21 दिन का लॉकडाउन देश के लिए संजीवनी बूटी या संकट ? :- सुमित सिंगला
April 19th, 2020 | Post by :- | 282 Views

बीबीएन  19अप्रैल ।राज कश्यप 

विश्व में फैली महामारी के खात्मे हेतु सरकार द्वारा लॉक डाउन बढ़ाना देश की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी बूटी की बडा संकट इस बारे प्रश्न चिन्ह लग गया है। इस बारे विशेषगयो की दलील है कि विश्व मंदी की ओर बढ़ रहा है व बडे धर्म संकट की स्तिथि उत्पन्न हो गयी है।

महामारी के कारण हजारों लोग अपनी जान गवा बैठे हैं हैरानी की बात है कि यह करोना जिस देश की देन है वहां का व्यापार जोरों पर चल रहा है जबकि विश्व के अन्य देशों को उसने व्यापारिक दृष्टि से शून्य पर ला खड़ा कर दिया है । कॅरोना जनक चीन करोना से मुक्त हो गया है अन्य देश बड़े संकट से जूझ रहे हैं।

भारत  में जो एनजीओ संस्थाये, सरकार व प्रशासन मददगार बना है जो सेवा कर रही हैं वे बड़ा ही सराहनीय है। क्रोना महामारी के कारण बड़े से लेकर छोटे व्यापार , परिवारों के जनजीवन आम जीवन पर बहुत असर पड़ा है। देखा जाए तो भारत अभी पीछे है अन्य देश बड़े संपन्न श्रेणी में आते हैं । अगर लॉक डाउन के बढ़ाने के कारण भी इसका हल न हुआ तो लॉक डाउन के बाद इसका क्या चारा व हल हो सकता है। यदि नियंत्रित नहीं होता है तो सरकार को इस बारे क्या पॉलिसी तैयार कर रही है।

मल्टीनेशनल कंपनीज अर्थव्यवस्था डगमगाने के वावजूद भी सभी को अच्छी सुविधाएं, पैकेज, स्वास्थ्य बीमा दे रही हैं परंतु अपने देश की सरकार आज तक केवल 223 करोड पैकेज घोषित कर राग अलाप रही है जिस कारण अर्थव्यवस्था शून्य पर होने के आसार आ गए हैं। सरकार केवल जरूरी सामान दवाईयो को ही सहारा मान तवज्जो दे रही है इससे अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो पाएगी। करीब 90% उद्योग आज बंद पड़े है, अगर उद्योग बद रहे तो मालिकों व कर्मियों की दशा उन्हें कोई और आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर कर सकती है जिसके लिए क्या सरकार जिमेदारी उठा सकती है।

आज क्रोना का प्रभाव प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री पर भी पड़ा है , प्रिंट मीडिया सबसे पहले किसी के घर पहुंच कर सूचना का सबसे बढ़िया जरिया माना जाता था उसका भी धंधा खत्म होने की नौबत आ गई है।

केवल आज 30 फीसदी उद्योग चालू होने के कारण अधिकतर मजदूर, जो मजबुरी के कारण से अपने घरों को लौट गए हैं क्या वह करो ना खतम होने के बाद शायाद ही रोजगार के चलते पुनः उद्योगो मे लौटे ,तो क्या भविषय मे उद्योग पटरी पर लौट आएंगे। यही नही किसानों को सरकारें लोक लुभावने सपने दिखा रही है परंतु वह भी केवल भगवान को सहारा मान निराश बैठा है।
यदि लॉक डाउन के 21 दिन मे संख्या बढ़ती है तो सरकार इस बारे क्या कदम उठाएगी, क्योंकि करीब 20 दिनों के लॉक डाउन में यह आंकड़ा 12500 पहुंचा है यदि भविष्य में आंकड़ा बढ़ता है तो सरकार मुश्किल में आ सकती है, तो सरकार के पास भविष्य की क्या रणनीति है।

जहां भारत में निजी व सरकारी अस्पताल केवल आपातकालीन सेवा ही उपलब्ध कर रही हैं परंतु यदि कोई मरीज बीमारी से वर्षों से पीड़ित है वह तो बिना दवाई व इलाज के अभाव में अपने जीवन से हाथ धो बैठेगा, अनुमान लगाया जा सकता है की नियमित मरीजो का आंकड़ा करो ना के आंकड़े कि तुलना में बढ़ सकता है । शायद ऐसा ना की हो कि लोग क्रोना के कारण कम और भुखमरी व बीमारी के कारण ज्यादा जान गवा जाए। देश में करीब 80 करोड लोग ऐसे हैं जो केवल दैनिक दिहाड़ी कमा कर अपना जीवन यापन करते हैं सरकार को चाहिए कि देश के 400 जिले में जहां क्रोना संक्रमण नहीं है वहां से ऐसे कुशल कर्मियों को लाकर कम हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने मे अपनी भूमिका अदा करनी चाहिए।

करोना के कारण विश्व में प्रकृति ने भी संतुलन खो दिया है जिस कारण भूचाल व भूकंप आने आम बात हो गई है।
क्यूरटेक ग्रुप के एम डी सुमित सिगला का कहना है कि दवाइयों में प्रयोग होने वाला रा मैटेरियल चीन से आ रहा है जिस के दाम ट्रेडर्स ने बढ़ा दिए हैं क्या भविषय में इस कारण अर्तव्यवस्था सुधर पाएगी क्योंकि कंपनियां दवाईयां उपलब्ध नहीं करवा पाएंगे , सरकार को इस ओर निगरानी करने की जरूरत है । उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि विदेशों सहित अन्य जगहों में जो लोग परिवारों से बिछड़ दूर बैठे हैं वहां परिवार प्रबोधन की प्रक्रिया अपना उन्हें परिजनों से मिलाने बारे कोई नीति बनाई जाए व उन्हें स्वदेश वापिस लाया जाए।
भविष्य पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि लॉक डाउन के कारण रियल स्टेट को भी झटका व विराम लगा है । सरकार को चाहिए कि विदेशों की तर्ज पर उद्योगों को जिंदा रखने के लिए लोगों को सस्ते दामों पर ऋण उपलब्ध करवाएं ताकि अर्थव्यवस्था मजबूत हो व बेरोजगारी का दंश न झेलना पड़े।करोना महामारी ने पूरे समाज को डिप्रेशन में ला खड़ा किया है दिन प्रतिदिन मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है। सरकार को इस से बचाव तथा आम जनजीवन सामान्य हो इस बाबत ठोस कदम उठाने की आव्श्यकता है।

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