हिमाचल में अभी नहीं चलेंगी बसें,शराब की दुकानें खोलने का निर्णय
May 3rd, 2020 | Post by :- | 529 Views
  • कर्फ्यू में छूट मौजूदा चार घंटे से बढ़ाकर पांच घंटे
  • निर्माण और हार्डवेयर की दुकानों को खोलने की भी अनुमति
  • बारबर की दुकानें, स्पा और सैलून बंद रहेंगे।

बीबीएन   । राज कश्यप 

कोवीड-19 महामारी के दृष्टिगत पूरे राज्य में कर्फ्यू जारी रखने का फैसला किया है,हिमाचल प्रदेश सरकार ने अभी बसें न चलाने का निर्णय लिया है। मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया। बैठक में मंत्रियों ने कहा बसें चलाई तो अभी तक कि मेहनत पर पानी फिर जाएगा।

सोमवार से कर्फ्यू में छूट मौजूदा चार घंटे से बढ़ाकर पांच घंटे कर दी गई है। यह जानकारी आज यहां एक सरकारी प्रवक्ता ने दी। उन्होंने कहा कि कर्फ्यू में ढील के दौरान दुकानें खुली रहेंगी। उन्होंने कहा कि उपायुक्त अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में दुकानें खोलने के बारे में लोगों को जानकारी प्रदान करेंगे।

उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण और हार्डवेयर की दुकानों को खोलने की भी अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि बारबर की दुकानें, स्पा और सैलून बंद रहेंगे।
प्रवक्ता ने कहा कि ढाबों, मिठाई और अन्य डाईव ईन रेस्तरां को भी कुछ शर्तों के साथ खोलने की अनुमति दी गई है। सरकार ने लॉकडाउन के बीच शराब की दुकानों को खोलने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों पर ऐसा किया है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में आर्थिक सुधारों को लेकर रणनीति बनाई गई। पुरानी एक्साइज पॉलिसी 31 मई तक जारी रहेगी। पहली जून से नई पॉलिसी लागू होगी।

शराब दुकानों व टोल बैरियर लाइसेंस शुल्क 22 मार्च के बाद से इनके खुलने तक माफ कर दिया जाएगा। इसके अलावा पुराना कोटा उठा सकेंगे। टोल बैरियर 31 मई तक चलेंगे। अगला पीरियड पहली जून 2020 से 31 मई 2021 तक रहेगा।

इसके अलावा अंशकालीन कर्मचारी आठ साल के सेवाकाल के बाद नियमित होंगे। सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के तहत एक लाख से अधिक मजदूरों को मासिक 2 हजार के हिसाब से 20 करोड़ का भुगतान सरकार कर चुकी है। आने वाले समय में इन मजदूरों को 2 हजार रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना के तहत 120 दिन का रोजगार प्रदान किया जाएगा।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।