हिमाचल प्रदेश की प्रत्येक पंचायत में गोसदन खोलने की योजना भी नहीं चढ़ पाई सिरे,इन्दौरा के ठाकुरद्वारा में दिन रात दर्जनों आबारा पशु उजाड़ रहे है हरी भरी फसलों को
February 9th, 2020 | Post by :- | 118 Views

गगन ललगोत्रा (व्यूरो कांगड़ा)

कई वर्ष पहले हिमाचल प्रदेश में किसानों को लावारिस पशुओं की समस्या से निजात दिलाने के लिए पशुयो पर टैग लगाकर पंजीकरण करने की योजना शुरू की गई थी जोकी आज तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। इस योजना के शुरू होने से किसानों को लोगों द्वारा पशुओं को लावारिस छोडऩे का सिलसिला बंद होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन यह योजना सरकार और बिभाग सिरे नही चढ़ा सका है ।
वहीं, प्रदेश सरकार की प्रत्येक पंचायत में गोसदन खोलने की योजना भी सिरे नहीं चढ़ पाई है, जबकि किसानों को सरकार द्वारा प्रत्येक पंचायत में गोसदन के निर्माण की घोषणा से उम्मीद की नई किरण जगी थी। हालांकि कई पंचायतों ने गाैसदन के निर्माण के लिए प्रस्ताव भी भेजे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक मंजूरी नहीं मिल पाई।

मंड क्षेत्र के गाँवो ठाकुरद्वारा, बरोटा,पराल,मलकाना,आदि गाँवो में लावारिस पशुओं से फसलों को बचाना किसानों के लिए आफत बना हुआ है कुछ हद तक तो बेमोश्मी बारिश होने से कनक की फसल पहले ही पचास प्रतिशत तक बर्वाद हो चुकी है और रहती फसल को। लावारिस पशुओं ने बड़ी बेरहमी से उजाड़ना शुरू कर दिया है, जबकि मौसम की बेरूखी से किसान पहले ही काफी परेशान हैं। क्षेत्र के लोगों गुरदीप सिंह, राणा प्रताप सिंह,, अमरनाथ, बंसी लाल,, गगन सहित , कई लोगों ने कहा कि लावारिस पशुओं की उजाड़ से उनकी फसल बर्वाद हो रही है। फसल को बचाने के लिये रात दिन खेतों में पहरा दे रहे है और रात में जब भी कभी कुछ घण्टो के लिए नींद आती है तो दर्जनों पशु एक साथ खेत मे घुसकर फसल को चंद मिनटों में तबाह करके चले जा रहे है ।और पूरी रात फसलों को तबाह करके यह आबारा पशु दर्जनों दर्जनों झुंडों में इकठे होकर खुले खेतो में धूप तपते नजर आते है । उक्त किसानों ने प्रशासन से लावारिस पशुओं से उनकी फसलों को बचाए जाने की मांग की है

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