प्राधिकरण द्वारा कार्यस्थल पर महिलाओं के कानूनी अधिकारों का संरक्षण विषय पर विशेष कानूनी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया |
November 28th, 2019 | Post by :- | 112 Views

हसनपुर पलवल (मुकेश वशिष्ट) :- महिलाओं को उनके साथ हुए किसी भी प्रकार के शोषण/अन्याय को दबाना नहीं चाहिए, बल्कि मजबूती से अपनी आवाज़ को उठाना चाहिए :- जिला एवं सत्र न्यायाधीश एंव चेयरपर्सन करूणा शर्मा

हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में जिला विधिक सेवाएँ प्राधिकरण के तत्वावधान में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एंव सचिव पीयूष शर्मा के मार्गदर्शन में बुधवार को एडीआर सेंटर के सभागार में कार्यस्थल पर महिलाओं के कानूनी अधिकारों का संरक्षण विषय पर न्यायालय में कार्यरत कर्मचारियों के लिए विशेष कानूनी जागरूकता कार्यक्रम का संचालन पैनल रिटेनर जगत सिंह रावत एडवोकेट द्वारा किया गया।  कार्यक्रम में अध्यक्षता आंतरिक शिकायत समिति की चेयरपर्सन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश करूणा शर्मा द्वारा की गयी। कार्यक्रम में अतिरिक्त दीवानी जज (वरिष्ठ विभाग) एंव प्रधान मैजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड रितु यादव व न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी गुलशन वर्मा भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एंव सचिव पीयूष शर्मा ने न्यायालय के कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उक्त जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं के कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक करने से है, ताकि किसी भी महिला के साथ भविष्य में कोई अन्याय ना हो। कार्यक्रम में माननीया अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एंव चेयरपर्सन करूणा शर्मा ने न्यायालय के कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि कार्यस्थल पर महिला का यौन शोषण (निवारण, निषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 का उद्देश्य उत्पीड़ित महिला यानि महिला कर्मचारी या कोई भी घरेलू कर्मचारी या कोई भी महिला जो कार्यस्थल पर आती हैं, के साथ यौन शोषण से सुरक्षा प्रदान करता है तथा कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों को रोकना व यौन उत्पीड़न के मामलों को सुलझाना, ऐसे मामलों पर कार्यवाही करना जो कार्यस्थल पर यौन शोषण से जुडे हों या संबंधित हो। उन्होंने आंतरिक शिकायत समिति व स्थानीय शिकायत समिति का गठन, कार्यों व अधिकारियों के कर्तव्यों के बारे में भी जानकारी प्रदान की ।

उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर महिला कर्मचारी के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से महिला के रोजगार में अधिक मान व महत्व देने का वायदा करना, अपमानजनक व्यवहार जिससे महिला की सेहत व सुरक्षा प्रभावित हो, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में महिला के रोजगार में अहितकारी या हानिकारक व्यवहार करना या धमकी देना। इसके अलावा उन्होंने अधिनियम के अन्य विशेष प्रावधानों के बारे में भी जानकारी प्रदान की । उन्होंने कहा कि आज महिलाओं के किसी भी प्रकार के मामले में गोपनीयता या उनकी निजता भंग नहीं की जा सकती है, जो कि एक कानूनी अपराध है, इसलिए आज महिलाओं को उनके साथ हुए किसी भी प्रकार के यौन शोषण को सहन नहीं करना चाहिए और मजबूती से अपनी आवाज को उठाना चाहिए।

कार्यक्रम में अतिरिक्त दीवानी जज रितु यादव ने सम्बोधित करते हुए कहा कि कोई भी महिला व्यक्तिगत रूप से शिकायत कर सकती है। यदि पीड़ित महिला अपनी शारीरिक अक्षमता के कारण शिकायत नहीं कर सकती है तो शिकायत उसके संबधी या सह-कामगार भी शिकायत कर सकती है। शिकायत आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष तीन माह के अंदर पेश की जा सकती है। उन्होंने शिकायत की प्रक्रिया व नियुक्ता के कर्त्तव्यों सहित अधिनियम की अन्य विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में पैनल रिटेनर जगत सिंह रावत एडवोकेट ने बताया कि महिलाओं को उपरोक्त अधिनियम-2013 के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, साक्ष्य अधिनियम के तहत विशेष कानूनी अधिकार प्राप्त हैं। आज महिलाओं को मुफ़्त कानूनी सहायता पाने, किसी भी प्रकार के यौन शोषण के खिलाफ सुनवाई का, भरण-पोषण प्राप्त करने, सम्पत्ति में अधिकार, रात में गिरफ्तार ना होने, सुरक्षित कार्यस्थल, घरेलु हिंसा से संरक्षण, कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ कार्रवाई करने संबंधी विशेष कानूनी अधिकार प्राप्त है। उन्होंने प्राधिकरण की सेवाओं व स्थायी लोक अदालत (जन उपयोगी सुविधाओं) सहित हेल्पलाइन नंबर 01275-298003 के बारे में भी जानकारी प्रदान की ।  उन्होंने नारी सशक्तिकरण को काव्यबद्ध रुप से भी समझाने का प्रयास किया। कार्यक्रम में कोर्ट के कर्मचारियों को विभिन्न मामलों में कानूनी सलाह भी प्रदान की गई ।

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