फिल्म “पानीपत“ के विवाद को तुल देकर राज्य सरकार खुद कानून व्यवस्था बिगाड़ने पर क्यों है उतारू
December 10th, 2019 | Post by :- | 42 Views

जयपुर,(सुरेन्द्र कुमार सोनी) । फ़िल्म पानीपत को लेकर हो रहे बवाल के बीच आम आदमी पार्टी की यूथ इकाई के प्रदेश संगठन सचिव अभिषेक जैन बिट्टू ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है की “फिल्म पानीपत जब देश और समाज की भावनाओ के खिलाफ है तो क्यों इस फिल्म पर बेन नही लगाया जा रहा है, आख़िरकार राज्य सरकार किस बड़ी घटना का इंतजार कर रही है, क्या राज्य सरकार खुद “पानीपत“ फिल्म के विवाद को हवा देकर राजनितिक लाभ लेने पर उतारू है, क्या राज्य की कांग्रेस सरकार जनता के साथी खिलवाड़ कर कानून व्यवस्था बिगाड़ने पर भी उतारू है, ऐसे सवाल होना लाजमी है क्योकि फिल्म को लेकर चल रहे विवाद को देखे तो सत्ता पक्ष,विपक्ष, समाज और जनता सब फिल्म के प्रदर्शन को लेकर नाखुश है और लगातार फिल्म को बेन करने की मांग कर रहे है ऐसे में राज्य सरकार किस घटना का इंतजार कर रहे है सोमवार को राज्य के सिनेमा घरों में तोड़–फोड़ हो गई इसकी जवाबदेही किसकी है फिल्म व्यापारियों का इसमें क्या कसूर जो उनके सिनेमा घर तोड़े जा रहे है, गलती फ़िल्मकार की सज़ा किसी और को क्यों? आप यूथ विंग प्रदेश संगठन सचिव अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा की फिल्मो को लेकर कोई नया विवाद नही हो रहा है। इतिहास पर फिल्म बनाने और फिल्म की टीआरपी बढाने के चलते फ़िल्मकार इतिहास के तथ्यों से छेड़छाड़ कर देश और समाज की भावनाओ के साथ खिलवाड़ करते है जिस पर सख्त कानून बनना चाहिए। ना फिल्मकारों को समाज की भावनाओ की कदर है और ना ही सरकार की जनता की भावनाओ की कदर है दोनों ही अपनी अपनी सुर्खियाँ बटोरने के चलते विवादों को जन्म देते है। इसमें जनता का क्या दोष जिसे दुसरो की सज़ा को भुगतना पड़ता है।
अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा की “आखिरकार सेंसर बोर्ड किस आधार पर फिल्मों को परमिशन देता है की वह देश की भावनाओ के साथ खुलकर खिलवाड़ करें। इतिहास पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन होना चाहिये लेकिन उन फिल्मों में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर नही दिखाना चाहिए। यह देश और समाज की भावनाओ के खिलाफ है। केंद्रीय सेंसर बोर्ड की जिम्मेदारी बनती है जब भी इतिहास पर फ़िल्म बने तो उनके तथ्यों की जानकारी और समाज के लोगो से राय लेकर फ़िल्म के प्रदर्शन को रिलीज करने का ऑर्डर देंवे और फिल्म बनने से पहले उसकी स्टोरी का अध्ययन कर लेंवे जिस से किसी भी विवाद से बचा जा सके। इसे विवादों से देश के नोजवानों का जीवन भी प्रभावित होता है कम से कम सरकार और सेंसर बोर्ड को देश के नोजवानों के भविष्य की और देखकर फिल्मों को परमिशन देनी चाहिए।
*जब सरकार,विपक्ष,समाज और जनता फ़िल्म के खिलाफ तो अब तक बैन क्यो नही:
अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि फ़िल्म पानीपत को लेकर राज्य सरकार के मंत्री,कांग्रेस,भाजपा,आम आदमी पार्टी, समाज और जनता सब खिलाफ है तो फ़िल्म को अब तक बैन क्यो नही किया जा रहा है। क्या सरकार जबर्दस्ती इस फिल्मी मामले को तूल देकर प्रदेश और देश का माहौल बिगाड़ने पर उतारू है। मुख्यमंत्री को राज्य के जनता की भावनाओ का सम्मान करते हुए फ़िल्म के प्रदर्शन पर पूरी तरह से रोक लगा देनी चाहिए।

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