कर्मचारियों और पैंशन धारकों के डी ए फ्रिज करने की अपेक्षा 9200 करोड़ रुपए एनपीएस की राशि का उपयोग करे सरकार, राज्यों के विधायकों , पूर्व विधायकों और मंत्रियों के भत्ते और डी ए फ्रिज करे – वीरेन्द्र सिंह धनखड़
April 28th, 2020 | Post by :- | 1037 Views

कुरुक्षेत्र, लोकहित एक्सप्रेस, (सैनी)।   हरियाणा कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय महासचिव वीरेन्द्र सिंह धनखड़ और वित्त सचिव दिलबाग अहलावत तथा माननीय मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक महत्वपूर्ण मीटिंग हुई। जिसमें हरियाणा प्रदेश के लाखों कर्मचारियों का नेतृत्व करते हुए कोरॉना संक्रमण के दौरान स्वास्थ्य , पुलिस, जनस्वास्थ्य, सफाई कर्मचारी, बिजली, परिवहन, शिक्षा, उपायुक्त कार्यालय या अन्य विभागों के जो कर्मचारी अपनी जान की परवाह ना करते हुए अपना कर्तव्य निभा रहे हैं उन तमाम कर्मचारियों को बीमा पॉलिसी का लाभ देने और उनको तमाम आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाने की मांग उठाई। अपनी पूर्ण ड्यूटी करने के साथ साथ प्रदेश के सभी कर्मचारियों ने अपने वेतन में से मुख्यमंत्री कोरॉना रिलीफ फंड में बढ़ चढ़कर दान भी दिया है और भविष्य में भी सरकार के आवश्यकतानुसार करते रहेंगे। इसके बावजूद सरकार का सभी कर्मचारियों और पैंशन भोगियों का डी0 ए0 फ्रिज करना, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और एल टी सी रोकने का पूर्ण विरोध किया और स्पष्ट रूप से सवाल करते हुए कहा कि केंद्र के सांसद, मंत्रियों और राज्यों के विधायकों , पूर्व विधायकों और मंत्रियों के भत्ते और डी ए फ्रिज क्यों नहीं किए गए । ये एक एक माननीय तीन तीन चार चार से भी ज्यादा पैंशन ले रहे हैं वो क्यो नही बन्द की गई। सरकार अपने मंत्रियों , विधायकों और अपने खुद के खर्च कम करे।

उन्होंने बताया कि कर्मचारियों और पेंशन भोगियों के जीवन का एकमात्र यही सहारा है और जब इसमें कटौती कर ली गई तो उनका ही गुजारा होना मुश्किल हो जाएगा तथा जो मकान या अन्य लोन ले रखे हैं वो भरने में सक्षम नहीं रहेंगे। उसके बाद वो रिलीफ फंड में देने के योग्य भी नहीं रहेंगे। हरियाणा प्रदेश विकाश के मामले में अन्य राज्यो को अपेक्षा काफी अग्रणीय है। कोरोना महामारी के दौरान आर्थिक संकट को देखते हुए हरियाणा सरकार से प्रदेश के लाखों कर्मचारी सुझाव के साथ साथ पुरजोर मांग भी करते हैं कि प्रदेश सरकार और कर्मचारियों के लगभग 9200 करोड़ रुपए की राशि एनपीएस के जरिए शेयर बाजार में लगा रखी है जो लगातार नुकसान में जा रही है जिसकी वापसी की भी कोई गारंटी नहीं है। सरकार कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना बहाल करके इस 9200 करोड़ रुपए की राशि का प्रयोग कर सकती है जिसके बाद हरियाणा सरकार को किसी से भी आर्थिक सहायता या कर्ज लेने की आवश्यकता नहीं होगी तथा हर महीने कर्मचारियों के एनपीएस के लिए जो 10% शेयर जमा करने का आर्थिक बोझ है वह भी बन्द हो जाएगा जिसकी राशि प्रति महिना लगभग 100 करोड़ रुपए बनती है और ये एनपीएस कर्मचारी आगामी 15-20 सालों बाद रिटायर होंगे तब तक पुरानी पैंशन का या एनपीएस के तहत कर्मचारियों के लिए 10% हिस्सा जमा करने का कोई आर्थिक दबाव नहीं होगा।

मीटिंग के दौरान नेताओं द्वारा पिछले वर्ष बिजली विभाग में एस ए पदों पर भर्ती हुए कर्मचारियों को सरकार द्वारा लॉक डाउन से पहले उनके गृह जिले में स्थानांतरण के आदेश किए थे लेकिन वो अभी तक नहीं हुए इस बारे भी प्रभावी रूप से मांग उठाई गई। इसी प्रकार हमारे फौजियों के लिए जो ई एस आई हॉस्पिटल हैं उनमें कोरॉना की वजह से ओपीडी बन्द करके कोरॉना सेंटर बना दिए गए हैं जिस कारण फौजियों , संगठित और असंगठित मजदूरों के पास अपने इलाज का कोई विकल्प ही नहीं बचा, इसलिए इस पर अवश्य कार्य किया जाए। बहुत सारे बड़े उद्योगों में कार्यरत मजदूरों को वेतन नहीं दिया जा रहा उनके वेतन के लिए जल्द से जल्द कार्यवाही की जाए।

विगत 08 अप्रैल को माननीय उच्चतम न्यायालय से हरियाणा के जो 1983 पी टी आई अध्यापकों बारे फैसला आया है उस बारे सरकार से मांग की कि उनकी अपने स्तर पर जांच करवाए और जो दोषी नहीं हैं और सभी योग्यताएं पूर्ण करते हैं उनकी नौकरी नियमित रखी जाए क्योंकि उनके परिवारों के लिए इसके अलावा कोई दूसरा सहारा नहीं है इसके साथ साथ इसमें कुछ विधवा महिलाएं भी शामिल हैं जो सिर्फ इस नौकरी पर ही आधारित हैं। जब तक सरकार नई भर्तियां नहीं करती या भर्तियों पर रोक रहती है तब तक वर्तमान कर्मचारियों की सेवानिवृति की आयुसीमा भी बढ़ाई जाए।

हरियाणा कर्मचारी महासंघ कर्मचारियों और पैंशन धारकों के डी ए फ्रिज, एल टी सी और ट्रांसपोर्ट भत्ते बन्द करने के हरियाणा और केंद्र सरकार के फैसले का पुरजोर विरोध करता है और निरन्तर विरोध करता रहेगा। *यदि सरकार कोरॉना की आड़ में इस तरह कर्मचारी विरोधी फैसले लेगी तो हरियाणा कर्मचारी महासंघ कड़ा विरोध करेगा और लोक डाउन के बाद जल्द ही मीटिंग बुलाकर आगामी आंदोलन की घोषणा करेगा जिसकी पूर्ण जिम्मेवारी हरियाणा सरकार की होगी।

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