जीवन में आत्मविश्वास प्राप्त करने के लिये गीता को पढ़ा जाएं – स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज
November 15th, 2019 | Post by :- | 98 Views

हसनपुर पलवल(मुकेश वशिष्ट) :- भगवत् गीता हमारा धर्मशास्त्र है हमारी आस्था का प्रतीक है, इसमें कोई संदेह नहीं है। गीता हर क्षेत्र में हमारा मजबूत सहारा है मानसिक रूप से हमें किस प्रकार से सजग रहना है, मन एवं विचारों को मजबूती प्रदान करनी है, अपनी उर्जा की शक्ति को बेहतर करना है, इन सबके लिये गीता का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। उक्त वक्तव्य श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय में दैनिक जीवन में गीता ज्ञान की प्रासिंगता विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहे।

उन्होंने कहा कि यह समझना बहुत जरूरी है कि बौद्विक जागरूकता कैसे बनी रहे, जीवन क्या है ? जीवन को कैसे जीना है ? इन सबको जानने एवं समझने के लिए गीता ज्ञान जरूरी है। भौतिकतावादी जीवन में सभी भागदौड में लगे हुए हैं, सुविधाएं बढ़ाना चाहते है, यह मानव के लिये विचारणीय विषय है। ब्राह्य सौंदर्य से आपके व्यक्तित्व का बौद्व नहीं होता, कहीं न कहीं जीवन में संतुलन बनाना होगा। बल, मनोबल पहले की अपेक्षा कम हुआ है, जीवन मूल्यों में कमी आई है, हमें अपनी इच्छा शक्ति को मजबूत करना चाहिए। बिना मूल्यों के हम वास्तविक आदर प्राप्त नहीं कर सकते, हो सकता है थोड़ी देर के लिये कोई आदर करे लेकिन वह वास्तकि आदर नहीं हो सकता। जरा सी बात की टेंशन बना लेना, टेंशन देना यह वास्तविक पर्सनलिटी को खराब करता है। इसीलिए आज के समय जरूरत है, शक्तिशाली दिमाग बनाने की। जीवन में आत्मविश्वास प्राप्त करने के लिये गीता को पढ़ा जाएं।

इस दौरान विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ ऋतु बजाज ने स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज का स्वागत किया एवं कहा कि स्वामी जी के विचारों को हमें अपने दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए। गीता की प्रासंगिता को समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचाना चाहिए। गीता में जीवन जीने की कला है।
गुरूग्राम विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. मार्केडेंय आहुजा ने एक दिसंबर को दिल्ली में होने वाले गीता महोत्सव की जानकारी दी एवं गीता के महत्व पर प्रकाश ड़ाला। डीन एकेडमिक प्रो. आरएस राठोर ने धन्यवाद किया एवं डॉ अंशु ने मंच संचालन किया।

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