बेसहारा कुत्तों ने दिलवाया कर्मवीर पुरस्कार
December 4th, 2019 | Post by :- | 163 Views

कुरुक्षेत्र, ( सुरेश पाल सिंहमार )    ।   सुनने या पढ़ने में तो यह बड़ा अजीब लगता है कि किसी को कुत्ते भी पुरस्कार दिलवा सकते है, और वो भी गली के कुत्ते! लेकिन इसे सच साबित किया है कुरुक्षेत्र निवासी सुनील कौशिक ने जिनको इन्हीं कुत्तों की बदौलत यूएन समर्थित कर्मवीर समान से नवाजा गया है। उन्हें यह सम्मान गत 27 नवंबर को नोएडा में कोन्फ़ेड्रेशन ऑफ एनजीओज़ की ओर से आयोजित एक समारोह में प्रदान किया गया।

इस समारोह में दुनिया के विभिन्न देशों से 1300 लोग भाग ले रहे थे, जिनमें से एनसीआर से 20 व हरियाणा से अकेले सुनील कौशिक को कर्मवीर पुरस्कार प्राप्त हुआ। सुनील गुरुग्राम में इंडिलव (Indielove) नाम से एक संस्था चलाते हैं, जिसमे वह स्ट्रीट डॉग यानि गली के कुत्तों को अपनाकर उनकी देखभाल करते हैं। वह बताते हैं कि उनके पास अनेकों कुत्ते हैं जिनकी देखभाल वह 6 लोगों की टीम के साथ स्वयं करते हैं। इस प्रकार वह 6 जरूरतमन्द परिवारों को रोजगार भी मुहैया करवा रहे हैं।  यही नहीं बीमार कुत्तों के इलाज के लिए वह डाक्टर की सहायता भी लेते हैं।

सुनील के अनुसार वह बीमार व असहाय कुत्तों की सहायता करते हैं। पूरे एनसीआर में कहीं भी कोई स्ट्रीट डॉग बीमार हो या किसी आपदा में हो तो उन्हे सूचना मिलते ही वह उस कुत्ते के पास पहुँचते हैं और उसका रेसक्यू करते हैं। फिर वह उसे अपने साथ अपने डॉग बोर्डिंग मे लाते हैं व उस कुत्ते को यथा संभाव उपचार दिया जाता है। वह बताते हैं कि उन्होने 2 अंधे, 2 बहरे व 2 अपंग कुत्तों को भी अपनाया हुआ है। कुछ कुत्तों का तो विदेश में भी अडोप्शन करवाया गया है।

कुत्तों की नसबंदी से आबादी पर रोक के प्रयास

सुनील कौशिक के अनुसार गलियों में घूमने वाले कुत्तों की जनसंख्या वृद्धि पर रोकथाम के लिए वह समय-समय पर उनकी नसबंदी भी करवाते हैं। उनका कहना है कि प्रति वर्ष एक कुत्ती 16 बच्चों को जन्म देती है और एक कुत्ते की औसत आयु 16 वर्ष है। अगर सभी कुत्ते जिंदा रहें और सही अनुपात में वंशवृद्धि करें तो कुछ ही वर्षों में कुत्तों की आबादी अनियंत्रित हो जाएगी। इसलिए उनकी नसबंदी करवाना जरूरी है।

उनका कहना है कि लोग 20 हजार में विदेशी नस्ल का कुत्ता तो ले आते हैं, लेकिन देशी नस्ल के कुत्तों को नहीं अपनाते। यही नहीं पालतू कुत्तों में बीमारी आदि होने की दशा में भी कई बार लोग उन्हें सड़क पर छोड़ देते हैं। वह उन सड़क पर घूमने वाले बीमार व असहाय कुत्तों की देखभाल खुद अपने पास रखकर करते हैं।

खुद के खर्च व लोगों की सहायता से चलता है काम  

हालांकि वह लोगों के पालतू कुत्तों के लिए बोर्डिंग सुविधा भी चलाते हैं जिससे उनको आय प्राप्त होती है। जब लोग परिवार सहित कहीं जाते हैं तो अपने पालतू कुत्ते को उनके पास छोड़ जाते हैं जिसके लिए उनको दैनिक आधार पर राशि का भुगतान करना होता है। इसके अलावा पशु प्रेमी लोग भी सुनील की सहायता करते हैं। हालांकि सुनील पेशे से डिजाइनर हैं और कंपनियों के लिए ब्रेंडिंग का काम भी करते हैं।

सुनील कौशिक का कहना है कि पुरस्कार सम्मान के साथ ही आदमी का हौसला भी बढ़ाते हैं। उन्हें भी यह सम्मान मिलने पर हार्दिक खुशी हुई है और आगे इस काम को और भी लगन से करने की प्रेरणा मिली है।

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