छत्तीसगढ़ में ऑटो मोबाइल सेक्टर अपने ही ग्राहकों के लिए लूट सेक्टर बना
August 27th, 2019 | Post by :- | 227 Views
  • छत्तीसगढ़ ऑटो मोबाइल सेक्टर बनी अपने ही ग्राहकों के लिए लूट सेक्टर
  • ग्राहकों से छुपाई जाती है कई अहम जानकारियां
  • फाइनेंस, बीमा व रजिस्ट्रेशन के नाम पर किया जाता है अवैध कमाई

छत्तीसगढ़ (अरुण कुमार पाण्डेय)। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पश्चात यहां लगातार होते विकास व नामी कंपनियों के जाल फैलने के चलते यहां अन्य राज्यों से जीविकोपार्जन हेतु लोगों की भारी संख्या आने लगी।

सभी को अपने ज़रूरत अनुसार आवागमन के लिए स्वयं की दुपहिया या चार पहिया वाहन की आवश्यकता महसूस करने लगे।

और यही दौर था जब छत्तीसगढ़ राज्य में ऑटो मोबाइल सेक्टर में व्यवसाय का ग्राफ़ दिन प्रतिदिन बढ़ने लगा जो आजतक निरंतर जारी है।

वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ राज्य 20 वर्ष का हो चुका है और उसी के साथ ही यहां पनप रहे ऑटो मोबाइल सेक्टर के संचालकों द्वारा जिन ग्राहकों के कारण वे बुलंदी तक पहुंचे हैं उन्ही के साथ ही लूट का खेल निरंतर खेला जा रहा है।

छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित तमाम दुपहिया, तीन व चार पहिया वाहनों के अतिरिक्त कमर्शियल वाहन विक्रेताओं द्वारा अपने ग्राहकों से आरटीओ व रजिस्ट्रेशन, बीमा और फायनेंस के नाम लूट का खेल जाता है।

जानकारी के अभाव व जागरूकता हेतु प्रशासन की लापरवाही के चलते इस सेक्टर को संचालकों द्वारा लगातार अवैध कमाई का तरीका बना लिया गया है।

दुपहिया वाहन के पंजीयन व सड़क कर हेतु वहां के एक्सशोरूम कीमत की मात्र सात प्रतिशत राशी लेने का छत्तीसगढ़ शासन के परिवहन विभाग के तरफ से प्रावधान है, वही निजी चार पहिया वाहनों हेतु आठ से दस प्रतिशत राशी लेने का।

परंतु वाहन विक्रेताओं द्वारा ग्राहकों को जानकारी का अभाव होने के कारण इस तय प्रतिशत से कही अधिक धनराशी वसूल कर लिया जाता है जिसका की कोई पक्का रसीद भी ग्राहकों को नही दिया जाता है।

परिवहन विभाग के अधिकारी/कर्मचारियों को भी वाहन विक्रेताओं के तरफ़ से प्रति बिक्री एक तय मिठाई खर्च मिलते रहने के कारण उनके मुंह में दही जमा हुआ है।

इस हेतु जितनी ग़लती वाहन विक्रेताओं की है उतनी ही वहां कार्य करने वाले कर्मचारियों की भी है जिन्हें उक्त विषयों की जानकरी होने के बावजूद भी अपने इन्सेंटिव्ह के लालच में वे ग्राहकों को भ्रमित करते हैं।

ग्राहकों भी इस संबंध में जागरूक होने जी आवश्यकता है क्योंकि वे अपने मेहनत की गाढ़ी कमाई से अपने निजी उपयोग व व्यवसाय हेतु वाहन खरीदते हैं।

इस संबंध में अबतक छत्तीसगढ़ राज्य शासन, आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो, परिवहन विभाग या छत्तीसगढ़ में व्यवसाय कर रहे नामी कंपनियों द्वारा कभी की कार्यवाही नही किया गया है।

वाहन विक्रेताओं द्वारा अपने ग्राहकों को जबरन अपने कंपनी के साथ अनुबंध हुए बीमा कंपनी से ही अधिक कमीशन के लालच में बीमा भी कर दिया जाता है, जबकी यह ग्राहकों का पूर्ण अधिकार हैकि वे अपने स्वेच्छा से अपनी इच्छानुसार बीमा कंपनी का चयन कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य में व्यवसाय कर रही अधिकतर वाहन विक्रेताओं द्वारा ग्राहकों को तत्काल आरटीओ पंजीयन व इंश्योरेंस की कॉपी भी नही दिया जाता और इसतरह उनके पैसों का एक सप्ताह से पंद्रह दिनों तक रोलिंग कर ग्राहकों के साथ शासन से भी धोखाधड़ी किया जाता है।

इस श्रृंखला के अगले कड़ी की ख़बर के लिए बने रहैैं लोकहित एक्सप्रेस के साथ.

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