सिख धर्म के प्रथम गुरु श्री गुरु नानकदेव जी का 550वां प्रकाश पर्व 12 नवंबर को हर्षोल्लास से मनाया
November 13th, 2019 | Post by :- | 182 Views

छत्तीसगढ़ (कोंडागांव)@ नरेश जैन –

सिख धर्म के प्रथम गुरु श्री गुरु नानकदेव जी का 550वां प्रकाश पर्व 12 नवंबर को हर्षोल्लास से मनाया गया। प्रकाश उत्सव के चलते सिख समुदाय ने गुरुद्वारा से नगर कीर्तन निकाला, जो कि गुरूद्वारा से शुरू होकर जयस्तंभ चैक होते हुए आड़काछेपड़ा, रायपुर नाका, बाजार पारा मंडी रोड व अन्य मुख्य मार्ग से होते हुए वापस गुरुद्वारा पहुंचा। नगर कीर्तन के आगे-आगे समाजिक जनों का समुह सड़क करता चल रहा था, जिसमें युवा वर्ग अधिक संख्या में शामिल रहे। कीर्तन की अगवानी पंच प्यारे हाथों में कृपाण व निशान साहेब लेकर कर रहे थे। वहीं गुरू ग्रन्थ साहिब के पीछे भजन करते हुए महिलाएं चली। इस वर्ष कोण्डागांव के प्रकाश पर्व के दौरान खास बात रहीं की निशान साहेब लेकर युवतियां चली, जो कि नारी शक्ति को समर्पित रहा।

प्रकाश उत्सव की तैयारियां सप्ताह भर पूर्व से प्रभात फेरी के साथ आरंभ हो गई थी। इसी कड़ी में प्रभात फेरी निकाली गई। इसके बाद 24 घंटे का अखण्ड पाठ किया गया। आज अखण्ड पाठ के बाद अरदास व प्रसाद वितरण और अटूट लंगर का आयोजन गुरु सिंग सभा गुरुद्वारा में किया गया।

प्रकाश उत्सव के दौरान सुबह से ही कोण्डागांव के गुरूद्वारा गुरु सिंग सभा में भक्तों का तांता लगा रहा। गुरूद्वारा परिसर में अखण्ड पाठ किया गया, और अरदास व प्रसाद वितरण के साथ ही भक्तों के लिए विशाल लंगर का आयोजन किया गया। इस लंगर में नगर के सभी ने शामिल होकर प्रसाद ग्रहण किया। वहीं लंगर के बाद नगर में पंच प्यारों के अगुवाई में नगर कीर्तन निकाली गई। सिख समाज प्रकाश उत्सव को आकर्षक बनाने के लिए कई आयोजन करता है। इसमें कुछ वर्ष से अलग-अलग प्रांत के अखाड़ों से सिख समाज के तलवार बाजों को बुलाकर प्रदर्शन करवाया जाता है। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य आत्मसुरक्षा से होता है। सिख मार्सल आर्ट के तहत तलवार बाजी प्रदर्शन किया गया।

जगह-जगह हुआ स्वागत
श्री गुरु नानकदेवजी का 550वीं प्रकाश पर्व के अवसर पर मुख्य मार्ग से होते हुए नगर कीर्तन निकाला गया। नगर कीर्तन का नगर के कई स्थानों पर स्वागत किया गया। इसमें मुख्य रूप से सीआरपीएफ, आईटीबीपी, राम कृष्ण सेवा सदन के डॉ. डी भंज, बाजार पारा, आहूजा हीरों शो-रूम आदि शामिल है। इन सभी स्थानों पर नगर कीर्तन का स्वागत करते हुए जलपाल आदि का भी व्यवस्था किया गया।

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