बेटी को न्याय दिलाने के लिए महिला ने सीएम को भेजी शिकायत गांव श्यामकलां निवासी सुमन पत्नी अजीत
September 3rd, 2019 | Post by :- | 114 Views

भिवानी, । गांव श्यामकलां निवासी सुमन पत्नी अजीत ने बेटी को
न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा। उन्होंने कहा कि अगर उनकी
बेटी को न्याय नहीं मिला तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बेटी बचओ-बेटी
पढ़ाओ का नारा व्यर्थ। सुमन ने मुख्यमंत्री को सौंपी गई शिकायत में बताया
कि उसकी नाबालिग बेटी से छेड़छाड़ की शिकायत महिला थाना में दी थी लेकिन

इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने एसपी से मुलाकात कर पूरे मामले
की जानकारी दी उन्होंने संज्ञान लेते हुए मामले को जांच के लिए बाल
कल्याण समिति को सौंप दिया। उसके बाद 28 जून को महिला थाना प्रभारी  एसआई
हवाकौर उसे व उसकी बेटी को काउंसलिंग के लिए अपनी गाड़ी में बैठाकर बाल
कल्याण समिति कार्यालय में लेकर आई। वहां समिति सदस्यों ने उसकी बेटी को
बंद कमरे में बुला लिया और जब वह अंदर जाने लगी तो उसे गेट पर ही रोक
दिया। बंट कमरे में उसकी बेटी पर दबाव डालकर काउंलिंग के बहाने एसएलसी
लेने के  लिए एक पत्र लिखवा लिया। जबकि उसकी बेटी ने बार बार उनको कहा कि
मेरी मां को अंदर बुला दो लेकिन समिति की सदस्य निजी स्कूल
विद्यांत्रिक्ष की प्राचार्या डा. आरती डागर ने धमकाते हुए कहा कि वे जो
कर रहे हैं उसकी व उसकी मां के भले के लिए कर रहे हैं। शिकायत करता ने
बताया कि जब उन्होंने पत्र को पढ़कर हस्ताक्षर करने के लिए कहा कि आरती
डागर ने कहा कि आपकी बेटी से जो लिखवाया है वो तेरी बेटी और तेरे भले के
लिए है चुपचाप हस्ताक्षर कर दे और जबरदस्ती मेरे हस्ताक्षर भी करवा लिए।
उन्होंने बताया कि उसकी बेटी उसी स्कूल में पढऩा चाहती है लेकिन बाल
कल्याण समिति के प्रधान व सदस्यों ने स्कूल के सदस्यों के साथ मिल कर एक
फर्जी रिपोर्ट तैयार कर ली। इसके बाद 25 जुलाई को दौबारा उसे व उसकी बेटी
को समिति में बुलाया गया उस समय उसकी बेटी ने एक पत्र लिखकर ब्यान दिया
की उसे उसी स्कूल में दाखिला दिलवाया जाए और स्कूल के निदेशक प्रताप के
खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए लेकिन समिति ने उसके द्वारा
दिए गए ब्यानों को दर किनार करते हुए स्कूल को बचाने के चक्कर में अनदेखा
कर दिया।

भिवानी की बाल कल्याण समिति की सदस्य डा. आरती डागर ने कहा कि वे स्वयं
भी विद्यांत्रिक्ष स्कूल की प्राचार्या हैं और स्कूलों में ऐसा काम नहीं
होता क्योंकि स्कूल वाले कभी झूठ नहीं बोलते। आपने जो आरोप लगाए हैं वो
सब बेकार हैं इस मामले में वे स्कूल के साथ हैं और स्कूल के हक में फैसला
देंगी। शिकायत करता सुमन ने कहा कि भिवानी की बाल कल्याण समिति हमेशा
विवादों के घेरे में रही है अगर इस समिति की पांच साल की रिपोर्ट उठाकर
देख ली जाए तो मिलेगा की समिति ने कभी भी बच्चों के हक में फैसला नहीं
दिया और हमेशा स्कूलों को बचाने का काम किया है।

मुख्यमंत्री से मांग करते हुए सुमन ने कहा कि उसकी बेटी को उसी स्कूल में
दाखिला दिलवाया जाए क्योंकि वह स्कूल सीबीएससी बोर्ड से संबंधित है आस
पास के क्षेत्र में 20 से 25 किलोमीटर तक ऐसा कोई स्कूल नहीं है जो
सीबीएससी बोर्ड से हो। उन्होंने कहा कि अगर उसकी बेटी को शीघ्र ही दाखिला
नहीं मिला तो उसकी पढ़ाई बाधित होगी तथा परीक्षा परिणाम खराब आने पर उसका
भविष्य भी अंधकारमय हो जाएगा।

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