हसनपुर बदहाली का जिम्मेदार कौन ? दुर्भाग्य कहें या कुछ और ?
September 2nd, 2019 | Post by :- | 114 Views

हसनपुर पलवल (मुकेश वशिष्ट)   :- जिले के खण्ड/गाँव व उपतहसील हसनपुर के बारे में कुछ रोचक तथ्य |

हसनपुर पहले एक विधानसभा क्षेत्र हुआ करता था यहाँ पर नगरपालिका भी थी | होडल से पहले यहा पुलिस थाना होता था | बुजुर्ग बतालाते हैं कई दशकों पहले गाँव हसनपुर में यमुना पर पक्का पुल बनने के लिए आदेश आये थे | अफवाहों पर ध्यान न देते हुए आगे बढ़ते हैं इस पुल को उठा कर रहीमपुर ले जाया गया | अपने राजनैतिक लाभ के लिए एक बड़े षडयंत्र के तहत विधानसभा क्षेत्र का तमगा भी छीन लिया गया कोई नही बोला, हसनपुर की नगरपालिका भंग कर दी गई तब भी कोई नही बोला, डीएसपी दफ्तर कायदे से हसनपुर में होना चाहिए था उसे भी होडल ले जाया गया |
हरियाणा उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित होने के कारण अलग से एक चौकी होनी चाहिए परन्तु वो भी सम्भव नही हो सका |
सरकार का एक नारा हैं “बेटियाँ बढाओं, बेटिया बचाओं” लेकित धरातल पर कुछ और ही नजर आता हैं | क्यूँ गाँव हसनपुर के एक मात्र कन्या वरिष्ट मा० पाठशाला में ना तो छात्राओं को खेलने के लिए उपयुक्त ग्राउंड ही है ना ही पढाने के लिए उपयुक्त स्टाफ़ | इसी कड़ी में आगे पास के गाँव लहरपुर/वलीमोहम्मदपुर में छटी कक्षा से लेकर 10वीं कक्षा तक 130 बच्चों पर मात्र 4 अध्यापक जिसमें से एक पीटीआई और बाकी बच्चे तीन TGT या गेस्ट, कैसे सम्भव इस नारे की सत्यता | दुसरे हैरान करने वाला एक अन्य तथ्य आदर्श प्रा० पाठशाला फाट्सकोनगर उर्फ़ फाटनगर को वर्ष 2005 से कार्यरत सरकारी स्कूल को सरकारी भवन ही नसीब नहीं हैं गाँव की बीसी चौपाल में इस स्कूल का संचालन हो रहा हैं 100 से अधिक बच्चे मात्र एक बड़े हाल और एक वरामदे में चल रहा हैं हिम्मत हैं उन अधिकारियों के लिए जिनके सज्ञान में सब कुछ होने के बाबजूद आज तक कोई सुनावाई नहीं हो पा रही हैं |
अब आगे बात करते हैं आमजन की सुरक्षा को लेकर हसनपुर या आस-पास कोई आग़जनी या यमुना में कोई अनहोनी होती हैं तो 20 km दूर होडल से या 32 km दूर से फायर बिर्गेड की गाड़ी आने तक सब कुछ तबाह होना लाजमी हैं |

