जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर , स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
December 27th, 2019 | Post by :- | 84 Views
नूंह मेवात , ( लियाकत अली )  ।   राजकीय शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कालेज नल्हड में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर बेहद परेशान हैं। परेशानी की वजह है समान वेतन पिछले दो सालों से नहीं मिलना। गुस्साए डॉक्टर अब इसी मांग को लेकर शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए और कामकाज पूरी तरह ठप रखा । जूनियर डॉक्टर की हड़ताल की खबर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से लेकर मेडिकल कालेज प्रशासन के पास पहुंची तो हड़ताली डॉक्टर को धारा 144 लगी होने के चलते हड़ताल वापस लेने की बात कही। बीजेपी पुन्हाना उम्मीदवार रही नौक्षम चौधरी भी पहुंची। भाजपा नेत्री ने जूनियर डॉक्टर को भरोसा दिलाया कि उनको भी सूबे के दूसरे मेडिकल कालेज की तर्ज पर वेतन दिलवाया जायेगा। हम इसको एग्जामिन करवा रहे हैं। शुक्रवार को हड़ताली जूनियर डॉक्टरों ने निदेशक डॉक्टर यामिनी से मुलाकात की। धारा 144 लगी होने तथा भाजपा नेत्री एवं निदेशक के भरोसे के बाद शनिवार से हड़ताल समाप्त होने की बात सामने आ रही है।
जानकारी के मुताबिक नल्हड कालेज में पिछले दो साल से जूनियर डॉक्टर को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक वेतन नहीं मिल रहा है। जिसके लिए उन्होंने निदेशक डॉक्टर यामिनी से लेकर कई अन्य अधिकारियों से बात की , लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें 45 हजार बेसिक वेतन के अलावा 15 हजार रुपये मेवात भत्ता मिलता है। कुल मिलाकर करीब 60 हजार रुपये मासिक वेतन जूनियर डॉक्टर को मिल पा रहा है। नल्हड मेडिकल कालेज में कार्यरत जूनियर डॉक्टर कहते हैं कि सूबे के खानपुर , कल्पना चावला इत्यादि मेडिकल कालेज में सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू होने के बाद पिछले करीब दो वर्षों से 90 हजार रुपये के करीब वेतन मिलता है। नल्हड जैसे ग्रामीण क्षेत्र में बिहार , झारखंड , मध्यप्रदेश सहित देश के दूरदराज राज्यों से डॉक्टर यहां नौकरी करने आते हैं , लेकिन वेतन कम होने के कारण पिछले 6 माह में करीब 60 से अधिक डॉक्टर यहां से छोड़कर जा चुके हैं। अब महज 36 जूनियर डॉक्टर के भरोसे नल्हड मेडिकल कालेज चल रहा है , जबकि 95 जूनियर डॉक्टर के पद यहां स्वीकृत हैं। वेतन विसंगतियों के चलते ही डॉक्टर इस संस्थान को अलविदा कह रहे हैं। ये हाल गब्बर के नाम से मशहूर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के महकमे के हैं। जूनियर डॉक्टरों को अब महज स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से ही उम्मीद बची है। जूनियर डॉक्टर अगर तय कार्यक्रम के मुताबिक आज से हड़ताल पर चले जाते हैं , तो स्वास्थ्य सेवाओं का इस पर बुरा असर पड़ने से इंकार नहीं किया जा सकता। जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर भी अब अपनी जिद पर अड़े हुए हैं , उन्होंने निदेशक डॉक्टर यामिनी से मुलाकात में दो टूक कह दिया कि अब बिना लिखित आश्वासन वे काम नहीं करेंगे। नल्हड मेडिकल कालेज में डॉक्टर की कमी पहले ही बहुत अधिक है , अगर जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल की चेतावनी को मेडिकल एजुकेशन विभाग ने गंभीरता से नहीं लिया तो स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा सकती हैं। निदेशक डॉक्टर यामिनी की कोशिश है कि किसी भी तरह जूनियर डॉक्टर की अनिश्चितकालीन हड़ताल को रोका जाये , इसलिए उन्होंने चंडीगढ़ में बैठे अधिकारियों से बातचीत की है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि सातवें वेतन के हिसाब से जूनियर डॉक्टर को वेतन नहीं मिल रहा है। सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर इत्यादि का केस एक साथ विभाग को भेजा गया था , उनको अनुमति मिल गई , लेकिन जूनियर डॉक्टर का मामला हल नहीं हुआ। अब इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा , उनकी कोशिश रहेगी की शुक्रवार से शुरू होने वाली जूनियर डॉक्टर की हड़ताल को समाप्त कराया जाये। अब देखना है कि शुक्रवार से हड़ताल शुरू होगी या फिर नाराज डॉक्टर को मना लिया जायेगा।

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