आर्थिक संकट के नाम पर महंगाई भत्ते बढ़ोतरी पर रोक का कर्मचारी संगठनों ने किया तीखा विरोध|
April 24th, 2020 | Post by :- | 38 Views

हसनपुर पलवल (मुकेश वशिष्ट):-  आर्थिक संकट के नाम पर सरकारी कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के महंगाई भत्ते बढ़ोतरी पर जुलाई, 2021 तक रोक लगाने के निर्णय से का कर्मचारी संगठनों ने तीखा विरोध किया है। उन्होंने सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है। प्रदेश के कर्मचारियों के सबसे बड़े एवं प्रमुख संगठन सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा, जिला प्रधान राजेश शर्मा, सचिव योगेश शर्मा न प्रेस प्रवक्ता रमेश चन्द ने बृहस्पतिवार को केन्द्र सरकार द्वारा कोविड 19 की आड़ में महंगाई भत्ते पर रोक लगाने के निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

उन्होंने बताया की कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना लिए गए इस निर्णय से कोरोना योद्धाओं सरकारी कर्मचारियों का मनोबल टूटेगा और कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ी जा रही जंग पर भी प्रभाव पड़ सकता है।उन्होंने बताया कि निर्णय में मजेदार  बात यह है कि सरकार ने इस निर्णय को जनवरी, 2020 से लागू करने का ऐलान किया है और जुलाई 2021 के बाद भी एरियर का भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस निर्णय का प्रभाव एचआरए व इस दौरान रिटायर होने वाले कर्मचारियों की पेंशन पर भी पड़ेगा। जिसको       किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे फैसले लेने से पहले सरकार कर्मचारी यूनियनों व फेडरेशनों से परामर्श करने की जहमत तक नहीं उठाती, जो सरकार की तानाशाही को ही दर्शाता है।

आल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट इम्पलाईज फैडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने केन्द्र सरकार से कोरोना महामारी के खिलाफ अपर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के बावजूद अपनी जान जोखिम में डालकर निडरता से मैदान में डटे कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के महंगाई भत्ते पर रोक लगाने की बजाय इस आर्थिक संकट से उबरने के लिए  मुट्ठी भर धन कुबेरों से संसाधन जुटाने के उपाय करने की जोरदार मांग की है।

उन्होंने बताया कि ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार देश के 63 अरबपतियों की संपत्ति 2018- 19 के केन्द्रीय आम बजट जो कि 24,42200 रुपए है, से भी ज्यादा है। उन्होंने बताया कि ऊपर के केवल 10 प्रतिशत लोगों के पास 77 प्रतिशत संपदा है और ऊपर के 1 प्रतिशत अमीर लोगों के पास नीचे के 70 प्रतिशत लोगों से 4 गुना से ज्यादा संपत्ति है । उन्होंने कहा कि सरकार को आज की जरुरतों के लिए आवश्यक संसाधन उन 5 प्रतिशत अति अमीर लोगों से  लेने चाहिएं, जिन्होंने सरकार के अनुचित व नाजायज़ संरक्षण के माध्यम से प्रत्यक्ष कर, संपत्ति कर व मजदूरों के अधिकारों पर हमला करके इसे इकट्ठा किया है। उन्होंने बताया कि ऐसा करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास ही है।

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि इसमें कोई शक नहीं है कि देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है। लेकिन देश के कर्मचारी व मजदूर  लॉकडाउन के बाद स्वयं ही कोविड-19 की महामारी की चपेट में हैं। क्या उन्हीं को संकट से उबरने के लिए बलिदानी बनाना चाहिए ? कोविड-19 महामारी के संक्रमण से लड़ने के लिए भारी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को सरकारी गतिविधियों में लगाया गया है, विशेषकर उन कर्मचारियों को जिनकी सेवाओं को आवश्यक सेवाएं घोषित किया गया है जैसे स्वास्थ्य ,रक्षा, डाक, रेलवे, नगरपालिका ,बिजली, जन स्वास्थ्य, अग्निशमन, जलापूर्ति, परिवहन आदि। ये कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके बावजूद सरकारी कर्मचारियों व पेंशनर्स का महंगाई भत्ते पर रोक लगाने का निर्णय कर्मचारियों के साथ घोर अन्याय है।

 

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