लुप्त हो रही गोरैया चिडिय़ा को बचाने में जुटी उत्तराखंड की श्रुति त्यागी
December 5th, 2019 | Post by :- | 78 Views
कुरुक्षेत्र, ( सुरेश पाल सिंहमार )    । बढ़ते प्रदूषण के कारण लुप्त हो रही गोरैया चिडिय़ा के संरक्षण के लिए हरिद्वार (उत्तराखंड) के गांव लालडांग की श्रुति चौधरी प्रयासरत है। उन्होंने अपने खर्च पर छोटे-बड़े घोंसले बनाकर हरिद्वार तथा लालडांग और हरकी पोड़ी आदि में लगाकर चिडिय़ों को संरक्षण देने की अनूठी मुहिम चलाई है। मुहिम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने घोंसले बनाकर बिक्री करने की भी शुरुआत करते हुए लोगों को जागरूक करने का कार्य किया है।
ब्रह्मïसरोवर कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव के उत्तराखंड पैवेलियन में श्रुति चौधरी ने एक स्टॉल प्रदर्शित की है, जिसकी कमान सागर चौधरी संभाल रहे हैं। स्टॉल में उन्होंने विशेष रूप से निर्मित किये गये लकड़ी के घोंसले प्रदर्शित किये हैं। रायबर समिति के बैनर तले वे समर्पित भाव से गोरैया को बचाने में जुटी हुई हैं। लकड़ी के घोंसलों को पेंटिंग करके आकर्षक रूप भी दिया गया है, जो कि वातावरण के अनुकूल हैं। इन घोंसलों को वे 450 रुपये से लेकर 1200 रुपये में बेच भी रही हैं। उन्होंने हजारों की संख्या में घोंसले स्वयं लगाकर आम जनमानस को प्रेरित करने का कार्य भी किया है। सागर चौधरी के अनुसार लकड़ी के घोंसलों की अच्छी मांग है। ऑनलाईन भी इनकी बिक्री हो रही है और लोगों में गोरैया चिडिय़ा को बचाने का जुनून बढ़ रहा है। लकड़ी के घोंसलों के अलावा उन्होंने लकड़ी के बैग, लैंप आदि भी निर्मित किये हैं। इस सामान को बनाने के लिए वे विशेष रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाती हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की लड़कियों को रोजगार भी मिल रहा है।
कार्यकर्ता सागर चौधरी ने बताया कि वे प्राकृतिक डिस्पोजल प्लेट, थैले, दोने आदि बनाने का काम भी करते हैं ताकि पोलिथिन का प्रयोग खत्म किया जा सके। पर्यावरण के लिए प्लास्टिक बेहद खतरनाक है। इसलिए लोगों को पोलिथिन का प्रयोग स्वयं ही बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे प्रदर्शिनियों में घोंसले तथा प्राकृतिक डिस्पोजल का प्रचार-प्रसार करते हैं। देहरादून के अलावा, दिल्ली हाट, प्रगति मैदान, गीता महोत्सव और सूरजकुंड आदि मेें वे प्रदर्शनी लगा चुके हैं। समय की मांग है कि गोरैया का संरक्षण करते हुए प्लास्टिक पर पूर्ण विराम लगाया जाए।

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