पंचकूला में फ़ूड व ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन विभाग 7 महीने बीतने के बावजूद भी आरटीआई के अंतर्गत कांग्रेस छात्र संगठन, एनएसयूआई में राष्ट्रीय संयोजक दीपांशु बंसल द्वारा मांगी गई सूचना को उपलब्ध करवाने में नाकाम साबित हुआ है।
November 15th, 2019 | Post by :- | 102 Views

कालका (चंद्रकांत शर्मा)

7 माह बीत गए,जिले में अवैध हुक्का बार्स के सम्बंध में न तो ड्रग्स विभाग व न ही सूचना आयोग ले रहा सुध।
-डीजीपी-डीसीपी को भी पत्र लिखकर हुक्का बार बन्द करने की मांग
– कहा और कितने है हुक्का बार-किसको परमिशन तो अवैध पर क्या कार्यवाही,7 माह बाद भी ड्रग्स विभाग नही दे रहा जवाब
– भाजपा का हुक्का फ्री स्टेट का दावा फेल, नशा कारोबारियों के लिए अड्डे बने हुए है यह केफेस

पंचकूला में फ़ूड व ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन विभाग 7 महीने बीतने के बावजूद भी आरटीआई के अंतर्गत कांग्रेस छात्र संगठन, एनएसयूआई में राष्ट्रीय संयोजक दीपांशु बंसल द्वारा मांगी गई सूचना को उपलब्ध करवाने में नाकाम साबित हुआ है। हालांकि दीपांशु बंसल ने डीजीपी हरियाणा पुलिस व डीसीपी पंचकूला पुलिस को इस बारे ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजकर हुक्का बार बन्द कर सख्त कार्यवाही के लिए मांग की है।

दीपांशु बंसल ने मुख्य सूचना आयुक्त, हरियाणा सूचना आयोग को 7 नवम्बर को पत्र लिखकर कहा कि बड़े ही आश्चर्य की बात है कि सूचना के अधिकार के लिए गठित हरियाणा सूचना आयोग भी सूचना उपलब्ध नही करवा रहा है। बंसल ने कहा कि 22 अगस्त 2019 को खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा सूचना उपलब्ध न करवाने के बारे आयोग से शिकायत की थी परन्तु 3 माह से ज्यादा बीतने के पश्चात भी उन्हें कोई सूचना उपलब्ध नही हुई व न ही आयोग द्वारा की गई कार्यवाही का कोई पत्राचार प्राप्त हुआ। बंसल ने कहा भाजपा का हुक्का फ्री स्टेट का दावा फेल साबित हो चुका है। गौरतलब है कि बंसल ने आरटीआई में विभाग से काफी प्रश्न पूछे थे जिससे जिला पंचकूला में नशा खत्म करने में काफी तथ्य सामने आने थे और हुक्का बार्स व केफेस में चल रहे नशे को रोकने के लिए विभाग की कारगुजारी का भी पता लगता जिसके लिए 23 अप्रेल को आरटीआई डाली थी। जिसके बाद 1 जून को फर्स्ट अपील डाली और फिर एक आखरी बार 17 जुलाई को प्रशासन को अपील डालकर जवाब देने के लिए अंतिम बार कहा परन्तु अभी तक विभाग द्वारा कोई जवाब नही दिया गया जिसके बाद अब बंसल ने हरियाणा सूचना आयोग के समक्ष मामला पहुंचाया व अब दोबारा रिमाइंडर भेजा हालांकि स्टेट ड्रग कंट्रोलर ने बंसल की आरटीआई पर डिस्ट्रिक्ट ड्रग कंट्रोलर को सख्त सरीखे से लिखित रूप में 10 जून को ही कह दिया था कि बंसल को निर्धारित समय अवधि में सूचना उपलब्ध करवाने के लिए आपकी जिम्मेवारी है व यदि कोई विलम्ब होता है या कोई गलत सूचना दी गई तो जुर्माना भुगतने के लिए,अन्य कार्यवाही के लिए जिला ड्रग कंट्रोलर,पंचकूला पूर्ण रूप से जिम्मेवार होंगे। इसके लिए जिला ड्रग कंट्रोलर को 10 जुलाई तक सूचना देनी थी परन्तु दीपांशु ने बताया कि अभी तक ड्रग्स कंट्रोलर द्वारा कोई सूचना नही दी गई।

• हुक्का बार बन्द करने क्यो जरूरी?…..

