एनआरसी – कैब बिल का किस तरह नेताओं ने किया विरोध
December 21st, 2019 | Post by :- | 153 Views

नूंह मेवात , ( लियाकत अली )  ।  पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर जदयू ने गांधी ग्राम घासेड़ा में भीड़ को संबोधित करने उपरांत पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 19 दिसंबर को नूह जिले के ही नहीं बल्कि दिल्ली के लोग जंतर – मंतर , लालकिला पर लोग जुटेंगे। जब तक बिल वापस नहीं होंगे , तब तक प्रदर्शन चलेंगे। सभी धर्मों के लोग प्रदर्शन में शामिल होंगे। देखेंगे तुम्हारे गोला , बंदूक में ताकत है। पूरे देश को कश्मीर बनाना चाहते हैं। कश्मीर भी और भारत भी आजाद होगा। भारत के संविधान के मुताबिक देश चलेगा। ये मनु स्मृति , संघियों के संविधान से देश नहीं चलेगा।  जामिया में जैसी बर्बरता की है , दुनिया के इतिहास में ऐसी बर्बरता नहीं हुई। लाइब्रेरी में खून से लथपथ किया , लड़कियों को भी नहीं छोड़ा। लड़कियों ने लड़कों की जान बचाई है। उन लड़कियों के परिजनों ने अपनी बेटियों का हौंसला बढ़ाया है। भाजपा के केंद्र में रहे मंत्री , विधायक बलात्कार कर रहे हैं। मीडिया के लोग भी संविधान , प्रजातंत्र को बचाने के लिए के लिए।  जनता और विपक्ष की आवाज उठानी चाहिए। मैंने आवाज उठाई थी , तो जेल गया , तब कहीं एमपी बना। 1967 में आंदोलन हुआ। विश्विद्यालय के नौजवान , लड़का – लड़की लड़ रही हैं। सबका मुल्क है , सबको अपनी बात रखने का हक़ है। हिन्दू , मुसलमान , सिख , ईसाई ,  बंगाली उनको आप देशद्रोही कहियेगा।  ये नहीं चलेगा। हम सब मिलकर मुल्क को बचाएंगे। बदकिस्मती , भूल से जो लोग सत्ता तक पहुंच गए उन्हें घमंड में नहीं रहना चाहिए। गांधी के हत्यारों को गुमान में नहीं रहना चाहिए। जनता की ताकत सबसे बड़ी ताकत है। ये राजनैतिक बीमारी है। एनआरसी – नोटबंदी सबका इलाज है। अमन – चैन बनाये रखिये , इनको हम लोग ठिकाने लगा देंगे। अली अनवर ने कहा कि इसी महीने में इन्हीं दिनों में राष्ट्रपिता घासेड़ा गांव आये थे , उस समय भी मुल्क में कुछ इस तरह के हालात थे। लोगों से हिंदुस्तान में रुके रहने के लिए कहा और बराबरी का हक देने की बात कही। जो लोग पाकिस्तान निकल गए , वे भी वापस आ गए। गांधी से कहने आये हैं कि हम शर्मिंदा हैं , तेरे कातिल जिंदा हैं। जैसे मुल्क बराबर का है , वैसे सबकी लड़ाई है। किसान आत्महत्या कर रहा है , बेरोजगारी चरम सीमा पर है , इस तरह के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ये बिल लेकर आये। धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। मॉब लिंचिंग , जीएसटी जैसे मामले लेकर आये , असम में एनआरसी लेकर आये , जो फैल हो गया। गरीब – मजदूर , कम  पढ़े लिखे लोगों को सीएबी , एनआरसी का नुकसान होगा। विधायक आफ़ताब अहमद ने कहा कि संविधान के खिलाफ छेड़छाड़ , एनआरसी , कैब के अलावा जामिया में छात्रों पर लाठीचार्ज  लाखों लोग निकले हैं।  काला कानून वापस हो , ऐसे लोगों को सत्ता में रहने का कोई अधिकारी नहीं है। इसी तरीके से मांग को उठाते रहेंगे। जो भी कुर्बानी देनी पड़ेगी तो वे पीछे नहीं हटेंगे। काला कानून जब तक वापस नहीं होगा , तो इसी तरह विरोध जारी रहेगा। मेवात विकास सभा के अध्यक्ष एवं विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करने वाले सलामुद्दीन नौटकी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम अगले सप्ताह भी देखने को मिल सकता है। संविधान को बिगाड़ने वाले लोगों के खिलाफ उस समय तक संघर्ष जारी रहेगा , तब तक कामयाबी नहीं मिलती। गम और गुस्सा दिखाने के लिए लोग उमड़े हैं। जब जामिया के छात्रों ने आवाज उठाई तो उन पर बर्बरता की गई। मेवाती समाज सड़कों पर आया है। सरकार इस इलाके के लोगों का इतिहास मालूम नहीं ही , जब  बलवन और बाबर के सामने नहीं झुके तो इनकी तो औकात ही क्या है।

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