राजधर्म का पालन करें मोदी सरकार – रामपाल जाट
December 28th, 2019 | Post by :- | 88 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । आम आदमी पार्टी ने केन्द्र सरकार पर भेदभाव और धर्म के आधार पर पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि ‘सीएए और एनआरसी देश के अनावश्यक है। देश के सामने इनसे भी बडे एवं गंभीर मुद्दे है जिनका हल निकालना अभी बाकी है। उन मुद्दों को छोड़ केन्द्र सरकार मुद्दों से ध्यान भटकाने का काम कर रही है। आज देश पर बेरोजगारी,शिक्षा,व्यवसाय,स्वास्थ्य,सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे है इन पर केन्द्र सराकर को काम करना चाहिए।
काग्रेस के सीएए और एनआरसी एक्ट के खिलाफ बुलाये गये शांति मार्च को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि ‘नरेन्द्र मोदी सरकार राजधर्म का पालन करें और इन दोनों एक्ट को वापस लेवें। अर्ल्बट हॉल से गांधी सर्किल तक आयोजित शांति मार्च में रामपाल जाट के अलावा प्रदेश सचिव देवेन्द्र शास्त्री,प्रदेश प्रवक्ता दीपक मिश्रा,प्रदेश मिडिया प्रभारी अभिषेक जैन बिट्टु,जयपुर शहर अध्यक्ष अमित शर्मा लियो,शंहर उपाध्यक्ष जितेन्द्र हटवाल,मुबारक अली,अशोक गर्ग,यूथ विंग प्रवक्ता केशव अग्रवाल,महिला विंग प्रभारी निलम क्रांति आदि के नेत्तृव में 200 से अधिक कार्यकर्ताओं ने मार्च में भाग लिया। मार्च के दौरान आयोजित सभा के दौरान शहरवासियों को संबोधन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि ‘जब किसी भी शासन करने वाले की बुद्धि पक्षपाती हो जाती है’तब विवेक साथ छोड़ देता है वह भाषा -व्यवहार में झलकने लगता है। यही स्थिति मोदी सरकार की है,जो वोट बैंक बनाने के लिए पक्षपाती बन गई है।
इसी तरह की स्थिति गुजरात में उत्पन्न हुई तब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने व्यक्त किया था कि “गुजरात की सरकार ने राजधर्म का पालन नहीं किया
वही स्थिति अभी बनी हुई है” अभी देश के गृहमंत्री की भाषा देश में भेदभाव के आधार पर भड़काने वाली बन गई है। केंद्र सरकार की पक्षपाती मानसिकता के कारण आधा- अधुरा कानून भी जल्दबाजी में अपना वोट बैंक बनाने के लिए लाया गया है। असम में राष्ट्रीय रजिस्टर के कारण लगभग 19 लाख जन नागरिकता से बाहर हो गए। उनमें से लगभग 14 लाख हिंदू हैं। अभी जो नागरिकता के लिए कानून लाया गया है,वह भी उन्हें नागरिकता प्रदान नहीं कर सकता क्योंकि इसमें उन्हीं को नागरिकता देने का प्रावधान है,जिनको धार्मिक उत्पीड़न के कारण अफगानिस्तान,पाकिस्तान तथा बांग्लादेश से भारत में शरण लेनी पड़ी थी। यह 14 लाख तो वे हैं जो पचासों वर्षो पूर्व जीविकोपार्जन के लिए देश के विभिन्न भागों से असम में जाकर बस गए। आधार कार्ड तथा वोटर कार्ड नागरिकता का आधार नहीं है। उनके पास असम या जिन प्रदेशों से वे असम में गए हैं,वहां पर उनके पास कोई प्रमाण नहीं है,जिसके आधार पर नागरिकता प्राप्त हो सके। सबसे अधिक संकट में गरीब मजदूर-वर्ग पीड़ित रहेगा। जिनको प्रमाण रखने का का अभ्यास ही नहीं है। दूसरी ओर शासन के पक्षपातपूर्ण व्यवहार के कारण द्वेष,वैमनस्यता उत्पन्न होगी। उससे अराजकता-अशांति की संभावना बनेगी। लोकतंत्र में विरोध करने के लिए हिंसा का कोई स्थान नहीं है। विरोध करने का लोकतंत्र में अधिकार है,किंतु यह शांति-अहिंसा- सत्याग्रह के आधार पर होना चाहिए। हिंसा फैलाने वाले भी पक्षपाती शासकों से अधिक दोषी हैं। इसलिए प्रधानमंत्री सहित सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को मिलकर शांति मार्च के साथ अपील करनी चाहिए की यह देश में शांति-सद्भाव के लिए अपरिहार्य है। इसी क्रम में नारा दिया गया कि “वे जाति धर्म से तोड़ेंगे हम मूंग उड़द से जोड़ेंगे” फिर सभा उपस्थित जनता का मत लिया गया कि बोलो आप तोड़ने वालों के साथ रहोगे या जोड़ने वालों के साथ तो उपस्थित जनों की प्रतिउत्तर में जोरदार आवाज आई कि“जोड़ने वालों के साथ”।

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