दीपांशु बंसल ने बताया कि निकोटिन एक हानिकारक ड्रग है, जिसका केमिकल नाम C10H14 NO2 है, जिसे विस्तृत रूप में देखा जाए तो यह एक ऑयली लिक्विड है हवा के सम्पर्क में आकर ब्राउन-पीले रंग में मिल जाता है तथा निकोटिना तबाकम व निकोटिना रस्टिका के पत्तो की तीखी गंध से निकलता है। इंसेक्टिसाइड एक्ट,1968 में निकोटिन को धारा 3 ई के अंतर्गत इंसेक्टिसाइड माना गया है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के दी मेन्युफेक्चरर, स्टोरेज व इम्पोर्ट ऑफ हजार्डस केमिकल रूल्स, 1986 में हजार्डस व टॉक्सिक केमिकल्स के पार्ट 2 व सकेड्यूल 1 की आइटम नम्बर 421 पर निकोटिन को अंकित किया गया है। प्रोहिबिशन ऑफ एडवरटाइजमेंट व रेगुलेशन ऑफ ट्रेड एंड कॉमर्स, प्रोडक्शन, सप्लाई व वितरण एक्ट 2003 में भी सिगरेट्स व अन्य तंबाकू पदार्थो को एक्ट के सकेड्यूल के अनुसार उसकी असल यानी प्राकृतिक फॉर्म में ही व्यक्ति द्वारा ग्रहण किया जा सकता है परन्तु एक्ट इन पदार्थों को वाटर पाइप, हुक्का पाइप, शीशा के द्वारा ग्रहण, इनहेल आदि करने के लिए अनुमति नही देता व न ही इन पदार्थों को किसी अन्य केमिकल व अन्य पदार्थ (प्राकृतिक रूप से उतपन्न तंबाकू जैसे तंबाकू के पत्तो को छोड़कर) के साथ लेने के लिए भी अनुमति प्रदान नही करता। यह एक जहरीला पदार्थ है जिनका हुक्का बार्स में सरेआम सेवन किया जाता है जिसके ऊपर सख्त रूप से प्रतिबंध लगना अति आवश्यक है व भविष्य को देखते हुए सभी हुक्का बार्स को पूर्ण रूप से बन्द करना जरूरी है।

दीपांशु बंसल का कहना है कि जिला पंचकूला में दर्जनों हुक्का बार्स व केफेस प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में धड़ले से चल रहे है जहां नशे का कारोबार पूर्ण रूप से फल फूल रहा है। यह भी सर्व विदित है कि सरकार इसके रोकथाम में विफल साबित हुई है, पहले तो प्रशासन द्वारा कोई रेड ही नही की जाती यदि कोई होती भी है तो कागजी कार्यवाही के लिए नामात्र कार्यवाही की जाती है। यह कारोबार करोड़ो की राशि मे चलता है जिसमें बच्चे भी इसका शिकार हो रहे है और पंचकूला, पिंजोर, चंडीमंदिर, मोरनी आदि जगहों में इन्हें विशेष रूप से चलाया जा रहा है।इन केफेस को नशा कारोबारियों द्वारा नशे का अड्डा बनाया जा चुका है जहां युवा तरह तरह के नशे करते है परन्तु सरकार,प्रशासन इन्हें बन्द करने के लिए कोई कार्यवाही नही करता व हर्बल हुक्के की आड़ में फल फूलने दे रहा है।

बंसल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि निर्धारित समय मे कोई प्रशासन व सरकार द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नही हुई तो इस क्षेत्र को नशो से बचाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और अवैध रूप से चल रहे सभी हुक्का बार्स को बंद करवाएंगे। दीपांशु के अनुसार सभी हुक्का बार्स में निकोटिन फ्लेवर्ड हुक्के दिए जाते है जोकि जानलेवा है और हरियाणा में प्रतिबन्ध लगा हुआ है।

• दीपांशु ने क्या क्या पूछा था आरटीआई में?…..

दीपांशु ने पूछा था कि जिला पंचकूला में विभाग द्वारा कुल कितने हुक्का बार्स व केफेस चिह्नित किए गए है, कुल कितने हुक्का बार्स व केफेस को विभाग द्वारा अनापत्ति पत्र व परमिशन दी गई है। यह हुक्का बार्स व केफेस कहा-कहा,कब-कब से कार्य कर रहे है और कौन-कौन इनको संचालित कर रहा है। 1 जनवरी 2015 से 25 अप्रैल 2019 तक विभाग द्वारा कुल कितनी बार हुक्का बार्स व केफेस पर रेड की गई है। कितने हुक्का बार्स को सील/बन्द किया गया व कितने हुक्का बार्स व केफेस पर प्रतिबंध लगाकर फाइन/जुर्माना लगाया गया है। जिला पंचकूला में हुक्का बार्स व केफेस को बन्द करने के लिए आपके विभाग द्वारा अब तक क्या क्या कार्यवाही की जा चुकी है व भविष्य में क्या योजना है।हुक्का बार्स व केफेस में कौन कौन से फ्लेवर्ड हुक्का व कौन कौन से फ्लेवर्स व किस किस तरह के हुक्का दिए जाने की अनुमति है।चंडीमंदिर-मोरनी रोड़ पर स्थित हुक्का बार व कैफेस को किस आधार पर हुक्का चलाने व बेचने की परमिशन दी गई है। किस-किस आधार पर अनापत्ति पत्र दिए गए। कुल कितनी बार रेड की गई है व कितनी बार प्रतिबंध लगाया गया है। इसके साथ ही कौन कौन इसे संचालित कर रहे है।अब तक की गई कार्यवाही की प्रतिलिपियां मांगी थी परन्तु अभी तक कोई सूचना नही दी गई जिसके बाद मामला सूचना आयोग को भेज दिया है।

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