कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव ने प्रदर्शनी का अवलोकन करने के साथ कुरुक्षेत्र कुंभ कीर्ति का किया लोकार्पण प्रदर्शनी में कुरुक्षेत्र कुंभ की जानकारी हासिल कर आश्चर्यकित हो रहे पर्यटक
December 1st, 2019 | Post by :- | 54 Views
कुरुक्षेत्र, ( सुरेश पाल सिंहमार )    ।      बेशक देश में चार स्थानों पर ही कुंभ स्नान का महत्व माना जाता हो, लेकिन धर्मनगरी कुरुक्षेत्र भी कुंभ महत्व से अछूती नहीं है। जिन 12 स्थानों पर कुंभ कलश को छिपाया गया था, उनमें कुरुक्षेत्र भी शामिल है। लिहाजा कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण के साथ कुंभ स्नान का भी विशेष महत्व है। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में कुरुक्षेत्र कुंभ प्रदर्शनी में पर्यटकों को कुंभ स्नान के साथ ज्ञान गीता व अध्यात्म के अनूठे संगम का संदेश दे रही है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने कुरुक्षेत्र कुंभ प्रदर्शनी का अवलोकन करने के साथ कुरुक्षेत्र कुंभ कीर्ति का लोकार्पण भी किया। अहम पहलू यह भी है कि कुरुक्षेत्र कुंभ को जानकार पर्यटक आश्चर्यचकित हो रहे हैं कि कुरुक्षेत्र में भी कुंभ स्नान का महत्व है। शास्त्रों व कुंभ पर्व निर्णय ग्रंथ के अनुसार सूर्य, चंद्र एवं गुरु योग से वृश्चिक राशि में कुरुक्षेत्र कुंभ का आयोजन होता है। इस दिन स्नान, दान, दर्शन, जप, पूजन, हवन, कीर्तन, तर्पण व पिंडदान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों के अनुसार समुद्र मंथन से अमृत कुंभ निकला था। अमृत कुंभ को लेकर धनवंतरि निकला था और उसने उसे इंद्र को सौंप दिया था। इंद्र ने अमृत कुंभ को अपने पुत्र जयंत को सौंप दिया, जिसे लेकर वह स्वर्ग की ओर दौड़ और दैत्ययों ने अमृत कुंभ को छीनने की कोशिश की। 12 दिन तक देवतओं व एवं दैत्ययों में युद्ध चला और पृथ्वी पर 12 जगह कुंभ कलश को छिपाया गथा। जिस जगह पर छुपाया था वहां-वहां पर कुंभ लगे थे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति जिस-जिस राशि पर एक जगह इक_े हो जाते हैं तो अलग-अलग कुंभों का आयोजन किया जाता है। देश में नासिक, जगन्नाथ, कामाख्या, गंगासागर (पश्चिम बंगाल), कुंभकोण (तमिलनाडु), शाल्मलीवन (बिहार), कुरुक्षेत्र, द्वारका, रामेश्वरम, हरिद्वार, प्रयागराज व उज्जैन में कुंभ का आयोजन होता है।
कुरुक्षेत्र कुंभ कमेटी के अध्यक्ष रणदीप रोड़ का कहना है कि रुद्रमायल मंत्र में 12 कुंभ होने का वर्णन मिलता है। लोगों को गीता ज्ञान व कुंभ स्नान की जानकारी देने के लिए ब्रह्मसरोवर तट पर कुरुक्षेत्र कुंभ प्रदर्शनी का आयोजनप किया गया है। प्रदर्शनी में कुरुक्षेत्र कुंभ कीर्ति का केडीबी सचिव मानद सचिव ने लोकार्पण किया और प्रदर्शनी का हर रोज बड़ी संख्या पर्यटक अवलोकन कर रहे हैं और कुरुक्षेत्र कुंभ की महत्ता को जान रहे हैं।
श्रीकृष्ण संग्रहालय के क्यूरेटर राजेंद्र राणा का कहना है कि शास्त्रों में देश के अलग-अलग हिस्सों में 12 स्थानों पर कुंभ का वर्णन मिलता है। पिछले वर्ष कुरुक्षेत्र कुंभ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। देश के अलग-अलग हिस्सा में कुंभ का आयोजन होने से श्रद्धालु न केवल उन स्थानों के बारे में जान पाएंगे बल्कि धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से उन स्थानों की महत्ता भी बढ़ेगी।
वैदिक धाम ज्योतिष एवं साधना केंद्र के संचालक पंडित पवन शर्मा का कहना है कि कुरुक्षेत्र की धरती भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत की पहचान रही है। ब्रह्मसरोवर यानि कुरुक्षेत्र तीर्थ में स्नान व पूजन का विशेष महत्व है, साथ ही कुंभ का बौद्धिक, पौराणिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक आधार भी है। कुरुक्षेत्र कुंभ के बाद गीता जयंती में कुंभ प्रदर्शनी से पर्यटक न केवल यहां से कुंभ स्नान और गीता ज्ञान का अनूठा संगम लेकर जाएंगे। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में कुरुक्षेत्र कुंभ प्रदर्शनी से पर्यटक कुंभ के बारे में केवल जान सकेंगे, बल्कि कुरुक्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत की पहचान को भी ख्याति मिलेगी।
इसके लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल पूरी तरह से प्रयास कर रहे हैं और चौथी बार गीता महोत्सव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है। केडीबी की ओर से धार्मिक आयोजनों से लेकर प्रदर्शिनियों के आयोजन में पूरा सहयोग किया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग गीता के साथ जुड़ सके।

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