मुख्यमंत्री के पिता के ब्राह्मण विरोधी बयानबाज़ी के चलते आगामी चुनाव में उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान
August 29th, 2019 | Post by :- | 457 Views

छत्तीसगढ़ (बलरामपुर) । छत्तीसगढ़ के कांग्रेसी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल ब्राह्मणों को लेकर अपने विवादित बयान के चलते आजकल काफ़ी चर्चा में हैं।

नंद कुमार बघेल का मानना हैकि ब्राह्मण वर्ग अन्य वर्ग के साथ छूआछूत का व्यवहार करते हैं, इसलिए अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को ब्राह्मणों का विरोध करना चाहिए।

छत्तीसगढ़ राज्य में धर्मपरिवर्तन का खेल वर्षों से खेला जा रहा है, इसके लिए आदिवासी समाज़, सतनामी समाज़, अन्य समाज़ के नेताओं को विदेशी फंडिंग आती है।

इस फंड का पूर्ण इस्तेमाल वे अपने भौतिक सुखसुविधाओं के लिए कर सके इसके बदले में उन्हें अपने समाज़ के लोगों को ईसाई धर्म में लाने का प्रयास किया जाता है।

छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर व सरगुजा संभाग को आदिवासी बहुल अंचल होने के साथ समय के हिसाब से आज भी काफ़ी पिछड़ा हुआ क्षेत्र है। यहां शिक्षा – स्वास्थ्य – रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं का आज भी अभाव बना हुआ है।

जिस कारण इस क्षेत्र के निवासी अपने जीविकोपार्जन हेतु स्थानीय संसाधनो के अतिरिक्त मजदूरी पर निर्भर होने मजबूर हैं।

इन अंदरूनी इलाकों के आदिवासी व अन्य समाज़ के लोगों को बहला फुसलाकर इन्ही समाज़ के ठेकेदारों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से बरगलाकर हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में प्रवेश कराया जाता है।

प्रति व्यक्ति के आंकड़े के अनुसार मिशनरियों के माध्यम से इन समाज़ के ठेकेदारों को विदेशी फंड प्राप्त होता है,जिसका उपयोग वे अपने भौतिक सुख सुविधाओं हेतु करते हैं।

लगातार 20 वर्ष से भी अधिक समय तक धर्मपरिवर्तन का यह खेल बस्तर व सरगुजा के अंदरूनी इलाकों में होता आ रहा है और आज स्तिथी यह हैकि अधिकतर आदिवासी स्वयं को हिंदू मानने के बदले ईसाई धर्म का मानने लगे हैं।

अब मिशनरियों का लक्ष्य अन्य पिछड़ावर्ग व अन्य जाती के लोगों को हिंदुत्व के मार्ग से भटकाकर ईसाइयत के मार्ग ओर लेन का है।

छत्तीसगढ़ राज्य में भुपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनते ही आदिवासियों को समाज़ के ठेकेदारों द्वारा हिंदू धर्मग्रंथ पढ़ने सुनने, रक्षाबंधन व अन्य हिन्दू तीज त्यौहार न मनाने हेतु ध्वनिविस्तारक यंत्रों, पांप्लेट व अन्य माध्यमों से बार बार प्रेरित किया जाने लगा है।

विगत स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के कोंडागांव ज़िला मुख्यालय में जिस मंच पर प्रदेश के मुखिया ने कार्यक्रम को संबोधित किया उसी मंच से किसी आदिवासी नेता द्वारा अपने समाज के लोगों को रामायण ग्रंथ न पढ़ने की नसीहत दिया जा रहा था।

रक्षाबंधन के त्यौहार से कुछ दिन पूर्व बस्तर ज़िला मुख्यालय जगदलपुर से महज़ चंद किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ सरगीपाल गांव में ऑटोरिक्शा पर ध्वनिविस्तारक यंत्र लगाकर रक्षाबंधन के त्यौहार को आदिवासी सभ्यता के विरुद्ध बताते प्रचार किया जा रहा था।

कोंडागांव ज़िला के बड़े राजपुर ब्लॉक में आदिवासी समाज द्वारा पाम्पलेट छपवाकर रक्षाबंधन मनाने वाले समाज़ जनों को 1 हज़ार रुपये का अर्थदण्ड लगाने की चेतावनी जारी किया गया था।

वास्तव में आम आदिवासी या अन्यपिछडावर्ग के लोगों को अपने रोज़ोरोटी से फुर्सत नही हैकि वे इतना सोच सकें कि उनके पूर्वज हिंदू थे या मुसलमान या फिर सिख या ईसाई।

इन वास्तविक आदिवासी व अन्यपिछड़ावर्ग के लोगों को केवल सरकार से आज तक अपने जीवन स्तर को सुधारने की आशा है पर जो आजतक नही हो सका।

अब चूंकि शिक्षित वर्ग के लोग चाहे वे ब्राह्मण हो या क्षत्रिय या फिर शिक्षित अन्यपिछडावर्ग या आदिवासी समाज के लोग जब इन वास्तविक समस्या की तरफ सरकार को सोचने के लिए विवश किया जाता है, और जब सभी शिक्षित वर्ग इस समस्या पर एकजुट होकर संघर्ष करने लगते हैक तब उन्हें तोड़ने के लिए पुनः जाती धर्म की लड़ाई उनके बीच छेड़ दिया जाता है।

अब ताज़ा मामला स्वयं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भुपेश बघेल के पिता नंद कुमार पटेल द्वारा ब्राह्मणों के बारे में विवादित बयान देकर ज़बरदस्ती छत्तीसगढ़ राज्य के शांतिपूर्ण माहौल को ख़राब करने की कोशिश किया गया है।

आपको बतादेकी नंद कुमार पटेल ने रावण वध के बारे में किताब भी लिखा था। नंद कुमार बघेल के अनुसार रावण को ब्राह्मण नही बल्कि कुर्मी जाती का होना दर्शाया है।

आज छत्तीसगढ़ के बलरामपुर ज़िला के राजपुर में ब्राह्मण समाज़ के सदस्यों द्वारा नंद कुमार बघेल के आपत्तिजनक बयान का विरोध करते पुतला जला कर विरोध प्रदर्शन किया गया है।

चंद महीनों में छत्तीसगढ़ राज्य में पंचायत व नगरीय निकाय चुनाव होने हैं अब छत्तीसगढ़ के कांग्रेसी मुख्यमंत्री के पिता द्वारा ब्राह्मण विरोधी बयानबाज़ी के चलते उन्हें आगामी चुनाव में ब्राह्मण समाज़ द्वारा भारी नुकसान की संभावना जताई जा रही है।
वही कांग्रेस के सदस्य व पदाधिकारी जो ब्राह्मण हैं उनके मन में भी कहीं न कहीं विरोधाभास की भावना ने घर बना लायक़ है। उन्हें मुख्यमंत्री के पिता का बयान न तो निगलते बन रहा है न ही उगलते।

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