मुसलमान नागरिक संशोधन बिल पर एकाएक आक्रमक क्यो हो गया ? असल मे इसकी वजह जानने के लिये हमें कुछ सालों पीछे जाना पड़ेगा। 
January 3rd, 2020 | Post by :- | 72 Views

अम्बाला: अशोक शर्मा

देश को ये जानना बहुत जरूरी है कि जो मुसलमान ट्रिपल तलाक पर शांत रहा,धारा 370 पर शांत रहा,राम मंदिर पर शांत रहा वो नागरिक संशोधन बिल पर एकाएक आक्रमक क्यो हो गया ? असल मे इसकी वजह जानने के लिये हमें कुछ सालों पीछे जाना पड़ेगा।
कुछ साल पहले *फ्रांस के राष्ट्रपति ने भारत को चेतावनी जारी करी थी कि आई एस ने भारत मे जिहाद फैलाने की साजिश रची है।*
इसके कुछ समय बाद *रशियन राष्ट्रपति पुतिन ने भी भारत को इस्लामिक जिहाद से सावधान रहने को कहा।*
इसी प्रकार *अमेरिकन इंटेलिजेंस एजंसियों ने भी भारत को सावधान किया था* कि इस्लामिक जिहादी भारत मे सक्रिय होकर कोई बहुत बड़ी कारवाई कर सकते है। *तमाम विश्व की खुफिया एजेंसियों की एक ही रिर्पोट थी कि भारत इस्लामिक जिहादियो के निशाने पर है।
उस समय के *यूनाइटेड नेशन के भूतपूर्व महासचिव मान की मून ने भी भारत को सावधान किया था*,लेकिन उस समय की *काँग्रेस सरकार ने मुस्लिम तुस्टीकरण की वजह से कोई कार्यवाही नही की।* लेकिन जैसे ही मोदी सरकार सत्ता में आयी तो इन लोगो ने इस्लामिक कट्टरपंथियों की साजिश पकड़ ली। Ngo और मानवाधिकार संगठनों की आड़ में इस्लामिक जिहादियो को संरक्षण दिया जा रहा था। भारत मे हिन्दू आबादी को खत्म करने के लिए घुसपैठ और धर्मान्तरण का सहारा लिया जा रहा था। जिसमे कांग्रेस,वामपंथियो के कद्दावर नेता तक शामिल थे। मोदी सरकार ने सबसे पहले इन Ngo और मानवाधिकार संगठनों को प्रतिबंधित किया और नोटबन्दी के माध्यम से इनको दिवालिया कर दिया। अब जैसे ही CAB पारित हुआ, वैसे ही इनके जहरीले मनसूबे ध्वस्त हो गए, ये लोग तिलमिला गए। अपनी पोल खुलने पर ये लोग आज बुरी तरह से तिलमिला गए है और हिंसा पर उतारू हो कर CAB का विरोध कर रहे है। इनके मनसूबे को देशहित और अपनी आनेवाली पीढ़ी के लिए जानना और समझना बहुत जरूरी है l
“क्या हैं इसके दूरगामी परिणाम”
–  सीएए के माध्यम से सरकार ने *पाकिस्तान और बांग्लादेश* की कमजोर नस पर ऐसा प्रहार किया है जिससे ये तिलमिला तो गए हैं , लेकिन अपना दर्द नहीं बयां कर पा रहे हैं। सरकार ने ये बिल लाकर बिना इनका नाम लिए बिना पूरी दुनिया को बता दिया , कि *इन देशों में अल्पसंख्यकों का उत्पीडऩ हो रहा है।*
–  बिल पास होते ही बांग्लादेश को दुनिया के सामने अपनी इज्जत बचाने के लिए कहना पड़ा ,कि वह अपने सभी नागरिकों को वापस लेने के लिए तैयार है। उसने स्वीकार भी किया कि उसके यहां अल्पसंख्यकों का उत्पीडऩ हुआ है।
–  कश्मीर में उत्पीडऩ का आरोप लगाने वाले पाकिस्तान ने ऊल-जुलूल बयान दिया लेकिन यूएन की रिपोर्ट ने उसकी पोल खोल दी।
– इस बिल के आने से *पाकिस्तान और बांग्लादेश में जो अल्पसंख्यकों का उत्पीडऩ हो रहा था वह अब एक दस्तावेजी रिकॉर्ड बन गया है,* जुबानी जमा खर्च नहीं है। भारत में जितने लोगों को यहां नागरिकता दी जाएगी ये दोनों देश उतने ही एक्सपोज होंगे।
– *इस बिल के पास होने के बाद ही बांग्लादेश ने रोहिंग्याओं को वापस लेने के लिए म्यांमार पर दबाव बना शुरू कर दिया है।*
– इस बिल के आने के बाद भारत में रह रहे तमाम अल्पसंख्यक पीडि़त खुलकर बता सकेंगे कि वे किस देश से आए हैं, इससे इन देशों की और पोल खुलेगी। इसके चलते इनको अपने यहां उन कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा, जिनका उपयोग ये दोनों देश  भारत को ब्लैकमेल करने के लिए करते हैं।
विपक्ष ने क्या छिपाया अपना दर्द
– *विपक्ष को पता है कि इसका भारत के नागरिकों पर असर नहीं पडऩे वाला लेकिन 370, राम मंदिर, तीन तलाक पर प्रतिरोध न होना, सबकुछ शांति से निपट जाने पर विपक्ष काफी चकित था, उसे इस तरह का निष्कंटक राज पसंद नहीं आ रहा था।*
– इसलिए उसने एनआरसी का डर दिखाकर लोगों को भड़काया, लेकिन देश में इतनी हिंसा हो गई इससे विपक्ष का ये पांसा भी उल्टा ही पड़ता दिखाई दे रहा है।
– अमित शाह का ये कहना कि रोहिंग्या को हम रहने नहीं देंगे, एनआरसी तो हम लेकर ही आएंगे। भारत में पिछले 70 साल में इतनी स्पष्टता से संसद में किसी नेता ने भाषण नहीं दिया था। इस भाषण से देश के बहुत से स्वयंभू लोगों ने खुद को बहुत अपमानित महसूस किया, उनकी अकड़ को ठेस पहुंची।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे editorlokhit@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।