सेवानिवृति के बाद अपने अंधकारमय भविष्य के लिए प्रदेश का कर्मचारी चिंतित
January 19th, 2020 | Post by :- | 92 Views

रोहतक: 【लोकहित एक्सप्रेस, ब्यूरो चीफ विकास ओहल्याण 9541232423】हरियाणा कर्मचारी महासंघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि प्रदेश सरकार विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पुरानी पेंशन नीति को बहाल करने का प्रस्ताव लेकर आए, क्योंकि कर्मचारियों की सेवानिवृति के बाद बुढ़ाने में पेंशन ही उनके जीवन का एकमात्र सहारा है लेकिन सरकार कर्मचारियों से उनका यह सहारा छिनना चाहती है जोकि सरासर गलत है। महासंघ के प्रांतीय महासचिव वीरेन्द्र सिंह धनखड़ ने कहा कि नई पेंशन नीति की राशि का सरकार द्वारा निजी क्षेत्र, शेयर मार्किट व म्यूचुअल फंडों में निवेश किया जाता है जिसका लाभांश सुनिश्चित नहीं है। सुरक्षित भविष्य के लिए संग्रहित राशि में अनिश्चितता के चलते सेवानिवृति के बाद अपने अंधकारमय भविष्य के लिए प्रदेश का कर्मचारी चिंतित है। कर्मचारी नेताओं ने केन्द्र व राज्य सरकार से प्रश्न किया कि जब संसद या विधानसभा में केवल एक बार सांसद या विधायक बन जाता है तो उसे आजीवन पेंशन की सुविधा मिलती है तो फिर एक देश, एक विधान के अंदर इतनी भारी असमानता क्यों। उन्होंने बताया कि पेंशन बहाली संघर्ष समिति पूरे प्रदेश के सभी मंत्रियों, विधायकों, सत्ता एवं विपक्ष के नेताओं को ज्ञापन सौंपकर पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग कर रही है। हरियाणा कर्मचारी महासंघ इनके आंदोलन का पुरजोर समर्थन करते हुए राज्य सरकार से मांग करता है कि पुरानी पेंशन नीति को लागू किया जाए अन्यथा पेंशन बहाली संघर्ष समिति जो भी आंदोलन करेगी, कर्मचारी महासंघ पूर्व की भांति उनके आंदोलन को तब तक समर्थन करता रहेगा जब तक सरकार इसे लागू नहीं करती।
प्रांतीय महासचिव श्री धनखड़ ने कहा कि कर्मचारी वर्ग सरकार की रीढ़ होता है। सरकार की सभी कल्याणकारी नीतियों को जनता तक पहुंचाने में अपना योगदन देता है इसलिए किसी भी लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित सरकार का नैतिक दायित्व बनता है कि वह वार्ता की मेज पर मांगों व समस्याओं का समय रहते समाधान करें ताकि सरकार व कर्मचारी वर्ग में सौहृार्दपूर्ण माहौल कायम रह सके। उन्होंने कहा कि 20 जुलई 2019 को प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ जिसमें राज्य सरकार के सभी आला अधिकारी भी मौजूद थे, चण्डीगढ़ में हरियाणा कर्मचारी महासंघ के साथ दो दौर की बातचीत हुई थी। इस बातचीत में भी महासंघ ने पुरानी पेंशन नीति बहाल करने की मांग को प्रमुखता से उठाया था। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष तथा विपक्ष के नेता को परिपत्र लिखकर पुरानी पेंशन नीति शीघ्र लागू करने की मांग की गई है। गौरतलब है कि 2004 में केन्द्र में एनडीए व वर्ष 2006 में प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने पुरानी पेंशन नीति बंद कर दी थी।

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