कोंडागांव जिले के कोंनगुड़ में ‘मक्का महोत्सव‘ का कलेक्टर ने किया उद्घाटन,मक्के का किया गया नगद आहरण
January 8th, 2020 | Post by :- | 292 Views

छत्तीसगढ़@कोंडागांव -जिले के सबसे सुदूर ग्रामों में से एक कोंनगुड़ में आज जिले के कलेक्टर श्री नीलकंठ टीकाम द्वारा ‘मक्का महोत्सव‘ का शुभारंभ किया। यहां पर कोंनगुड़ के अलावा कन्हारगांव बोकराबेड़ा, कोण्डापखना, बड़गई, बारदा के किसान मक्के की विक्रय के लिए जमा हुए थे। कलेक्टर द्वारा इस महोत्सव में विक्रय के लिए आये किसानों का स्वागत कर उन्हें नगद भुगतान एवं सम्मान चिन्ह प्रदान कर इस महोत्सव का आरंभ किया। कलेक्टर द्वारा किसानों को मक्का उत्पादन के लाभों से अवगत कराते हुए कहा कि मक्का एक नगदी फसल है जो किसानों को दोनों हांथों से लाभ का अर्जन कराएगी। जहां एक ओर किसानों को पूर्व में बिचैलियों द्वारा अधिक मूल्य पर उपार्जन का वादा कर उनसे अधिक नमी बताकर कम दाम में खरीद कर ठगी की जाती थी, वहीं आज किसानों को मक्का के सहकारी प्रोसेसिंग कारखाने के माध्यम से उत्पादित वस्तुओं का सीधे लाभ दिला कर उनमें आत्मसम्मान की भावना जागृत करने का प्रयास जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। जो कल तक दहशत और बिचोलियों के बीच पीस रहे थे आज वो स्वयं मालिक बन कर उभरेंगे। विदित है कि मां दंतेश्वरी मक्का प्रसंस्करण एवं विपणन प्लांट कोंडागांव के कोकोड़ी में निर्माणाधीन है जो आगामी 2 वर्षों में पूर्णतया संचालित होना प्रारम्भ कर देगा परंतु किसानों को बिचैलियों से बचाने के लिए कलेक्टर के निर्देश पर कृषि विभाग एवं नेकाॅफ ने संयुक्त नीति बना कर मक्का उपार्जन को प्लांट की शुरुआत से पूर्व ही किया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके लिए कोंनगुड़़ जैसे अंदरूनी ग्राम का चयन किया गया जो की मक्का के उत्पादन में सम्पन्न माना जाता है। इस अवसर पर बिना रजिस्टर किये  एवं बिना किसी कागजों की आवश्यकता के सीधे किसानों से मक्के का आहरण किया गया। यहां मौके पर ही नमी जांच एवं इलेक्ट्रॉनिक वजन की मशीन द्वारा तुरंत जांच कर नगद किसानों को राशि प्रदान की गई। इस क्रम में आने वाले दिनो में संपूर्ण कोण्डागांव जिले में इसी प्रकार के शिविर लगाकर मक्के की फसल का आहरण किया जायेगा।मक्का उपार्जन की आवश्यकता क्यों ?
मक्का राज्य में कुल 7.5 लाख मीट्रिक टन उत्पादित होता है जिसमे से 1.42 लाख  मीट्रिक टन मक्के का उत्पादन अकेले कोण्डागांव जिले में किया जाता है। मक्के के उत्पादन अधिक मात्रा में होने के पश्चात भी जिले के किसानों को बिचैलियों एवं कोचियों को अपने मक्के को बेचे जाने के कारण उचित लाभ नही प्राप्त हो पाता था। बिचोलियों द्वारा किसानों के फसलों अधिक मूल्य देने का वादा करके अधिक नमी एवं अमानक फसल बता कर उनसे छल किया जाता था, एक बार उपार्जन के पश्चात पैसों का देरी से भुगतान होता था, जिससे अन्नदाता किसान स्वयं को इससे ठगा हुआ पाता था। ऐसी स्थिति में मक्के के उपार्जन नेकाफ द्वारा किये जाने से ग्रामीणों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि किसानों में आत्मसम्मान जागृत कर उन्हें अधिक उत्पादन के लिये प्रेरित किया जा सके। शिविर में एक ही दिन में लगभग 4.50 लाख राशि नगद प्रदान करके 25 टन मक्के का उपार्जन सीधे किसानो से किया गया। इस मौके पर सीईओ जिला पंचायत डी.एन.कश्यप, एसडीएम पवन कुमार प्रेमी, डिप्टी कलेक्टर भरतराम ध्रुव, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जी.एस.सोरी, सहायक संचालक बी.एस.बघेल, सहायक पंजीयक के.एल.उईके, नेकाॅफ की ओर से चरण सिंह नायक, रवि मानव सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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