गृहमंत्री अनिल विज के गृहनगर में हुई एक केजुअलिटी गंभीर दुखद घटना : चित्रा सरवारा
April 2nd, 2020 | Post by :- | 185 Views

सरकार कोरोना पॉजिटिव आंकड़ों को छुपाकर लोगों की आंखों में कहीं धूल तो नहीं झोंक रहीं ?

अम्बाला, ( गौरव शर्मा )    :    हरियाणा डैमोक्रेटिक फ्रंट की नेत्री चित्रा सरवारा ने कहा कि कोविड-19 के चलते देश में लॉकडाउन का आज 8वां दिन है। मुझें उम्मीद हैं कि सभी लोग सरकार और प्रशासन के आदेशों का पालन कर रहें होंगे। अम्बाला छावनी के लिए बड़े दुख की बात है कि आज कोविड-19 के चलते प्रदेश के गृहमंत्री अनिल विज के गृहनगर अम्बाला छावनी में एक केजुअलिटी हुई है।

हरजीत सिंह कोहली आज इस दुनिया में नहीं है वह कोरोना से ग्रस्त थे उनकी पीजीआई चंडीगढ़ में मृत्यु हो गई। उनके परिवार से हमें संवेदना है और उनकी आत्मा की शांति के लिए हम भगवान से प्रार्थना करते हैं और हम आशा करते हैं पीछे उनके परिवार, पड़ोस, संगी, साथी सभी स्वस्थ हों।

चित्रा सरवारा ने कहा कि जो आज यह दुखद हादसा हुआ है यह अम्बाला के लिए एक अलार्म बैल है जिसे सब के मस्तिष्क में भी बजना चाहिए साथ ही इस हादसे ने हरियाणा सरकार की जो कमियां हैं उन्हें एकदम से उजागर कर दिया है कि हम कितनी भी बातें कर ले हमारा क्षेत्र हमारा प्रदेश और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज इससे जूझने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे।

आज मैं सरकार से कुछ सवाल पूछना चाहती हूं कि जब हरजीत कोहली बीमार थे वह अम्बाला शहर के एक निजी अस्पताल से अपना इलाज करवा रहे थे और करोड़ों रुपए की लागत से बने अम्बाला छावनी के नागरिक अस्पताल से उन्होंने इलाज करवाया जहां इस करोड़ों की लागत से बने नागरिक अस्पताल ने इन्हें पीजीआई रेफर कर दिया और वहां उन्होंने दम तोड़ दिया।

कल तक अम्बाला में कोविड से ग्रसित जो केस था केवल एक ही बताया जा रहा था जो कि नेपाल से आए युवक का था यानी कि हरजीत कोहली को अभी तक गिना ही नहीं गया था या इसका मतलब सरकार की ओर से सही आंकड़े लोगों को बताएं ही नहीं गए। कहीं ना कहीं यह भी लग रहा है कि सरकार इन आंकड़ों को छुपाकर लोगों की आंखों में कहीं धूल तो नहीं झोंक रहीं ? उन्होंने कहा कि क्या करोड़ों की लागत से बने इस अस्पताल में कोविट-19 से बचाव के लिए कोई अच्छा आईसीयू, वेंटिलेटर, डॉक्टर्स की टीम नहीं है ? क्या हमारा यह अस्पताल सक्षम नहीं है कोविड-19 के 1 केस को हैंडल करने के लिए ?

उन्होंने कहा जो खाना बाँट रही है उन निजी संस्थाओं को दी गई परमिशन कैंसल की जा रही है इस पर भी मैं एक सवाल उठाना चाहूंगी। हमें प्रशासन की ओर से मदद हेतु एक नंबर दिया गया था परंतु उस नंबर पर जब भी कॉल किया जाता है तो वह फोन उठाकर सिर्फ यही जवाब देते हैं कि आपको राशन चाहिए तो आस पड़ोस वाली किरयाने की दुकानों से ले लीजिए। यह प्रशासन के संज्ञान में भी हम लाए हैं लेकिन उसके उपरांत भी अभी तक कोई भी सुचारू रूप से मदद की व्यवस्था प्रशासन की ओर से स्थापित नहीं हो पाई है जबकि लॉकडाउन हुए 8 दिन हो चुके हैं। जो लोग प्रशासन के दिए गए नंबरों पर अभी भी कॉल कर रहे हैं उन्हें यही कहा जा रहा है कि अभी तो हम सूची बना रहे हैं अभी हम सर्वे कर रहे हैं। अगर अभी तक सर्वे हो रहा है तो लोग अपने घर में किस प्रकार बैठे रहेंगे। वह बाहर निकलने को मजबूर हो जाएंगे।

सामाजिक संस्थाएं जो जनता की सहायता कर रही थी और जिनके प्रशासन की ओर से लाइसेंस और परमिशन कैंसल की जा रही है और उनके बीच जो राजनीतिक पक्षपात किया जा रहा है तो यह बहुत दुःख की बात है यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। मेरी गुजारिश है गृहमंत्री से, मेरी गुजारिश है स्वास्थ्य मंत्री से और मेरी गुजारिश हैं प्रशासन से इन सारी बातों को संज्ञान में लेते हुए जो ट्राइड टेस्ट मेथड है उनको लेकर आया जाए। सामाजिक संस्थाएं जो इस कार्य में जुटी हुई है उनकी परमिशन कैंसल न की जाए, अगर ऐसा किया जाता है तो एक तरह का कोहराम मच सकता है। मेरी प्रशासन से गुजारिश है कि हर तरह से जहां-जहां जिसकी मदद चाहिए वह लेकर एक व्यवस्थित ढंग से कार्य को किया जाए।
उन्होंने कहा कि आज अखबार भरे पड़े हैं जो आज फ्रंट लाइन पर हमारे डॉक्टर और नर्स हमारे लिए लड़ रहे है उनके पास PPE’s यानी हैज़्मैट सूट, एन-95 मास्क, बॉडी कवरआल, ग्लव, गोगल, हेड और शू कवर तक नहीं है। सोशल मीडिया के माध्यम से डॉक्टर कामना कक्कड़ ने एन-95 मास्क मांगा तो आपने उनका सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट करा दिया। पंचकुला, रोहतक, गुड़गांव, फ़तेहाबाद सभी जगह के डॉक्टरों की कहानी एक जैसी है। भगवान के लिए इन्हें अपने हाल पर ना छोड़िए। यह एक वेकअप कॉल है सरकार के लिए प्रशासन के लिए स्वास्थ्य मंत्री के लिए कृपया करके कोई ठोस कदम उठाया जाए सशक्त कदम उठाया जाए और यहां पर इस रोग को हमें आगे बढ़ने से रोकना है। आप सभी से गुजारिश है घर पर रहें और स्वस्थ रहें। साथ ही प्रशासन से गुजारिश है अब जाग जाएं और ठोस कदम उठाएं।

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