हरियाणा के देसी कलाकारों से अब नहीं लिया जाएगा चपरासी स्तर का काम : रॉकी मित्तल
February 25th, 2020 | Post by :- | 138 Views

चंडीगढ़, लोकहित एक्सप्रैस ( मनोज शर्मा )    ।     हरियाणा के देसी कलाकारों और भजन पार्टियों से अब चपरासी स्तर के और अन्य किसी भी तरह के निचले दर्जे के का कार्य सरकारी अधिकारी नहीं ले सकेंगे। इसके लिए एक नोटिस हरियाणा स्पेशल पब्लिसिटी चेयरमैन रॉकी मित्तल ने सरकार से जारी करवा दिया है। वास्तव में यह हरियाणा के हुनरमंद कलाकारों के लिए बहुत बड़ी राहत वाली बात है जो मुख्यमंत्री और हरियाणा के विकास की पब्लिसिटी के लिए हायर किए गए हैं।

पिछले दिनों गुड़गांव और कुरुक्षेत्र में स्पेशल पब्लिसिटी सेल के चेयरमैन रॉकी मित्तल के नेतृत्व में चार दिवसीय ट्रेनिंग के दौरान 300 से ज्यादा देसी कलाकारों और भजन पार्टियों ने दुखी होकर यह समस्या रखी थी। इस समस्या को सुनते हुए रॉकी मित्तल ने वादा किया था कि आप सभी कलाकार हैं और आपके पद का सम्मान किया जाएगा। किसी भी कलाकार से उनके पद के गरमा को देखते हुए ही काम लिया जाएगा। यानि अब कलाकारों से क्लर्क के लेवल का काम तो लिया जा सकता है लेकिन उनसे चपरासी और अन्य नीचले दर्जे के कार्यों में नहीं लगाया जा सकता है।

गौरतलब है कि ट्रेनिंग के दौरान कुछ देसी कलाकारों ने बताया था कि उनसे चौकीदारी, गड्ढे खोदना और चपरासी का काम लिया जाता है। संगीत, गायन और हरियाणवी लोककला में दक्ष इन सभी कालाकारों ने रॉकी मित्तल से अनुरोध किया था कि किसी भी तरह से उन्हें इस कलंक से निजात दिला दे। रॉकी मित्तल ने वादा किया था कि एक हफ्ते के अंदर ही सरकार द्वारा यह आदेश पारित कर दिए जाएंगे। वादे के अनुसार रॉकी मित्तल ने सरकार से यह आदेश निकलवा दिए। स्पेशल पब्लिसिटी चेयरमैन का पद संभालने के बाद रॉकी मित्तल बिना किसी अवकाश के लगातार काम कर रहे हैं। हरियाणा को नशामुक्त बनाने और मुख्यमंत्री की योजनाओं को घर घर तक पहुंचाने का जिम्मा रॉकी मित्तल को मिला है।

मुख्यमंत्री के प्रचार प्रसार को नए सिरे से प्रबल बनाने को लेकर आने वाले समय में कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले आने की उम्मीद रॉकी मित्तल से की जा रही है। रॉकी मित्तल ने विश्वास दिलाया है कि आने वाले हफ्ते में कई बड़े फैसले लिए जाएंगे।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।