देश की आधुनिक शिक्षा में मौलाना आजाद का ऐतिहासिक योगदान : सहायक प्रोफेसर वसीम
November 11th, 2019 | Post by :- | 84 Views

मेवात (सद्दाम हुसैन) मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज पल्ला के सहायक प्रोफेसर वसीम अकरम ने आज देश के पहले शिक्षा मंत्री भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्म दिवस पर मनाए जा रहे राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के महान सैनानी राष्ट्रवादी नेता थे जिनकी धर्मनिरपेक्षतावादी सिद्धान्तों में गहरी आस्था थी । उनकी प्रारंभिक शिक्षा मदरसे से हुई थी।

प्रोफेसर वसीम अकरम ने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद जानते थे कि पुराने ढंग की शिक्षा प्राप्त करने से काम नहीं चलेगा । विज्ञान के साथ-साथ अंग्रेजी का ज्ञान भी आवश्यक है । देश के स्वत्तन्त्र होने के बाद वे प्रथम शिक्षा मन्त्री बने । विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग 1948 और माध्यमिक शिक्षा आयोग में उन्होंने वैज्ञानिक व प्राविधिक शिक्षा की वकालत की । उन्हीं के प्रयत्नों से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना हुई । शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान देने के साथ-साथ उन्होंने उर्दू भाषा और साहित्य की बड़ी सेवा की।

प्रोफेसर वसीम अकरम ने कहा कि मौलाना आजाद पुराने एवं नये विचारों में अद्‌भुत सामंजस्य रखने वाले हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे । देश सेवा और इस्लाम सेवा दोनों को एक्-दूसरे का पूरक मानते थे।

प्रोफेसर वसीम अकरम ने कहा कि मौलाना आजाद का मेवात से गहरा नाता रहा है और इस इलाके से उन्होंने लोकसभा में प्रतिनिधित्व भी किया था। देश की आधुनिक शिक्षा का श्रेय उन्हीं को जाता है भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आई आई टी की स्थापना उन्हीं ने की जो देश के विकास में निर्णायक साबित हुई हैं।

प्रोफेसर वसीम अकरम ने कहा कि मेवात जैसे इलाके को विकसित होने के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बनाना होगा और मौलाना अबुल कलाम आजाद के बताए मार्ग पर चलकर उनके सपनों को साकार करना होगा।

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