कोरोना: क्या हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन से ज्यादा कारगर साबित हो सकती है यह दवा?
April 14th, 2020 | Post by :- | 44 Views

नई दिल्ली: कोरोना की दवा बनाने के लिए दुनिया के कई देशों में रिसर्च जारी है. वैज्ञानिकों को अभी तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है. इस वजह से अब तक कोई दवा बाजार में नहीं आई है. हालांकि, इबोला वायरस की दवा ‘रेमेडिसविर’के इस्तेमाल से काफी ‘उत्साहजनक’ नतीजे मिले हैं. कोरोना के रोगियों को ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता होती है. अगर इस दवा का ट्रायल पूरी तरह से सफल रहा तो यह एंटी-वायरल कोरोना के रोगियों के इलाज में काफी मददगार साबित होगी. इबोला वायरस को खत्म करने के लिए यह दवा तैयार की गई थी.

अमेरिका, कनाडा, यूरोप और जापान में कोरोना से संक्रमित कुछ मरीजों पर इसका परीक्षण किया गया है. इस परीक्षण में सामने आया है कि दो तिहाई मरीजों को इस दवा से काफी लाभ हुआ है. स्वास्थ्य मंत्रालय में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के डॉ. रमन गंगाखेडकर ने सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी. हालांकि, उन्होंने कहा कि ये क्लिकनिल ट्रायल्स नहीं थे. इस दवा के इस्तेमाल से एक तिहाई लोगों को ऑक्सीजन और वेंटीलेटर की जरूरत नहीं पड़ी.

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन (NEJM) में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में 53 लोग, यूरोप और कनाडा में 22 लोग और जापान में 9 लोगों को 10 दिनों तक रेमेडिसविर दी गई. ये रोगी वेंटिलेटर पर थे. इन्हें एक दिन में 200 मिलीग्राम दवा को इंजेक्शन के जरिये शरीर में पहुंचाया गया. बाकी नौ दिनों के इलाज के दौरान 100 मिलीग्राम प्रतिदिन यह दवा दी गई.

एनईजेएम की रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक यह दवा नहीं दी गई थी 30 रोगियों (57%) को को वेंटीलेटर सपोर्ट दिया जा रहा था और 4 (8%) को एक्स्ट्रा कोरपोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन प्राप्त हो रहा था. एक्स्ट्रा कोरपोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन का उपयोग तब किया जाता है जब फेफड़े शरीर के लिए पर्याप्त हवा नहीं दे पाते हैं.

18 दिन बाद 36 रोगियों (68%) को ऑक्सीजन से जुड़ी दिक्कत कम हुई. 17 में से 30 रोगी (57%) जो वेंटीलेटर पर थे उन्हें वेंटीलेटर सपोर्ट की जरूरत खत्म हो गई. 10 अप्रैल को प्रकाशित NEJM लेख के अनुसार, कुल 25 रोगियों (47%) को छुट्टी दे दी गई. सिर्फ सात रोगियों (13%) की मृत्यु हो गई. फिलहाल मलेरिया के इलाज में काम आने वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को कोरोना के इलाज में काफी कारगार माना जा रहा है. अमेरिका ने भारत से यह दवा मांगी थी . भारत इस दवा का सबसे बड़ा उत्पादक है.

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।