हरियाणा पावर कार्पोरेशन वर्कर यूनियन के बेनर तले “आज का दौर और चुनौतियां” विषय पर सेमिनार का आयोजन |
February 11th, 2020 | Post by :- | 70 Views

हसनपुर पलवल (मुकेश वशिष्ठ) :- आल हरियाणा पावर कार्पोरेशन वर्कर यूनियन के बेनर तले “आज का दौर और चुनौतियां” विषय पर केसी वाटिका में सेमिनार का आयोजित किया गया। इसमें सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा, रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा, सेन्टर आफ ट्रेड यूनियनज,अखिल भारतीय किसान सभा से जुड़े सैकड़ों की संख्या में कर्मचारियों, मजदूरों, पैंशनर्ज व किसानों ने भाग लिया। सेमिनार में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांंबा, वरिष्ठ उप प्रधान नरेश कुमार शास्त्री,  अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी महासंघ के कोषाध्यक्ष व  सीटू के जिला प्रधान श्रीपाल सिंह भाटी, जिला प्रधान राजेश शर्मा, सचिव योगेश शर्मा, हरियाणा रोड़वेज वर्कर यूनियन के मुख्य सलाहकार राम आसरे यादव,आल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन के उप महासचिव रमेश चंद,नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के उप महासचिव सुनील चिडालिया, मकैनिकल वर्कर यूनियन के नेता राकेश तंवर,सीटू के  वरिष्ठ उप प्रधान दरियाव सिंह, किसान सभा के प्रधान धर्मचंद आदि शामिल थे। सेमिनार में सीएए, एनपीआर व एनपीआर के मचे शोर के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं जन सेवाओं का निजीकरण करने की घोर निंदा की। सेमिनार से पहले बिजली कर्मचारियों ने बिहार के बिजली कर्मचारियों व अधिकारियों पर किए लाठीचार्ज व इंजीनियर सुरेंद्र कुमार को निलंबित करने और  केन्द्रीय बजट में बिजली आपूर्ति के निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ प्रदर्शन किया गया।

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांंबा ने नव उदारीकरण की नीतियों को लागू करने के कारण आर्थिक मंदी व बेरोजगारी भंयकर रुप धारण कर चुकी है।मंहगाई बढ रही है और जीडीपी व रुपये की कीमत गिर रही हैं।उन्होंने कहा कि सरकार आर्थिक मंदी से निकलने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में निवेश बढाकर रोजगार पैदा करने की बजाय समाज कल्याण की स्कीमों मे कटौती की जा रही है। जिसके कारण संकट और बढ रहा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पेश किया गया बजट मंदी की मार से ग्रस्त बहुमत जनता पर और अधिक आर्थिक बोझ डालकर उसकी जिदंगी ज्यादा मुश्किल बढाने जा रहा है। बजट में आम जनता पर किए जाने वाले खर्च में अभूतपूर्व कटौती की गई है तथा रइसों और कारपोरेट घरानों को भारी छूटें, रियायतें और सौगतें दी गई हैं। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा के बजट में 75532 करोड़ रूपए, खेती व उससे जुड़ी गतिविधियों में 30683 करोड़ रूपये, मनरेगा में 9500 करोड़ रूपए, सामाजिक सुरक्षा में 2640 रूपए, शहरी विकास में 5763 करोड़ रूपए और स्वास्थ्य पर खर्च में 1169 करोड़ रूपए की कटौती की गई हैं। इनके चलते  देश के करोड़ों लोग गरीबी में धकेल दिए जाएंगे। तथा  अमीर और गरीब के बीच असमानता और ज्यादा बढ़ेगी।

 

 

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