हैदराबाद पीडि़ता को न्याय दिलवाने के लिये और बढ़ती बलात्कार की घटनाओं के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन
December 2nd, 2019 | Post by :- | 69 Views

चंडीगढ़, ( महिन्द्र पाल सिंहमार )    ।     क्रांतिकारी युवा संगठन और संघर्षशील महिला केंद्र ने नरवाना कोर्ट तकआक्रोश रैली निकाल  केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी का पुतला फूंका और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

संगठन सदस्य ज्योति ने बताया कि तेलंगाना क ी राजधानी हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया है ।   हैदराबाद-बेंगलुरु हाइवे पर महिला सरकारी डॉक्टर की अधजली लाश मिलने और हत्या के पहले बलात्कार की पुष्टि होने के बाद से सरकार द्वारा महिला सुरक्षा को लेकर उठाए जा रहे कदमों पर सवाल उठ रहे हैं । देश-भर में आम जनता द्वारा बलात्कारियों को सख्त-से-सख्त सजा दिये जाने की मांग उठ रही है और लगातार विरोध जारी है । हैवानियत की इंतहा यह थी किआरोपियों ने डॉक्टर की लाश को जलाकर एक फ्लाईओवर के नीचे फेंक दिया था।

जानकारी के अनुसार पीडि़ता ने घटना से कुछ देर पहले ही अपनी बहन को फोन कर मदद की गुहार लगाई थी, जिसके बाद पीडि़ता की बहन परिवार संग साइबराबाद पुलिस के पास पहुंची लेकिन पुलिस ने त्वरित कार्यवाई न करते हुए परिवार को बाद में आने के लिए कहा । अभी तक सामने आई बातों के अनुसार अगर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की होती तो पीडि़ता को जिंदा बचाया जा सकता था । पुलिस प्रशासन द्वारा कार्यवाई में देरी और मामले को टालने की यह पहली घटना नहीं है । पुलिस द्वारा टाल-मटोल और आरोपियों पर सख्त कार्यवाई मे देरी का ही उदाहरण है कि उन्नाव बलात्कारकांड आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर पीडि़ता को प्रताडि़त कर मामले को दबाने के प्रयास करते रहे । बलात्कार आरोपी चिन्मयानन्द द्वारा भी बलात्कार पीडि़ता को ही फंसा कर जेल में डलवा दिया गया है । विभिन्न मामलों में सामने आया है किअपनी सामाजिक दबंगाई, राजनैतिक पहचान और आर्थिक  प्रभुत्व के कारण बलात्कारी न केवल सजा पाने से बच जाते हैं बल्कि पीडि़ता व उनके परिवार जनों को ही डरा-धमका कर मामले को रफा-दफा करने की पुरज़ोर कोशिश की जाती है । बलात्कार के मामलों पर बेहद कम सजा दर के कारण बलात्कारी सीना-तान कर घूम रहे हैं । एक ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जहां पर आततायी भयमुक्त होकर बलात्कार के कांड को अंजाम दे रहे हैं और महिलाएं यौन हिंसा के डर से सहम के जीने को मजबूर हैं । निर्भया कांड के बाद उभरे जन आंदोलन के दबाव में जस्टिस वर्मा समिति की गठन हुई, जिस समिति के द्वारा यौन शोषण की रोकथाम के लिए कई सुझाव दिये गए । विडम्बना है कि जस्टिस वर्मा समिति कि कई अनुशंसा आज भी ठंडे बस्ते में पड़ी हैं । ज्ञात हो कि इस विषय में केंद्र सरकार द्वारा ज़रूरी आवंटन को भी पूरी तरह नजऱंदाज़ किया गया है । निर्भया बलात्कार कांड के बाद भारत के हर जिले में यौन-उत्पीडऩ और बलात्कार पीडि़ताओं की सहायता के लिए खोले जाने वाले निर्भया केन्द्र ज़्यादातर नदारद हैं । यहाँ तक कि विभिन्न राज्य सरकारों ने इस उद्देश देतु आवंटित फण्ड का उपयोग भी नहीं किया है ।
क्रांतिकारी युवा संगठन और संघर्षशील महिला केंद्र ने प्रधानमंत्री से मांग की कि काम के जगहों पर यौन उत्पीडऩ विरोधी कमेटी में महिला कामगारों के प्रतिनिधि को सुनिश्चित किया जाये । जब कभी वो पुलिस से शिकायत करे तो उस शिकायत पर तुरंत उचित कार्यवाही की जाये । महिला यात्रियों के अनुपात में महिलाओं के लिए परिवहन की सुविधा दी जाये । सभी महिला कामगारों  को काम के जगह से यातायात की सुविधा दी जाये । सभी पुलिस थानों में पुलिस पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरा लगवाया जाये । महिलाओं को मीडिया, मूवी, विज्ञापन में उपभोग की वस्तु की तरह दिखाने पर रोक लगाई जाए । फैशन शो, ब्यूटी कांटेस्ट व  पोर्न विडियो पर रोक लगाओ । देश के हर जिले मे निर्भया बलात्कार पीडि़त सहायता केंद्र बनाए जाए। बलात्कार के मुकदमे के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाए । यौन शोषण के मामले पर लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मियों पर सख्त कार्यवाई की व्यवस्था की जाए । जनता में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता विकसित हेतु पाठ्यक्रमों में उचित बदलाव लाया जाये ।

इस मौके पर संगठन के साथी कुलदीप, रवि, विकास, विजय, विक्रम, अजय, दीपक, ज्योति, अंजू,अनिता, कोमल,आदि मौजूद रहे।

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