उपकारागृह में हुई थी बंदी की मौत, तीन दिन बाद पुलिस-प्रशासन एवं महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष अनीता जाटव की समझाइश पर शव लेने को तैयार हुए परिजन, पुलिस की मौजूदगी में 57 घंटे बाद हुआ अंतिम संस्कार
January 30th, 2020 | Post by :- | 150 Views

लोकहित एक्सप्रेस. हिंडौन सिटी(करौली)

हिंडौन के उपकारागृह में बनकी के दोहरे हत्याकांड के मामले में बंद चल रहे बंदी मोहरसिंह की मौत के बाद परिजन शव लेने से इंकार कर रहे थे। तीन दिन बाद पुलिस-प्रशासन एवं महिला कांग्रेस  की जिलाध्यक्ष अनीता जाटव की समझाइश के बाद ही परिजन शव लेने को तैयार हुए। समझाइश में अनीता जाटव की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा सकती है क्यों कि मृतक जाटव समाज का था और समाज के तौर पर ही अनीता जाटव ने मुख्य भूूमिका निभाई।  ऐसे में

करीब 57 घंटे बाद गांव बनकी में पुलिस की मौजूदगी में मृतक का अंतिम संस्कार किया गया।

डेढ़ साल पूर्व बनकी में हुए दोहरे हत्याकांड के चर्चित प्रकरण में उपकारागृह के विचाराधीन बंदी मोहर सिंह पुत्र हरचंद की सोमवार को सुबह उपकारागृह में तबीयत बिगड़ गई थी। उपकारागृह के चालानी गार्ड उसे तुरंत ही राजकीय अस्पताल लेकर गए। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने प्रथम दृष्टया बताया कि उसकी हृदय गति रुकने से मौत हो गई। अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट युधिष्ठर मीना ने भी अस्पताल पहुंचकर शव का अवलोकन किया और पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल बोर्ड गठित कराया। लेकिन परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। उन्होंने मांग की थी कि जेल में बंद मोहरसिंह के पुत्र को जमानत पर रिहा किया जाए व उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई की जाए। ऐसे में मोर्चरी के बाहर सुरक्षा की दृष्टि से चालानी गार्ड तैनात किए गए थे। मंगलवार को 33 घंटे बाद पोस्टमार्टम तो करा दिया गया, लेकिन परिजनों ने शव नहीं लिया। बुधवार को जेल में बंद पुत्र पिंटू जमानत पर रिहा होकर अस्पताल पहुंचा। जहां एसडीएम सुरेश कुमार यादव, तहसीलदार रामकरण मीना, विकास अधिकारी लखन सिंह व थानाप्रभारी परभातीलाल ने समझाइश की तो परिजन शव लेने को तैयार हो गए।

पुत्र ने लगाए जेल प्रशासन पर आरोप

हत्याकांड के मामले में उपकारागृह में बंद मृतक मोहर सिंह के पुत्र पिंटू ने अस्पताल में मौजूद अधिकारियों के समक्ष जेल प्रशासन पर आरोप भी लगाए। उसका कहना रहा कि रविवार की रात ही उसके पिता की तबीयत खराब हो गई थी और उसने जेल प्रशासन से डॉक्टरों को बुलाने को कहा था, लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। लापरवाही बरतने पर ही उसके पिता की मौत हुई है। जिस पर अधिकारियों ने मामले की पूरी जांच करवाने का आश्वासन दिया। दूसरी ओर जेलर किशनसहाय का कहना रहा कि जेल प्रशासन पर लगाए जा रहे आरोप निराधार है।

यह था मामला

उपकारागृह के जेलर किशनसहाय मीना ने बताया कि 9 सितंबर 2018 को लेनदेन के मामले में बनकी में दो पक्षों में खूनी संघर्ष हो गया था। इसमें एक पक्ष के घायल दो जने पिता-पुत्र सुमेर सिंह व नाहर सिंह की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इस प्रकरण में पुलिस ने 11 जनों को गिरफ्तार किया था। जिसमें पांच जने जमानत पर रिहा हो गए। इसी प्रकरण में बनकी के मोहर सिंह(65) को भी अक्टूबर 2019 में गिरफ्तार किया गया था। तभी से उपकारागृह में मोहर सिंह सहित उसका पुत्र अन्य बंदी न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे थे। मोहर सिंह की तबीयत बिगड़ने पर 27 जनवरी की सुबह मौत हो गई थी।

मांगों को पूरा करने का दिया आश्वासन

मृतक का शव लेने के लिए समझाइश कर रहे अधिकारियों के समक्ष परिजनों ने कई मांग रखी। जिनमें

मौत की न्यायिक जांच करवाने,मुकदमे की सीबीआई जांच कराई जाए, पीडित परिवार को 20 लाख की आर्थिक मदद दी जाए,पीडित परिवार को आत्मरक्षा के लिए हथियार का लाइसेंस दिया जाए,मोहर सिंह की मौत में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए,जिन परिवारों को घर से बेघर किया गया, उन घरों को पुन व्यवस्थित किया जाए,बनकी में सुरक्षा के इंतजाम के लिए पुलिस चौकी स्थापित करवाई जाए आदि शामिल रही।

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