शत्रु पर विजय पाने के बाद दिग्विजय बनने की ओर कदम बढ़ाने की नीति ही कृष्ण नीति है : निवेदिता भिड़े
December 16th, 2019 | Post by :- | 114 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की जयपुर शाखा द्वारा आयोजित व्याख्यान “कृष्णा द स्ट्रेटिजिस्ट” में पदम् श्री से सम्मानित आध्यात्मिक चिंतक डॉ निवेदिता भिड़े ने कृष्ण के नीतिशास्त्र पर व्याख्यान के दौरान कहा की शत्रु को हराने के बाद जब शत्रु हार के शोक से निकलने वाला हो उससे पहले ही विजेता को अगले कदम के साथ खुद को दिग्विजय बनाना होता है ना कि विजय का जश्न मनाकर अपनी शक्तियों का ह्रास करना होता है यही कृष्ण की नीति है, जो विजय के पश्चात भी संयमित है शान्त है वही दिग्विजय है। भिड़े ने अपने व्याख्यान में कृष्ण की लीलाओं बाल कांड और माखन चोर वाली कहानियों और के इतर उनकी सबसे महत्वपूर्ण और अनछुई मुख्य विशेषता पर प्रकाश डाला जो विशेषता उन्हें नीतिशास्त्र के विद्वान और रणनीतिज्ञ के तौर पर भगवान श्री कृष्ण की छवि को समाज के पटल पर लाती हैं। भिड़े ने कहा कि हम जब विजय होने के बाद विजय के प्रयोजन को पूरा नहीं करते हैं तो ऐसी विजय औचित्य विहीन होती है। कृष्ण के युग में उनके साथ सबसे बड़ी चुनौती थी कि सहयोगी परफेक्ट इंस्ट्रूमेंट नहीं थे।जैसा भगवान राम के युग में था राम के उनके तमाम सहयोगी उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के बहुत समीप थे सभी सुलझे हुए थे परंतु कृष्ण के समय ऐसा नहीं उनके लिए अपने सहयोगियों को संभालना चुनौती भरा था और जब आप महाभारत का युद्ध जीत कर एक विशाल सत्ता को संभालने को संभालते हैं। कृष्ण का व्यक्तित सादगी से भरपूर था जिस श्री कृष्ण को हम मन्दिरों में पूजते हैं वो कृष्ण राजशूय यज्ञ में पत्तल उठाने का कार्य कर रहे थे। डॉ भिड़े ने देश के वर्तमान राजनीतिक हालातों के चिंतन के तौर पर कहा “देश के हित में होने वाले निर्णयों के बारे में सोशल मीडिया के जरिए जागरूकता फैलाना युवाओं का कर्तव्य है। इस संबंध में देश की विध्वंसक ताकतों को पूरी ताकत से जबाव देने की जरूरत है। नागरिक संशोधन अधिनियम की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस अधिनियम की सकारात्मकता के प्रचार से पहले कुछ असामाजिक लोगों ने इसका दुष्प्रचार शुरू कर दिया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल कलराज मिश्र ने मुख्य वक्ता की कृष्ण के नीतिकार चरित्र को बहुत सुंदरता से वर्णित करने के लिए प्रसंशा की,साथ ही कहा कि श्री कृष्ण के जन्म से पूर्व ही उनपर विपत्तियां थी और दुर्भाग्य ऐसा की जब जन्म हुआ तो माँ बाप जेल में और उसी जेल में उन्होंने जन्म लिया। जब कृष्ण का हम स्मरण करते हैं तो मन आनंदित हो जाता है एक मोहक छवि हमें सामने दिखती है जबकि उनका वास्तविक जीवन कठिनाइयों और चुनौतियों से भरा था लेकिन वे एक सकारात्मक ऊर्जा से भरे योगी थे और उनकी यही ऊर्जा हमें उनके स्मरण भर से आनंद से भर देती है । मंच पर विवेकानंद केंद के प्रांत संचालक भवानी लाल जी माथुर प्रान्त प्रमुख भगवान सिंह जी और विभाग संचालक सीताराम शेठी जी भी उपस्थित रहे। कैलाश चन्द्र गुप्ता ने विवेकानंद केंद्र के परिचय में केंद्र द्वारा संचालित विभिन्न प्रकल्पों के बारे में बताया साथ ही बताया कि कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद शिला स्मारक के निर्माण के स्वर्णिम 50 वर्ष पूरे होने पर संपर्क महाभियान के तौर पर केंद्र के कार्यों को जन जन तक पहुंचाने का कार्य हो रहा है। समारोह के समापन पर संपर्क प्रमुख महेश मोदी ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों और आगन्तुकों का आभार व्यक्त किया ।

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