कालका-पिंजोर इलाके के विकास के लिए नगर परिषद होना ज्यादा जरूरी है : विजय बंसल।
November 22nd, 2019 | Post by :- | 117 Views

कालका (चन्द्रकान्त शर्मा)

कालका-पिंजोर इलाके के विकास के लिए नगर परिषद होना ज्यादा जरूरी है, क्योंकि नगर निगम ने पिछले 9 वर्षों में इलाके के लिए जरूरतमंद विकास नही करवाया तो वही कालोनियां आदि भी अनियमित ही रह गई, लोगो पर टैक्स का डर मंडराता है जबकि सुविधाए नामात्र है जिस कारण आमजनमानस परेशान है। यह कहना शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष व पूर्व चेयरमैन विजय बंसल का है। जिन्होंने 2010 में जनहित याचिका दायर कर नगर निगम के गठन को चुनौती दी थी व माननीय हाईकोर्ट ने नगर निगम को भंग करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद पिंजोर-कालका नगर पालिका व पंचकूला परिषद बहाल हो गई थी। अब भी हाईकोर्ट में नगर निगम पंचकूला को भंग करवाने के लिए याचिका में बंसल हिस्सेदार है। जिसमे स्थानीय पूर्व पार्षद द्वारा नगर निगम को कायम रखने के लिए याचिका दायर करी हुई है। जिसके विरोध में विजय बंसल भी याचिका में पार्टी बने हुए है। विजय बंसल ने कहा गत 5 वर्षों से लगातार मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज कर मांग की जा रही है कि कालका व पिंजौर नगर निगम ज़ोन को नगर परिषद बनाया जाए।

हरियाणा किसान कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय बंसल ने बताया कि हरियाणा सरकार ने 18 मार्च 2010 ने नगर निगम पंचकूला का गठन किया था जिसमे पंचकुला नगर परिषद पंचकुला, नगर पालिका कालका व नगर पालिका पिंजौर तथा 42 ग्राम पंचायतो को शामिल किया गया था यह सब असवैधनिक तरह से किया गया जिसके विरोध में बंसल ने याचिका दायर कर निगम भंग करवाया था क्योकि हरियाणा नगर निगम एक्ट 1994 की धारा 3 जिसके अंतर्गत इनकी घोषणा की गई उसमे नगर परिषदो एवं नगर पालिकाओं को आपस से मिलाकर व साथ ही उनके साथ गांव को जोड़कर नगर निगम का गठन नहीं किया जा सकता। यह सब हरियाणा नगर निगम एक्ट 1994 की धारा 3 (2) की पेनिसो की शर्त जिसमे यह स्पष्ट रूप से कहा गया है किसी भी नगर निगम को बनाने के लिए उस नगर परिषद की जनसँख्या 3 लाख से अधिक होनी चाहिए जो कि उस समय नगर निगम की नहीं थी। पंचकुला नगर परिषद की जनसँख्या उस समय 1,40,992 थी जोकि नगर निगम को बनाने की शर्त पूरी नहीं करते।जोकि निर्धारित मानको से कम थी तभी इन्हे आपस में मिलाकर व साथ में दूर के गांव जोड़े गए जोकि हरियाणा म्युनिसिपल एक्ट 1973 (धारा 2 ए) व हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 की धारा 3 व हरियाणा पंचायती राज एक्ट धारा 1 व 8 का स्पष्ट रूप से उल्लंघन था। इसके साथ ही भारत के सविंधान की धारा 243 बी व 243 क्यू  का भी स्पष्ट रूप से उल्लंघन था जहा पंचायतो व नगर पालिकाओं,परिषदों व नगर निगमों के गठन के बारे में प्रावधान किये गए व कोई भी राज्य इनका उल्लंघन नहीं कर सकता।

इसके साथ ही तत्कालीन हरियाणा सरकार ने नगर निगमों के गठन के लिए दिनाक 1-1-2010 को यू एल बॉडीज डिपार्टमेंट द्वारा एक नियामवली यानि गाइडलाइन बनाई गई व जिसमे नगर निगमों के गठन की प्रक्रिया निर्धारित की गई लेकिन नगर निगमों के गठन के समय तत्कालीन हरियाणा सरकार ने न ना केवल नियमो का उल्लघन किया बल्कि हरियाणा म्युनिसिपल एक्ट 1973  व हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 व हरियाणा पंचायती राज एक्ट साथ ही भारत के सविंधान का भी स्पष्ट रूप से उल्लंघन किया। परन्तु बाद में हरियाणा सरकार ने माननीय सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले पर स्थगन यानि स्टे लेलिया व पुन: नगर परिषद पंचकुला व नगरपालिका कालका व नगर पालिका पिंजौर का गठन कर दिया गया तथा बाद में बाकि नगर निगमों के साथ ही हरियाणा के 7 नगरनिगमों का चुनाव करदिया गया। तत्कालीन हरियाणा सरकार ने निगमों का गन्न 2001 के जनगणना के आधार पर किया था जबकि अब 2011 की जनगणना आगई है। साथ ही नगर निगम बनाने के लिए जनसँख्या न तो 2001 में पूरी थी नाही अब।

 

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