राजधानी से ग़ायब हुआ तिरंगा, पर्यटकों के मन में घटा राज्य का मान!
December 31st, 2019 | Post by :- | 158 Views

छत्तीसगढ़़ (रायपुर) अरुण पाण्डेय् । छत्तीसगढ़़ की राजधानी में करोड़ो ख़र्च करके स्थानीय तेलीबांधा तालाब का सौंदर्यीकरण करके संरक्षित किया गया। आज राजधानी का तेलीबांधा इतना अधिक प्रसिद्ध हैकि इसे रायपुर का मरीन ड्राइव भी कहा जाता है। यहां काफ़ी लागत व मसक्कत के बाद बनाये गए बसे ऊंचे खम्भे पर कुछ समय पहले तक राष्ट्रीय ध्वज़ फ़हराया जाता था, जोकि अब कई महीनों से नही फहराया जा रहा है। तेलीबांधा सड़क से गुज़रने वाले स्थानीय राहगीरों और राजधानी आयरे पर्यटकों सहित अन्य लोगों को यह तिरंगा बहुत ही आकर्षित करता था। वर्तमान में राजधानी में पूरे देश सहित विदेश से भी लोग यहां आयोजित किये जा रहे ‘राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव 2019’ में शामिल होने आए हुए पहुंचे थे, जो तेलीबांधा तालाब पर एक बहुत बड़ा खंबा देखते हैं शायद जन्हें समझ भी नही आता होगा कि तालाब किनारे इतना ऊंचा खंभा क्यों लगाया गया है।

पूरे भारत एवं अन्य देशों के आदिवासी नर्तक दल तीन दिन तक छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अपनी प्रस्तुति देने पहुंचे थे, इस दौरान वे राजधानी एवं आसपास के क्षेत्रों का भ्रमण करने भी आते जाते थे, रायपुर दर्शन के दौरान जब उन्हें पता चला होगा कि यहां के तेलीबांधा तालाब के किनारे बने 82 मीटर की उचांई पर तिरंगा (राष्ट्रीय ध्वज़) फहराने के लिए विशाल खंबा लगाया गया है, तो वे अपनी जिज्ञासा को शांत करने और भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ को सम्मान देने यहां पहुंचते तो थे पर वर्तमान में इस विशाल खंबे पर राष्ट्रीय ध्वज़ न देखकर उनके मन में कौतूहल उत्पन्न होना लाज़मी है। जरा सोचिए तारीफ़ सुनकर जिस राष्ट्रीय ध्वज़ को देखने वे यहां तक आ रहे थे जब ना देखें होंगे तब उनके मन में कैसे – कैसे विचार आये होंगे।

क्या मेहमानों के मन में हमारे राज्य छत्तीसगढ़ के बारे में यह विचार तो न्हांही बना हो गया कि यहां राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान ही नहीं किया जाता! 3 दिन चलने वाले राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ देश की प्रमुख हस्तियां शामिल रही हैं। फ़िर भी स्थानीय शासन – प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों सहित जनप्रतिनिधियों ने इस विशाल खंभे पर देश की आन, बान और शान के प्रतीक राष्ट्रीय ध्वज को फहराने की जहमत तक नहीं उठाई। 

विशेष उल्लेखनीय है कि देश के उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू भी राजधानी में ही रहें, तब भी अगर राष्ट्रीय ध्वज को नहीं फहराया गया तो इस विशाल खंबे का क्या औचित्य? पूरे देश सहित विदेशों के नर्तक दलों के सामने राजधानी रायपुर के नागरिक परिहास का कारण बने, तो मेहमानों के सामने छत्तीसगढ़ सहित रायपुर की साख को लगा बट्टा

देशभक्ति – राष्ट्रप्रेम के नारे थोथे साबित करने में प्रदेश सहित राजधानी के अधिकारियों ने कोई कसर नहीं छोड़ा, करोड़ों की लागत के इस खंभे पर पिछले लगभग 2 माह से एक बार भी तिरंगे को नहीं फहराया गया है और बिना तिरंगे के इस खंभे पर देखरेख के नाम पर लाखों रुपए प्रतिमाह बेवजह खर्च किया जा रहा है।

रायपुर नगर निगम के महापौर रहे प्रमोद दुबे सहित नगर निगम आयुक्त की जिम्मेदारी थी कि नगर निगम क्षेत्र में पूरे भारत के नर्तक दल एवं उनके प्रतिनिधि आए हुए हैं तो कम से कम उनके लिए ही सही राष्ट्रीय ध्वज को तो फ़हरा देना चाहिए था।

किस बात का पैसा ले रहा है ठेकेदार और किस बात की मॉनिटरिंग कर रहे हैं जवाबदार अधिकारी ?

क्यों बिना झंडा फहराए ही ठेकेदार को भुगतान किया जा रहा है? पिछले दो माह से ना तो आंधी आई है ना तो तेज बरसात हुई है और ना ही कोई ऐसी प्राकृतिक आपदा आई है कि झंडे को ना फहराया जाए, अब ऐसे में राज्य सरकार क्या कोई कदम उठाते जिम्मेदारों पर कार्यवाही करते दिखेगी ? क्या ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा यह देखने वाली बात है ?

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