फ़र्ज़ी जाती प्रमाणपत्र के आधार पर विधायक बने पूर्व मुख्यमंत्री पर होगी कार्यवाही ?
September 1st, 2019 | Post by :- | 175 Views

“फ़र्ज़ी जाती प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर सरकारी सेवा करने वाले पर जब होती है कार्यवाही तो फ़र्ज़ी जाती प्रमाणपत्र के आधार पर विधायक बने मुख्यमंत्री पर क्यों नही “

लोकहित एक्सप्रेस (रायपुर) अरुण कुमार पाण्डेय । एक तरफ़ जहां फ़र्ज़ी जाती प्रमाणपत्र प्रस्तुत करके सरकारी सेवा या अन्य लाभ लिए जाने की भनक लगते ही प्रशासन द्वारा कार्यवाही करते जेल भेज दिया जाता है, वहीं हाई पॉवर कमेटी द्वारा छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी व उनके विधायक पुत्र पर अबतक किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्यवाही होते नही दिख रहा है।

इसका सीधा अर्थ यही निकाला जा सकता हैकि प्रशासन सिर्फ कर्मचारियों और आम नागरिकों पर कड़ाई करने तक सीमित हैं, और इसके उलट राजनैतिक दमखम रखने वालों पर कार्यवाही करने से शहम जाते हैं।

आपको बता देकि छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजित जोगी के जाती प्रमाणपत्र की सत्यता जानने छत्तीसगढ़ राज्य में पूर्व की भाजपा सरकार के समय आदिमजाती कल्याण मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में जांच समिती गठित किया गया था।

उस समय भी इस जांच समिती ने अजित जोगी के जाती प्रमाणपत्र को सिरे से नकार दिया था, व रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया था कि अजित जोगी अनुसूचित जनजाति के नही हैं।

परंतु राजनैतिक लाभ के चलते उस समय भाजपा की सरकार ने इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नही किया, और अब हाई कोर्ट ने निर्देश पर जाती प्रकरण में बनाई गई “हाई पॉवर कमेटी” ने भी अजित जोगी के सभी जाति प्रमाणपत्र को फ़र्ज़ी बताते हुए उनके गृह ज़िला बिलासपुर के डीएसपी को अजित जोगी के समस्त जाती संबंधित दस्तावेजों को जप्त करने के आदेश दिए गए हैं।

सवाल यह उठता हैकि इतने वर्षों तक छत्तीसगढ़ की जनता को धोखा देकर अनुसूचित जनजाति हेतु आरक्षित सीट से वे विधायक व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री तक रहें।

राजनीति में आने से पहले अजित जोगी देश के सर्वोच्च सिविल सेवा में कलेक्टर जैसे सम्मानित पदों पर भी रहें।

उनके पुत्र वर्तमान में अनुसूचित क्षेत्र से विधायक हैं, क्या उनोर भी कार्यवाही होगी, क्या उनकी विधानसभा की सदस्यता छीन ली जाएगी..!

अब उनके द्वारा प्रस्तुत किये गए जाती प्रमाणपत्र फ़र्ज़ी साबित होने के बाद क्या उनपर अन्य कर्मचारियों / आमनागरिक के ही भांति कार्यवाही किया जाएगा..?

या देश का कानून रसूखदारों व आम नागरिकों के लिए अलग अलग है यह साबित करने की कोशिश होगी।

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