कोरोना संकट व विश्व पृथ्वी दिवस की सार्थकता
April 20th, 2020 | Post by :- | 144 Views

कुरुक्षेत्र, ( सुरेशपाल सिंहमार )    ।  सम्पूर्ण विश्व कोरोना नामक महामारी से जुंझ रहा है। कोरोना महामारी के मद्देनजर आज भारत सहित विश्व के लगभग सभी देशों में जन जीवन अस्त व्यस्त है तथा मानव जाति पर गंभीर संकट है। भारत सहित विश्व के कई देशों में सम्पूर्ण लॉक डाउन है।

उपरोक्त जानकारी डॉ. तरसेम कौशिक ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दी उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस नामक वैश्विक महामारी ने हालाकिं पर्यावरणविदों व प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आशा की किरण दिखाई है क्योकिं इस महामारी के बीच हमारा पर्यावरण स्वच्छ हुआ है। चहुँओर पक्षियों की चहचाहट सुनाई देने लगी है तथा ध्वनि प्रदूषण का कोलाहल कम हुआ है। जैवविविधता व प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से लॉक डाउन का यह समय श्रेष्ठ है।

कोरोना संकट के बीच ही हम सभी विश्व पृथ्वी दिवस यानि वर्ल्ड अर्थ डे 22 अप्रैल को मना रहे हैं।  सर्वप्रथम विश्व पृथ्वी दिवस मनाने की शुरुवात 22 अप्रैल 1970 से हुई थी जिसका उदेश्य पृथ्वी पर शुद्ध वायु, जल तथा मृदा की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता तथा पर्यावरण को प्रदूषण से मुक्ति था। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हथीरा के जीवविज्ञान प्राध्यापक डॉ तरसेम कौशिक ने बताया कि ब्रह्मांड में व्याप्त लौकिक व अलौकिक वस्तुओं के साथ ही हमारा शरीर भी पंचमहाभूतों आकाश, वायु, अग्नि, जल तथा पृथ्वी से मिलकर बना है। इन पाँच तत्वों से सरोबार यह वसुंधरा विभिन्न मानवीय क्रियाकलापों की वजह से अवांछित द्रव्यों से दूषित हो गई है जिसके फलस्वरूप पारिस्थितिक तंत्र पर इनका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। डॉ तरसेम कौशिक ने बताया कि विश्व पृथ्वी दिवस मनाने का उद्देश्य विश्व में तेजी से विलुप्त होती प्रजातियों, जलवायु परिवर्तन, वनोन्मूलन, पर्यावास क्षति, जंगली जीवों की तस्करी व अवैध शिकार, बढ़ता प्रदूषण व कृषि क्षेत्रों में कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग की तरफ दुनिया का ध्यान आकर्षित करना  है।

डॉ कौशिक ने बताया कि आज सम्पूर्ण विश्व जलवायु परिवर्तन से चिंतित है इसलिए विश्व पृथ्वी दिवस की 50 वीं वर्षगाँठ के लिए सबसे उपयुक्त उपविषय जलवायु कार्रवाई को प्रतिष्ठित किया गया है। कोरोना संकट के बीच भारत सरकार के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देशानुसार हरियाणा के सभी विद्यालयों में इको क्लब के तत्वावधान में विश्व पृथ्वी दिवस मनाने का निर्णय किया है ताकि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति रुचि उत्पन्न हो सके तथा विद्यार्थी पोस्टरों, कविताओं व वीडियो बनाकर डिजिटली समाज में जागृति फैला सकें। डॉ कौशिक ने बताया कि हर वर्ष पृथ्वी दिवस पूरे उत्साह से मनाया जाता है। इस वर्ष भी हम इस वैश्विक महामारी के बीच पृथ्वी दिवस को पूरे उत्साह से मनाएंगे तथा मोबाइल्स, व्हाट्सएप, ट्विटर व अन्य तकनीकों की मदद से पृथ्वी दिवस की सार्थकता को साबित करने का प्रयास करेंगे। डॉ तरसेम कौशिक ने बताया कि हमें पृथ्वी दिवस की सार्थकता को समझते हुए पृथ्वी पर व्याप्त जीव जंतुओं व प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण व संवर्धन की तरफ ध्यान देना होगा। हमें समझना होगा कि जल ही जीवन है। हमें अपनी फ़ैक्टरियों से उत्पन्न केमिकल्स को उपचारित करके ही नदियों में छोड़ना होगा ताकि जल प्रदूषण न हो। हमें अपनी उर्जा की जरूरतों की पूर्ति के लिए उर्जा का संरक्षण करना होगा तथा जितना संभव हो सके पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना होगा ताकि हमें शुद्ध वायु मिलती रहे।

कोरोना महामारी से सबक लेते हुए हमें विश्व पृथ्वी दिवस की उपयोगिता को समझना होगा तथा अपने पर्यावरण के संरक्षण व संवर्धन के लिए पौधारोपण जैसे कार्यक्रमों को अपनाना होगा ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ जल, वायु, मृदा प्रदान कर सकें तथा वे पृथ्वी पर व्याप्त वन्य जीवों को देख कर सौन्दर्य बोध की अनुभूति प्राप्त कर सकें।

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