संवत्सरी पर्व आत्मा को निर्मल व वितराग बनाने वाला पर्व होता है।- पूज्या श्री पुण्यशीला जी म.सा
September 3rd, 2019 | Post by :- | 112 Views

बांसवाडा (अरूण जोशी)

कुशलगढ़ वर्धमान स्थानकभवन में विराजित महासती पुण्यशीला जी म.सा आदि ठाणा-4 की पावन नेश्रा में पर्युषण पर्व तपाराधना-धर्माराधना-ज्ञार्नाराधना के साथ मनाया गया। पयुर्षण पर्व के आठों दिन तपस्या की जबरदस्त धुम चल रहीं है। पूज्या श्री के पावन सानिध्य में अभी तक 14 मासक्षमण पूर्ण हो चुके है व तपस्वी प्रकाश जी बोहरा ने आज 50 उपवास की तपस्या कर तपस्या के उच्च शिखर की ओर अग्रसर है। प्रकाश जी बोहरा ने पूर्व में भी कई बार मासक्षमण का कठोर तप किया। पूज्या श्री ने पयुर्षण पर्व के अंतिम दिन संवत्सरी पर्व पर फरमाया कि कोई समय ऐसा नहीं जाना चाहिए जब आराधना ना हो, जो लगातार तप-आराधना में लगता है उसका जीवन सफल होता है। संवत्सरी श्रेष्ठ, महान पर्व होता है तभी इसे संवत्सरी महापर्व कहा जाता है। संवत्सरी महापर्व गंगा की तरह पवित्र होता है, जो इसमें इुबकी लगालें वह अपने पापों को दुर कर सकता है। इच्छाओं की पूर्ति नहीं होने, मनचाहा काम नहीं होने व इच्छाओं के विरूद्ध काम नहीं होने से गुस्सा उत्पन्न होता है। वैर की गांठ रेशम की गांठ की तरह होती है अगर लग जायें तो फिर जिदंगी भर नहीं खुलती है। संवत्सरी पर्व आत्मा को निर्मल व वितराग बनाने वाला पर्व है इसका हमें पूरा उपयोग करना है। प्रचारमंत्री विशाल गादिया ने बताया कि आज प्रकाश वोहरा 50 उपवास, निर्मला बहन चोपडा 35 उपवास, यश खाबिया 20 की तपस्या कर मासक्षमण की ओर अग्रसर है। सीमा बहन विश्वकर्मा 11 उपवास, कपिल डोसी, सपना डोसी, निलिशा नाहटा, सौरभ गादिया, सरोज चैपडा, अरविन्द खाबिया, रानु डोसी के 9-9 उपवास व पूर्वा खारिवाल, अर्पिता डोसी, नरेश मेहता, गौरव काॅवडिया, बाल तपस्वी सौम्य गादिया, नेहल गादिया, श्रेया गादिया, शिवानी डोसी, शीला ए गादिया, मधु खाबिया, सोहन चण्डालिया, सोनाली नाहटा, देवबाला चैपडा, मधु चैपडा, अभय काठेड़, प्रफुल्ल खाबिया, भव्य चैपडा, निलेश गादिया, स्नेह काॅवडिया ने 8-8 उपवास का तप किया। सभी अठाई के तपस्वीयों का वर्धमान स्थानक श्रीसंघ कुशलगढ़, सुभाष लुणावत, गादिया परिवार व रमेंश तलेसरा द्वारा बहुमान किया गया। पूज्या श्री के सानिध्य में पयुषर्ण पर्व में 30 से अधिक अठाई, 50 से अधिक तेले व 450 से अधिक उपवास की तपस्या हुई। अरिहंत डोसी, राजश्री डोसी व लोकेश बाठिया सिद्धि तप की कठोर तपस्या कर रहें है।

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