निर्भया केसः मुकेश की वकील बोलीं, अंतिम सांस तक मुझे हर विकल्प इस्तेमाल करने का अधिकार
February 2nd, 2020 | Post by :- | 126 Views

 दिल्ली हाईकोर्ट में निर्भया सामूहिक बलात्कार-हत्या मामले की सुनवाई जारी है। केंद्र सरकार ने बचाव पक्ष की ओर से चारों दोषियों की फांसी पर लगी रोक को चुनौती देने के खिलाफ याचिका दायर की है। इस दौरान केन्द्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जजों से कहा कि निर्भया के दोषी देश के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं।  आपकाे बता दें कि दिल्ली की एक अदालत द्वारा शुक्रवार (31 जनवरी) को निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड के चार दोषियों की मृत्यु के वारंट की तामील अगले आदेश तक स्थगित किए जाने के बाद उन्हें शनिवार सुबह दी जाने वाली फांसी एक बार फिर टाल दी गई थी।

दोषी मुकेश के लिए कोर्ट में बहस कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने कहा कि केंद्र जहां निर्भया मामले के दोषियों पर विलंब का आरोप लगा रहा है, वहीं खुद वह महज दो दिन पहले जागा है। मेरे कानूनी उपायों का उपयोग करने के लिए आप मेरी निंदा नहीं कर सकते। संविधान के अनुसार, मुझे अपने जीवन के अंतिम सांस तक हर विकल्प को इस्तेमाल करने का अधिकार है।

एपी सिंह ने आगे कहा कि इस ही मामले में जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है? उन्होंने कहा कि दोषी गरीब, ग्रामीण और दलित परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। कानून में अस्पष्टता का खामियाजा भुगतने के लिए उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता। दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और संविधान द्वारा फांसी की सजा देने के लिए कोई निर्धारित समय नहीं दिया गया है।

तुषार मेहता ने आगे कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा फांसी की सजा पर लगाई गई रोक के ऑर्डर पर रोक लगनी चाहिए। सभी दोषी देश में न्यायिक प्रणाली को हराने का आनंद उठा रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, मृत्युदंड की सजा देने के लिए संस्था की विश्वसनीयता दांव पर है। तेलंगाना में लोगों ने बलात्कार के आरोपियों के एनकाउंटर के बाद जश्न मनाया।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कानून के मुताबिक दोषियों को फांसी दिए जाने से पहले 14 दिनों का नोटिस दिया जाना जरूरी है। इस मामले में, 13 वें दिन एक दोषी कुछ दलील दायर करेगा और फिर सभी के खिलाफ जारी डेथ वारंट पर रोक लगाने की मांग करेगा। ये सभी मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दया क्षेत्राधिकार हमेशा एक व्यक्तिगत अधिकार क्षेत्र है। राष्ट्रपति अपनी परिस्थितियों के कारण किसी दोषी के प्रति दया दिखा सकते हैं। यह अन्य दोषियों पर कैसे लागू होगा? तुषार मेहता ने हाईकोर्ट से कहा कि दिल्ली जेल नियम के मुताबिक, सभी दोषियों को एक साथ फांसी दी जानी चाहिए, अगर ‘अपील या आवेदन’ लंबित है। इस ‘अपील या आवेदन’ में दया याचिकाएं शामिल नहीं हैं। वे अलग हैं और इसमें शामिल नहीं किया जा सकता है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाई कोर्ट से कहा कि पवन गुप्ता जानबूझकर सुधारात्मक या दया याचिका दायर नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि अगर ट्रायल कोर्ट का आदेश आता है, तो पवन या तो क्यूरेटिव या दया याचिका दायर कर सकता है, दूसरों को फांसी नहीं होगी। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि दोषी की ओर से जानबूझकर देरी की जा रही है। न्याय के हित में कोई देरी नहीं हो सकती, मौत की सजा में देरी नहीं हो सकती। दोषी के हित में, मौत की सजा में किसी भी तरह की देरी का आरोपी पर अमानवीय प्रभाव पड़ेगा। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि एक बार सुप्रीम कोर्ट ने सभी दोषियों के भाग्य को अंतिम रूप से तय कर दिया, उन्हें अलग से फांसी दिए जाने से कोई रोक नहीं है। जेल नियमों के मुताबिक, फांसी से बचने का अंतिम कानूनी उपाय सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन है।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।