। मरीजों का इलाज़ केन्द्रीय एम्स के भरोसे चल रहा, तो राहत आदि कार्यों में स्वयं सेवी संस्थायें जुटी हुई है। पर इन सबको पीछे छोड़ते हुए कांग्रेस सरकार ने सीधे तौर पर केवल शराब की दुकान खोलना मुनासिब समझा।


केंद्र के कथित निर्देश के बावजूद बिहार में, गुजरात आदि में शराबबंदी है लेकिन कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में इसे मौके की तरह लपक लिया। CAA और NPR आदि में केन्द्रीय निर्णयों के खिलाफ कागज़ नहीं दिखाने की बात करने वाले सीएम मानो इस मामले में पूरी तरह स्वयं को केंद्र विश्वासपात्र होने का भ्रम फैलाने लगे। वे यह झूठ फैलाने में लग गए कि केंद्र ने उन्हें मानो शराब बेचने के लिए नियुक्त किया हो। न केवल दुकानें खोली गयी बल्कि समूचे देश में पहली ऐसी सरकार बन गयी है छत्तीसगढ़, जो शराब की घर पहुँच सेवा देने वाली है। इससे पहले ही एक स्वतंत्र सर्वेक्षण के अनुसार शराब की खपत में कांग्रेस सरकार ने छत्तीसगढ़ को नंबर वन बना दिया ही था।
दुर्भाग्य की बात है कि ऐसा कृत्य कांग्रेस की वह सरकार कर रही है, जिसने गंगाजल उठाकर प्रदेश में शराबबंदी का वादा किया था। तब के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल आदि ने शराबबंदी को लेकर अनेक आन्दोलन किये। अनेक ट्वीट आप सबने शराबबंदी के पक्ष में कांग्रेस नेताओं का देखा होगा। राहुल गांधी ने कहा था कि अगर घोषणा पत्र पर अमल नहीं किया तो वे सीएम बदल देंगे। अभी अमल करने की बात तो दूर उलटे घर-घर शराब पहुचाने का ठेका सीएम भूपेश बघेल ने ले लिया है। इससे दुर्भाग्यजनक और क्या हो सकता है?
छत्तीसगढ़ जैसे प्रदेश जहां का बजट अब 1 लाख करोड़ से ऊपर का हो गया है। इस रकम में आखिर 4 – 4.5 हज़ार करोड़ इतने ज्यादा नहीं होते कि इसके लिए समूचे प्रदेश का भविष्य ही अन्धकारमय कर दिया जाय। बिहार जैसे राज्य तक ने जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, फिर भी शराब के राजस्व का मोह छोड़ दिया। तो छत्तीसगढ़ में इतने राजस्व मात्र के लिए प्रदेश के साथ यह अन्याय नहीं हो रहा है। कथित शासकीय राजस्व के लिए प्रदेश का भविष्य चौपट कर रही है कांग्रेस।

हालांकि सवाल केवल राजस्व का नहीं है। शासकीय राजस्व तो महज़ बहाना है। असली सवाल इनके अपने लोगों, कोचियों और आधी शराब के पैसे सीधे इनकी निजी तौर पर अपनी जेब में डाल लेने का है। वैध-अवैध धंधों से शराब की कमाई कर अपना और पार्टी का कोष भरने का है। भाजपा का यह स्पष्ट आरोप है कि ये लोग दलगत और उससे भी बड़े निजी लाभ के लिए कोरोना की कतार में धकेल रहे हैं प्रदेश को, यह सबसे निंदनीय बात है।
कोरोना महामारी के संकट ने प्रदेश में कुछ सकारात्मक संकेत भी दिए थे। पिछले 47 दिन से यहां शराब की दुकानें बंद थी। आप ने देखा होगा कि प्रदेश में इस दौरान अन्य प्रदूषण की तरह ही शराबखोरी का प्रदूषण भी कैसे दूर हो गया था। घर-घर में लोग शांति से रह रहे थे। इतना समय लगभग पर्याप्त था, इसके लत के शिकार लोगों को इसे छोड़ने के लिए। लोग धीरे-धीरे इस मानसिकता में आ भी गए थे कि अब शराब नहीं पीना है। लेकिन, अपने निजी स्वार्थ के लिए कांग्रेस के लोगों ने एक हाथ आया मौका गंवा दिया। प्रदेश को फिर से नशा की अंधेरी सुरंग में धकेल देना दुर्भाग्यपूर्ण है। जहां तक भाजपा का सवाल है तो उसने वादा तो नहीं किया था लेकिन फिर भी क्रमशः हमारी सरकार ने दुकानों को बंद करना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे हम प्रदेश को शराब मुक्त कर देने की तरफ बढ़ रहे थे।
शासन की ग़लत नीतियों के कारण ऐसे ही प्रदेश में विकास कार्यों का अकाल है। रोजी-रोजगार का संकट है ही प्रदेश में। फिर कोरोना के कारण बचा-खुचा रोजगार भी चला गया है। ऐसे में शराब के लिए पैसे किस तरह जुटाएंगे लोग, यह कल्पना की जा सकती है। इसके कारण फिर घरेलू हिंसा, अन्य तमाम अपराध, तस्करी समेत ऐसे अनाचारों की इतनी बाढ़ आयेगी, जिसे सोच कर ही हड्डियां सिहर उठती है।
अभी तो ख़ास कर दुकानों में जैसी भीड़ उमड़ रही है। जिस तरह सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ रही है, जैसे 144 और महामारी क़ानून समेत अन्य कानूनों को खुद सरकार तोड़ रही हैं या तोड़ने को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में भीड़ इकठ्ठा होने के कारण बड़े स्तर पर संक्रमण की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इश्वर न करें कुछ ग़लत हो लेकिन, अगर कुछ अनहोनी हुई तो इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल निजी तौर पर जिम्मेदार होंगे।
हम सरकार से विनयपूर्वक निवेदन करते हैं कि अपने फैसले पर फिर से विचार करें। कोई भी राजस्व प्रदेश के नौजवानों के भविष्य और पारिवारिक शान्ति से ज्यादा कीमती नहीं हो सकता है। कृपया प्रदेश में शराब बहाने, घर-घर पहुचाने का फैसला वापस लीजिये। ऐसा नहीं करने पर भाजपा लोकआन्दोलन खड़ा करने समेत हर संभावित विकल्पों को अपनाने में पीछे नहीं हटेगी।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।