सेनिटाइजर में प्रयोग सोडियम हाइपोक्लोराइट के छिडकाव के समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक :- डॉ तरुण विरमानी
April 14th, 2020 | Post by :- | 649 Views

 

हसनपुर पलवल (मुकेश वशिष्ट):-  कोरोना वायरस के मामले जहां भी मिल रहे हैं, वहां शहर और गांवों की गलियों, इमारतों, सड़कों, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सेनिटाइज़ करने के लिए बड़े पैमाने पर स्प्रे किया जा रहा है. यह आम तौर पर घर में प्रयोग होने वाले एल्कोहल आधारित हैंड सेनिटाइज़र से काफ़ी अलग होता है और अधिक तेजी से प्रतिक्रिया करता है|

भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए सोडियम हइपोक्लोराइट केमिकल का छिड़काव किया जा रहा है इसके बारे में डॉ तरुण विरमानी (एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष एमवीएन विश्वविद्यालय पलवल हरियाणा) ने बताया कि जिसे आमतौर पर ब्लीच के रूप में जाना जाता है, अक्सर एक कीटाणुनाशक एजेंट के रूप में उपयोग किया जाता है। यह एक व्यापक कीटाणुनाशक है जो वायरस, बैक्टीरिया, कवक के कीटाणुशोधन के लिए प्रभावी है| सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन हैल्थ केयर सर्विसेज़ में संक्रमण रोकने के लिए क्लोरीन आधारित रसायन का उचित प्रयोग करने की सलाह देता है.

इसके अलावा क्लोरीन, सोडियम हाइपोक्लोराइट, कैल्शियम हाइपोक्लोराइट जैसे क्लोरीन सोल्यूशन्स का *निससंक्रामक और रोगाणुरोधक* के तौर पर वर्ष-1800 से प्रयोग होता आया हैl हाल ही में अमेरिका में इबोला से बचने की तैयारियों में भी इन रसायनो का प्रयोग हुआ थाl इन रसायनो के 0.5% मात्रा के घोल आम तौर पर घरों में सफाई के लिए काम आने वाले रसायनो से कहीं अधिक कारगर होते हैंl

कुछ हैंड सेनिटाइजर्स 0.05% जितनी छोटी मात्रा में क्लोरीन आधारित घोल का प्रयोग करते हैं. सामान्य तरल जैविक अपशिष्ट कीटाणुरहित करने के लिए सोडियम हाइपोक्लोराइट की उपयुक्त एकाग्रता 5000 पीपीएम है,

लगभग 0.5%, घरेलू ब्लीच 5-6% सोडियम हाइपोक्लोराइट है,

लेकिन  सेंटर फॉर डीसीज़ कंट्रोल हैंड सेनिटाइज़र में क्लोरीन के लगातार प्रयोग के लिए मना करता है. इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है क्लोरीन घोल सफाई करने में सक्षम होते हैं और  विषाणु एवं जीवाणु जैसे कई माइक्रोऑर्गेनिज्म(सूक्ष्म जीवाणुओं) पर इनका असर होता है.

कितनी देर में ये सॉल्यूशन मारते हैं वायरस को?

क्लोरीन आधारित वाले घोल कितनी देर में वायरस को मार पाते हैं यह उस वायरस पर निर्भर करता है. साथ ही इस बात पर भी निर्भर करता है कि संक्रमित सतह कितनी देर तक उस घोल से भीगा रहा. इबोला और उसके जैसे दूसरे सूक्ष्म जीवाणुओं, जैसे कोरोनावायरस को मारने के लिए 0.5% से 0.6% के क्लोरीन सॉल्यूशन से संक्रमित जगह का कम से कम 10 मिनट भीगा रहना जरूरी है. इसके लिए कई बार दो या तीन बार घोल का छिड़काव करना पड़ेगा.

वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गनाइज़ेशन और सेंटर फॉर डीसीज़ कंट्रोल कहते हैं कि निससंक्रामक के प्रयोग से पहले संक्रमित जगह को साबुन और पानी से धो लेना चाहिए जिससे कार्बनिक पदार्थ से  निससंक्रामक को बेअसर होने से रोकने में मदद मिलेगी.

यह जानकारी यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या भारत की धूल भरी सड़कों, गाड़ियों और गंदे फर्श वाली इमारतों, अस्पतालों पर स्प्रे किया जा रहा डिस्इंफेक्टेंट कहीं बेअसर तो नहीं हो रहा? अगर ऐसा है तो कोरोनावायरस से निपटने में भारत को और लंबा समय लग सकता है. पैसे की जो बर्बादी होगी वो अलग है.

 सोडियम हाइपोक्लोराइट के प्रयोग से पहले इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक :-

यह क्लोरीन सॉल्यूशन बहुत तेजी से रिएक्ट करता है और यदि मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाए तो फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है एवं त्वचा पर खुजली और जलन पैदा कर सकता है इसलिए इसका छिड़काव करते हुए उचित सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाना आवश्यक हैl सोडियम हाइपोक्लोराइट के दुष्प्रभाव के बारे में उपरोक्त कथन की पुष्टि रिचा  रसायन, सेक्टर 74 फरीदाबाद (Richa Chemicals) द्वारा टेलीफोनिक बातचीत में की गई है। वे अपने परिसर में रसायनों से निपटने के दौरान हर संभव सावधानी बरत रहे हैं और उन्होंने उन लोगों के लिए उचित प्रणाली की सलाह दी जो सुरक्षा के लिए रसायनों का छिड़काव कर रहे हैंl

सोडियम हाइपोक्लोराइट का छिड़काव करने वाले सभी कर्मचारियों की सुरक्षा का इंतज़ाम सरकार कर रहा हैl उन्हें उचित सुरक्षा सूट, दस्ताने, मास्क और चश्मे मुहैया करवाने होंगे ताकि किसी भी तरह की समस्याओं से बचा जा सके। कुछ सामाजिक कार्यकर्ता भी कोरोना की रोकथाम के लिए स्प्रे का काम कर रहे हैं। यह मेरी सलाह है कि रसायनों का छिड़काव करते समय सावधानी बरतें| जरा सी लापरवाही काफी नुकसान दायक भी हो सकती हैं | जान है तो जहान है|

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।