दुसरा स्टेट बैंक की शाखा नहीं होने से भी व्यपारी वर्ग व सरकारी कामगारों को भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता हैं| होडल से यातायात के पर्याप्त संसाधन भी मुहैया नही कराये गये हैं | होडल जाने के लिये कोई सरकारी हरियाणा रोडवेज़ की बस नही चलती जिसके चलते छात्र/छात्राओं को मजबूरन निजी बसों में पूरा किराया देकर सफ़र करना पड़ता हैं वो भी बस मालिकों की शर्तों पर | इसी तरहा से हसनपुर से वाया खाम्बी पलवल जाने वाले मार्ग पर शाम पांच बजे के बाद कोई रोडवेज़ की बस सेवा उपलब्ध नही हैं | निजी वाहनों में धक्के खाने को यात्री मजबूर हैं|
स्वास्थ विभाग की हालत और भी चिंताजनक हैं 30 से ज्यादा गांवों के बीच पड़ने वाले एक मात्र प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र खुद बीमार सा नजर आता हैं सुबह 9 बजे खुलेगा और शाम 4 बजे बन्द | मरीज़ों की क्या हालत होती होगी और हसनपुर में कोई रजिस्टर्ड बड़ा निजी हॉस्पिटल भी नही है | एमरजैंसी में होडल या पलवल भागना पड़ता हैं | ज्यादा गम्भीर मरीज की पलवल या होडल पहुंचने से पहले ही रास्ते में ही मौत हो जाती हैं | हसनपुर के प्राथिमक स्वास्थ केन्द्र मात्र एक डॉक्टर के सहारे चलते देखा गया हैं | उसे भी कई बार मीटिंग के लिए पलवल जाना होता हैं स्थिति कई बार इतनी गम्भीर हो जाती हैं कि इस स्वास्थ केन्द्र में रूई, PCM, आयरन तक गोलियाँ भी नसीब नही हो पाती| अधिकारियों के सज्ञान में होने बाद भी पता नही क्यूँ सुनवाई नहीं हो पाती|
रही सिचाई सम्बन्धी समस्याओं की नहर नालों में टेल तक पानी शायद हरियाणा में सबसे बाद में आता होगा जब तक फ़सलें तबाह होने के कगार पर पहुंच जाती हैं |
यह सब इस लिए बताना जरुरी था कि आज जो मेरे माननीय नेतागण अपने आपकों जनता का सच्चा हितेषी बताने की होड़ में लगे हैं तरह-तरह के नये-नये हथकंडे अपना कर ज्यादा से ज्यादा भीड़ जमा कर यह दिखाने की होड़ में लगे रहते हैं मेरे पीछे विशाल जनसमर्थन हैं लेकिन बाद में धीरे-धीरे परते खुलते हुए देखा गया हैं कि बेरोजगारी ज्यादा होने के कारण भीड़ भी आज कल किरायें पर भी मिलती हैं | कश्मीर में तो पत्थरबाज़ मिलते यहा तो बात भीड़ की बात हैं कोई कानूनी अपराध तो नहीं | ऐसा करने वाले जननायकों को आईना दिखाने की एक कोशिश भर हैं |
यात्रा व रैलीयों के इस दौर में सब अपने स्तर पर अपनी-अपनी पार्टियों के महामहिमों को अपने आपकों बेहतर साबित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड रहें हैं और राजनीति के गिरते स्तर का भी नज़ारा देखने को मिलता हैं मुद्दों से भटक कर एक दूसरों टांग खिचाई का कोई अवसर नही छोड़ते हैं | क्या इन्हें उपरोक्त ग्रामीणों के कष्ट से सच में कुछ लेना-देना है ?  क्या इन्हें नहीं मालूम कि हमारे विधानसभा में उक्त ऐसी समस्याओं का अम्बार हैं | यदि नेक नियति होती तो समस्याएं बढती नही |

किसी पार्टी विशेष के लिए यह लेख नही हैं हमारा उद्देश्य मात्र हसनपुर व उसके साथ होने वाले दुर्व्यवहार कहे, अनदेखी या राजनैतिक इच्छा शक्ति का दिवालाईयापन |

मतदातों को ज्यादा जागरूक होने से ही कोई सुनवाई सम्भव हो सकती हैं वरना एक स्लोगन में फिर से फ़स कर इसी सौतेलेपन का शिकार होना पड़ेगा | एक बड़े दुर्भाग्य की बात होडल विधानसभा की यह हैं कि यहा का एम.एल.ऐ ज्यादातर विपक्ष पार्टी का रहता हैं जिससे होडल-हसनपुर के विकाश के पहियों पर बंदिश लगा कर रखी हैं और नेता जो को बैठे बिठाए बड़ा मौका मिल जाता हैं मैं क्या करू जी हमारी सरकार नही हैं अरे भाई जब आपकी सरकार थी तब आपने क्या किया उस पर जबाब सुनकर आप अचम्भित हो जाएंगे की हमने इस सम्बन्ध में एक योजना तैयार की थी परन्तु सरकार बदलने की कारण कुछ नही हो पाया यह सब इच्छा शक्ति की कमी नहीं तो और क्या हैं | एक बात विचलित करती हैं आज जनता के लिए सरकार पक्ष या विपक्ष की, परन्तु खुद नेताओं के विकाश में कमी कभी भी देखने को नहीं मिलती हैं| यह सबसे हैरान करने वाला व विचारणीय विषय हैं |

 

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