गरीब, मजदूर बेसहारा तबका कोरोना से ज्यादा पेट भरने को लेकर चिंतित-प्रदीप चौधरी
April 19th, 2020 | Post by :- | 115 Views

 

कहा-समाजसेवी संस्थाओं व राजनीतिक पार्टियों की तरह दिल खोलकर जरूरतमंदों तक राशन पहुंचाए प्रशासन

कालका (हरपाल सिंह)।

गांवों, कॉलोनियों, बस्तीयों में गरीब, जरूरतमंद और बेसहारा को समाजसेवी, धार्मिक सस्थाएं, सभी राजनीतिक पार्टियां खाने का सामान व अन्य सुविधाएं और सहुलियतें दिल खोलकर प्रदान कर रही है तो फिर शासन-प्रशासन राशन वितरण व अन्य सुविधाएं देने में बड़ी कंजूसी क्यूं बरत रहा है। उक्त शब्द आज कालका से कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी ने कहें। उन्होंने कहा कि जब नियुक्त नोडल अधिकारी जरूरतमंद लोगों का सर्वे कर चुके है फिर वो बार-बार पूछताछ करके क्यूं वक्त बर्बाद कर रहे है। यदि लिस्टें बनने के बाद भी राशन वितरण को ऐसे ही टालते रहे तो फिर जरूरतमंद लोगों को तो खाने के लाले पड़ जाएगें। उन्हें शाहपुर, गोरखनाथ, खोखरा कॉलोनी, मढ़ावाला, टिपरा, धमाला वाल्मीकि बस्ती, रजिपुर, महादेव कॉलोनी, रामपुर सियूड़ी कॉलोनी, कालका-पिंजौर और रायपुररानी समेत कालका विधानसभा क्षेत्र से लगातार फोन कॉल आ रहे है कि प्रशासन राशन नही दे रहा है। सवाल पैदा हो रहा है कि प्रशासन राशन क्ूं नही बांट रहा है। क्या लॉकडाउन खत्म होने के बाद लोगों को राशन बांटा जाएगा। विधायक प्रदीप चौधरी ने कहा कि जिस प्रकार से कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए लोग घरों में कैद हो गए है। इन लोगों का कामधंधा भी छूट गया है और कमाई का कोई साधन नही, फिर इन जरूरतमंदों को ना तो शासन-प्रशासन की तरफ से प्रयाप्त राशन मिल पा रहा है और ना ही जरूरत का सामान। तीन महीने का राशन भी उन्हीं लोगों को देने की बात की जा रही है जो पात्र है। परंतु गरीब व जरूरतमंद तबके के लिए लॉकडाउन दोहरी मार लेकर आया है। ऐसे में गरीब, जिनके पास राशनकार्ड नही है। वो कोई सरकारी मदद नही ले पा रहे है। यहीं कारण है कि गरीब, जरूरतमंद और बेसहारा लोगों के लिए लॉकाडाउन हर दिन चुनौती भरा बीत रहा है। महिला पुलिस टीम सराहनीय काम कर रही है। खुद ही राशन तैयार करके लोगों को पका हुआ राशन बांट रही है। ऐसे में प्रशासन लोगों को बड़े स्तर पर खुले दिल खोलकर राशन देने का इंतजाम करें।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।