पीलीभीत : जंगल के बीचोबीच एक किलोमीटर में फैला प्राचीन मंदिर के गर्भ गृह में जुताई के समय मिलती है 11 वीं शताब्दी की मूर्तियां व शिलालेख
January 11th, 2020 | Post by :- | 278 Views

पीलीभीत, विक्रान्त शर्मा ।

जंगल मे स्थित बने मंदिर के टीलों से लेकर खुदाई में मिली शिलालेख व मूर्तियों को लेकर पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने किया निरीक्षण,,

  पीलीभीत को मिलेगी पुरातत्व की ख्याति से नई उपलब्धि

पीलीभीत के जंगल के बीचोबीच स्थित इलाबास देवल के देवस्थल के छिपे रहस्य से पीलीभीत को नई ख्याति मिल सकती है । बीते दिनों पुरातत्वविद की टीम द्वारा सर्वेक्षण कर  मंदिर के गर्भ गृह में मिली खुदाई के दौरान की मूर्तियों व शिलालेखों की रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जा चुकी है । बताया जाता है गांव के लोगों को आज भी खुदाई के समय मूर्तियां व 11 वीं शताब्दी के लगभग की शिलालेख मिले है जिसके लिए पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने सर्वे किया है । जंगल के बीच स्थित ये बीसलपुर तहसील मे इलावांस देवल नाम से प्रसिद्ध प्राचीन देव स्थल मंदिर को आप देख रहे है । यहां हर वर्ष भारी मेला लगता है । यूं तो मंदिर के आसपास ग्रामीणों को यहां खुदाई के दौरान खेतो में मूर्तियां व शिलालेख प्राप्त होते है । वहीं मंदिर के गर्भ गृह में बने टीले भी अपने मे रहस्य छुपाए हुए हैं

शिवम कश्यप  का कहना है कि वे मंदिर के गर्भगृह  के रहस्य के बारे में बीते दो वर्षों से अध्ययन कर रहे है । जो बीसलपुर तहसील के जंगलों में बना है उन्होने पत्र लेखन के माध्यम से जिला प्रशासन को पुरातत्व से जुड़े इस मंदिर के बारे में अवगत कराया गया । शाशन से संज्ञान लेने के बाद बीते दिनों आगरा की पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने देव स्थल पर आकर खुदाई में मिली खजुराहो जैसी मूर्तियों व मिली शिलालेखों के बारे में ग्रामीनो से बात की और 11 वीं शताब्दी से जुड़ी इस मंदिर के गर्भ गृह के रहस्य से पीलीभीत को नई ख्याति मिलेगी। बहुत जल्द अन्वेषण के बाद पीलीभीत में दक्षिण भारत के राजा से जुड़ी कहानी को पूरे प्रदेश में जाना जाएगा ये पीलीभीत जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है ।
 स्थानीय निवासी जगन्नाथ का कहना है कि बीते कई वर्षों से उनके गांव से लेकर दूर दूर से लोग यहां आते है ये मंदिर कुल देवी के मंदिर के नाम से प्रसिद्ध जहां हर मनोकामना पूवर्णं होती है हर वर्ष यहां भारी मेले का आयोजन होता है । बीते दिनों पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने यहाँ आकर खोजबीन कर जांच पड़ताल भी है । विभिन्न समाचार पत्रों ने इसके रहस्य के बारे में कई बातें सामने आई है । जिसको लेकर पीलीभीत को एक नई पहचान मिल पाएगी।
पीलीभीत के जंगलों में वसा इलावांस देवल के प्राचीन मंदिर को अब पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम के सर्वे के बाद पीलीभीत को नई पहचान मिल सकेगी । साथ ही मंदिर में मिली मूर्तियां व शिला लेखों का संरक्षण कर लाखो लोगो की जुड़ी आस्था की धरोहर हो संरक्षण मिल सकेगा और पीलीभीत को विशेष ख्याति मिलेगी ।
पीलीभीत जिले के गांव इलाहाबाद देबल इस गांव की गलियों और खेतों में गौरवमई इतिहास की तमाम निशानियां बिखरी पड़ी हैं । आजादी के 70 साल बाद भी विकास की बाट जो रहा यह गांव 10 वीं शताब्दी में राजपूतों की आस्था का प्रमुख केंद्र था जहां करीब 1 किलोमीटर के दायरे में फैला भगवान शिव और माता पार्वती का विशाल मंदिर था राजपूतों माता पार्वती को वनदेवी मानकर उनकी पूजा करते थे । वक्त थपेड़े खाकर गुमनामी के अंधेरे में गुम हुए इलाहाबाद देओल के बारे में सबसे पहले 1829 में अंग्रेज इतिहासकार ने लिखा था इसके बाद 1837 में जेम्स प्रिंसेप में सरेंडर और अट्ठारह सौ में मंदिर के बारे में लिखा अंग्रेजों के समय में इस पर खूब काम हुआ मगर आजादी के बाद प्रदेश और देश की सरकार ने ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण इलाहाबाद की चिंता नहीं की ।

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