सांस्कृतिक समारोह के दौरान समूह नृत्य के माध्यम से वन्य क्षेत्र की संस्कृति व सभ्यता को अनूठे रूप में प्रस्तुत
December 6th, 2019 | Post by :- | 156 Views
कुरुक्षेत्र, ( सुरेश पाल सिंहमार )    ।   उत्तराखंड के लोक कलाकारों ने सांस्कृतिक समारोह के दौरान समूह नृत्य के माध्यम से वन्य क्षेत्र की संस्कृति व सभ्यता को अनूठे रूप में प्रस्तुत किया। उत्तराखंड के वन्य क्षेत्रवासी आज भी पांडव कालीन संस्कृति को जी रहे हैं। कहा जाता है कि  यहां का वन्य क्षेत्र विशेष रूप पांडवकाल में लाक्षागृह था जिसे अब लखमंडल के रूप में जाना जाता है।
पुरुषोत्तमपुरा बाग में स्थापित उत्तराखंड पैवेलियन में शुक्रवार की सुबह उत्तराखंड की लोक संस्कृति से सराबोर हो उठी। भगत सिंह राणा के स्पर्श कला मंच के बैनर तले धनराज वर्मा के निर्देशन में 15 महिला-पुरुष कलाकारों ने बेहतरीन लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दी। सभी लोक नृत्यों का अपना पारंपरिक महत्व है। लोक कलाकार वर्मा ने बताया कि आज की प्रस्तुतियां वन्य क्षेत्र की अतुल्य संस्कृति को समर्पित रही।
इसके अलावा उत्तराखंड के पारंगत कलाकारों ने हारूल नृत्य की बेहतरीन प्रस्तुति दी। हारूल नृत्य का सीधा संबंध पीरगाथा से है, जिसकी प्रस्तुति में विलक्षण कार्य करने वालों का महिमा गान किया जाता है। अति मधुर नाटि समूह नृत्य ने दर्शकों को बांधे रखा। नाटि नृत्य प्रेम प्रसंगों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
लोक कलाकारों नेे जैंता नृत्य की भी दमदार प्रस्तुति से दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। जैंता नृत्य खासतौर पर उत्तराखंड की महिलाएं ही करती हैं। इस नृत्य के माध्यम से अपनी खुशी का इजहार किया जाता है। किसी भी मंगलमय अवसर तथा उत्सवों के मौके पर जैंती नृत्य किया जाता है। इसके बाद जोश व शौर्य से ओतप्रोत रासो नृत्य की जोशिली प्रस्तुति दी गई। रासो नृत्य महिला-पुरुष मिलकर करते हैं, जो युद्घ की तैयारी के रूप में किया जाता है। दुश्मन से लडऩे के लिए तलवार, ढ़ाल, भाला आदि हथियारों को लेकर इसकी प्रस्तुति दी जाती है।
युवतियों ने अपने पसंदीदा गीतों पर जमाया रंग
उत्तराखंड पैवेलियन में सांस्कृतिक मंच पर मेला घूमने आई युवतियां भी जमकर थिरकती नजर आई। अपने पसंदीदा गीतों पर युवतियों ने जमकर डांस किया। या गजबण पाणी नै चाली हरियाणवी गीत पर जब तीन युवतियां ने डांस किया तो दर्शकों ने तालियों की गडगड़़ाहट से उनका साथ दिया। नन्हीं बालिका ने भी मौके का फायदा उठाते हुए अपनी नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
प्रकाश मलिक ने मचाई हरियाणवी धूम
दूसरी ओर हरियाणवी पैवेलियन में लोक कलाकार प्रकाश मलिक धूम मचाते नजर आये। प्रकाश मलिक ने अपने साथी कलाकारों के साथ हरियाणवी गीतों पर दमदार प्रस्तुतियां दी। जब यार नचावै क्यूं ना नाचूं बणकै पागल गली-गली गीत पर उन्होंने मधुरता के साथ नृत्य किया। छोटी सी बणड़ी फेरया पै झगड़ी, तम क्यूं ना ल्याये सोने की तगड़ी गीत पर दमदार हरियाणवी नृत्य किया। इनके साथ अन्य कलाकारों ने धमाल की बेहरीन प्रस्तुति दी। बीन-ढफली समूह ने अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ संगीत के सुर छेड़े। इस दौरान मंच की कमान प्रवीण कादयान ने संभाली।

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