कोंडागांव के भ्रष्टाचार में डूबे अपचारी अधिकारियों पर क्यों मेहरबान हैं प्रशासन ?
September 3rd, 2019 | Post by :- | 196 Views
  • अपचारी  अभियंताओं पर क्यों मेहरबान हैं प्रशासन ?
  • मुख्यमंत्री के कहे अनुसार भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत क्यों नही हो रही कार्यवाही
  • क्या भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को प्राप्त है किसी तरह का राजनैतिक संरक्षण 

छत्तीसगढ़ (कोंडागांव) अरुण कुमार पाण्डेय । छत्तीसगढ़ राज्य के कोंडागांव ज़िला मुख्यालय पर पदस्थ लोकनिर्माण विभाग के मुख्य कार्यपालन अभियंता जिनके कार्यकाल में  चालू वर्ष 2019 में ज़िला कलेक्टर निवास तक पहुंच मार्ग निर्माण हेतु निविदा जारी होने से पूर्व ही दस लाख के राशी के कार्य को दो टुकड़ों में बांटकर अपने चहेते ठेकेदार द्वारा काम करवा लिया गया और कार्य होने के लगभग तीन माह बाद विभागीय वेबसाइट पर उक्त कार्य का निविदा जारी करके अपने भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य की प्रमुख समाचार चैनल में इसका समाचार भी प्रमुखता से प्रसारित किया गया बावजूद इसके आजतक इस भ्रष्टाचार में लिप्त मुख्य अभियंता पर किसी प्रकार की कोई प्रशासनिक कार्यवाही नही किया गया।

इतना ही नही उक्त मुख्य कार्यपालन अभियंता द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोह मैदान को सजाने के लिए बारीक गिट्टी व मुरुम बिछाने का कार्य भी निविदा जारी होने से पहले ही कराया गया है।

खुलेआम सरकारी पैसों का दोहन करते हुए लोकनिर्माण विभाग के मुख्य कार्यपालन अभियंता द्वारा इस तरह न जाने कितने ही कार्य निविदा जारी होने से पहले अपने चहेते ठेकेदारों द्वारा कराया गया होगा।

अब सवाल यह उठता हैकि उक्त के संबंध में जानकारी समाचार चैनल में प्रसारित होने के बाद भी प्रशासनिक अमला जानबूझ कर अपने आंख – कान बंद रखी है या उनकी कुंभकर्णीय नींद अबतक खुली नही है।

सवाल यह भी उठता हैकि इस मुख्य  कार्यपालन अभियंता को किसी प्रकार की राजनैतिक संरक्षण तो प्राप्त नही है, जिसके चलते न ही उनका निलंबन हुआ और न ही अबतक किसी प्रकार की कोई ठोस कार्यवाही।

जबकि छत्तीसगढ़ राज्य के मुखिया के तरफ़ से पूर्व में ही कहा जा चुका हैकि भ्रष्ट आचरण में लिप्त जनसेवकों पर शासन कड़ा रुख अपनायेगी व बिना विलंब के कार्यवाही किया जाएगा।

इसी प्रकार का एक अन्य भ्रष्टाचार कोंडागांव ज़िला के गृह निर्माण मंडल व संपदा कार्यालय का है जहां स्थानीय बंधातालाब वार्ड में निम्न आयवर्ग के लोगों के लिए अटल आवास निर्माण करवाने से जुड़ा है।

आपको बताना चाहेंगे कि वर्ष 2011 में गृहनिर्माण मंडल व संपदा कार्यालय से 280 वर्ग मीटर के कुल 44 नग मकान बनाने का कार्यादेश जारी किया गया था, जहां भ्रष्टाचार का ऐसा खेल खेला गया हैकि आप जानकर हैरान हो जाएंगे।

यहां के जिम्मेदार अधिकारी का ठेकेदार से मिलीभगत करके 44 नग मकान के बदले उतने ही जारी राशी में कुल 45 नग मकान का निर्माण करवा दिया।

इस अतिरिक्त 1 मकान का गृहनिर्माण मंडल व संपदा अधिकारी कार्यालय के सरकारी दस्तावेजों में कही कोई उल्लेख नही है, सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में भी उक्त अतिरिक्त मकान की कोई जानकारी विभाग द्वारा नही दिया गया है।

जब हमने उक्त अतिरिक्त मकान में अवैध रूप से किसी के रहने की खबर सुनी तब वहां जाकर पता करने पर उक्त अतिरिक्त मकान में जितेंद्र साहू नाम के व्यक्ति व उनके परिवार को पाया, जिनके अनुसार उन्होंने इस मकान को 4 लाख 30 हज़ार रुपये में ठेकेदार व गृहनिर्माण मंडल के अभियंता से खरीदना बताया है।

बकायदा इस अतिरिक्त मकान का रजिस्ट्री भी करवाया गया है, परंतु इस मकान के निर्माण हेतु धनराशी कहां से आया और इस मकान को बेंचकर आये पैसे सरकारी खजाने में जमा हुये या नही यह जांच का विषय है।

अब सवाल यह उठता हैकि सरकारी जमीन पर बिना किसी आदेश व मद के 1 अतिरिक्त मकान बनाने का आदेश किसके द्वारा दिया गया जो ठेकेदार ने बिना पैसों के ही 1 अतिरक्त मकान बना दिया, और उस मकान को बेंचने का अधिकार इन लोगों को किसके द्वारा दिया गया साथ ही उस मकान को बेंचने से आया हुआ धन किसके पास है।

अटल आवास में रहने वाले बाकी निवासियों का आरोप हैकि उक्त अतिरिक्त मकान में रहने वाले से नगर पालिका द्वारा जलकर व मकान कर भी नही लिया जाता है।

यह भी विचारणीय हैकि जितने स्वीकृत राशी में ठेकेदार को विभागीय आदेश अनुसार 44 नग मकान बनाना था उतने में उसके द्वारा 45 मकान बनाना, अटल आवास के सभी 45 मकान के छतों से बारिश का पानी टपकने का मुख्य कारण हो सकता है।

“इन दो खबरों से आप अंदाज़ा लगा सकते हैंकि कोंडागांव ज़िला में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी मज़बूत हैं व यहां के अधिकारियों को राजनैतिक संरक्षण होने के कारण ही इन पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नही किया जा रहा है।”

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