हकार और प्यार एक-दूसरे के शत्रु : स्वामी ज्ञानानंद
December 6th, 2019 | Post by :- | 126 Views
कुरुक्षेत्र, ( सुरेश पाल सिंहमार )    ।   गीता ज्ञान संस्थानम में अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर कृष्ण कृपा पर जिओ परिवार द्वारा आयोजित सत्संग के तीसरे दिन व्यास पीठ से बोलते हुए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि अंहकार और प्यार एक-दूसरे के शत्रु है और दोनों कभी इक्टठे नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बासंूरी खोखली होकर कन्हैया की ध्वनि बन जाती है, इसी प्रकार अपने-आपको खाली करके ही भगवत प्राप्ति हो सकती है। वृंदावन में बांसुरी की तान और कुरुक्षेत्र में गीता का ज्ञान दोनों एक-दूसरे के सामंजस्य है और यह सब भगवान की ही लीला है। उन्होंने कहा कि गीता एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है। गीता में मानव की हर समस्या का समाधान है।
गीता मनीषी ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज चिकित्सा, मनौविज्ञान, न्याय सहित सभी क्षेत्रों में गीता के लिए सक कुछ है, देश और विदेश के चिकित्सक यह मान चुके है कि गीता से तनाव दूर होता है और तनाव दूर होने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है, उन्होंने कहा कि भगवत गीता जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं अपने मुख से गाया, आज पूरे विश्व में पूजनीय है, विदेशों में गीता पर शोध किए जा रहे है। गीता अशांति में शांति पैदा करती है, देश के अनेक स्वतंत्रता सैनानी गीता से प्रेरणा लेते थे, और अपने साथ गीता रखते थे। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा पीढ़ी को गीता के सूत्रों पर चलने की प्रेरणा दी जाए तभी भारत द्वारा से फिर विश्व गुरु बनेगा। उन्होंन स्कूलों के पाठयक्रम में गीता को सम्मिलित किए जाने र बल देते हुए कहा कि इससे बच्चों में संस्कार आएंगे। सत्संग में महावीर शर्मा ने राधा-कृष्ण के भाव भरे भजन सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। तू चाहिए तेरा प्यार चाहिए के भजन पर श्रृद्घालु भक्तिमय हो उठे।

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