देवताओं की दीपावली का पर्व कार्तिक पूर्णिमा : कौशिक
November 11th, 2019 | Post by :- | 182 Views
कुरुक्षेत्र, ( सुरेश पाल सिंहमार )    ।   महाभारत एवं पुराणों में कुरुक्षेत्र के प्राचीन तीर्थों व मन्दिरों  का गूढ़ रहस्य छिपा है। उसी में से एक कुरुक्षेत्र से करीब 25 किलोमीटर दूर पृथुदक तीर्थ ( पिहोवा ) में प्राचीन कार्तिकेय मन्दिर  है। पिहोवा का कार्तिकेय मन्दिर उत्तर भारत का एकमात्र मन्दिर  है। इस मन्दिर  की धार्मिक महत्ता के कारण सैकड़ों लोग प्रतिदिन पूजा-अर्चना के लिए पिहोवा जाते हैं।
इस मन्दिर  में कार्तिकेय जी का सरसों के तेल से अभिषेक किया जाता है और सिंदूर से कार्तिकेय जी का तिलक किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा 12 नवम्बर मंगलवार को है। इस दिन कार्तिकेय का तेल से अभिषेक करने पर एक वर्ष तक अभिषेक करने का फल प्राप्त होता  है और सभी क्रूर ग्रह शांत हो जाते हैं। कुरुक्षेत्र यज्ञ मन्दिर  ट्रस्ट दुखभंजन मार्ग कुरुक्षेत्र के सचिव वैद्य पण्डित  प्रमोद कौशिक के अनुसार कुंडली में विभिन्न दोषों जैसे पितृ दोष, गृहस्थ सुख में अड़चनें, कारोबार में बाधाएं, धन का अपव्यय, संतान पुत्र सुख की कमी, असाध्य रोग और शत्रु पीड़ा आदि के कुप्रभाव कार्तिक पूर्णिमा के दिन तेल का अभिषेक करने से दूर हो जाते हैं। इस बार कार्तिक पूर्णिमा मंगलवार को आने से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। जिन व्यक्तियों की जन्म कुण्डली में चन्द्रमा कमजोर है उन व्यक्तियों को इस दिन का लाभ उठाना चाहिए और भोलनाथ का गाय के दूध के साथ अभिषेक करने से चन्द्रमा बलवान होकर आत्मबल और मनोबल को मजबूत बनाता है। कार्तिक पूर्णिमा देवताओं की दीपावली का पर्व माना जाता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जब भगवान शंकर अपने पुत्र कार्तिकेय को राजतिलक करने का विचार करने लगे तब माता पार्वती अपने छोटे पुत्र गणेश को राजतिलक करवाने के लिए हठ करने लगी। तभी ब्रह्मा, विष्णु व शंकर जी सहित सभी देवी-देवता एकत्रित हुए और सभा में यह निर्णय लिया गया कि दोनों भाइयों में से समस्त पृथ्वी का चक्कर लगाकर जो पहले यहां पहुंचेगा, वही राजतिलक का अधिकारी होगा।
वैद्य पण्डित  प्रमोद कौशिक ने बताया कि भगवान कार्तिकेय अपने प्रिय वाहन मोर पर बैठकर पृथ्वी का चक्कर लगाने के लिए चल पड़े। जब गणेण जी अपने वाहन मूषक पर बैठकर चक्कर लगाने के लिए जाने लगे तभी माता पार्वती गणेश जी को कहने लगी कि वत्स, तुम यहीं पर  इकट्ठा  हुए समस्त देवगणों की परिक्रमा कर डालो क्योंकि त्रिलोकीनाथ यहीं विद्यमान हैं। माता पार्वती के ऐसा समझाने पर गणेश जी ने तीन चक्कर लगाकर भगवान शंकर को प्रणाम किया और कहा कि उन्होंने संपूर्ण जगत की परिक्रमा कर ली है। तब भगवान शंकर विस्मित हुए और उन समेत सभी ने गणेश जी को राजतिलक कर दिया। तब उन्हें शुभ-अशुभ कार्यों में प्रथम पूजा का अधिकार दे दिया गया। उन्होंने बताया कि उधर मार्ग में नारद जी ने कार्तिकेय को सारा वृत्तांत कह डाला। कार्तिकेय अतिशीघ्र परिक्रमा पूरी कर सभा स्थल पर आ पहुंचे और माता पार्वती से सारा हाल जानकर बोले कि आपने मेरे  साथ छल किया है। तुम्हारे दूध से मेरी खाल  व मांस बना हुआ है। मैं इसको अभी उतार देता हूं। अत्यंत क्रोधित होकर कार्तिकेय ने अपनी खाल व मांस उतारकर माता के चरणों में रख दिया और समस्त नारी जाति को श्राप दिया कि मेरे इस स्वरूप के जो स्त्री दर्शन करेगी, वह सात जन्म तक बांझ रहेगी। कौशिक जी ने बताया कि तभी देवताओं ने उनके शारीरिक शांति के लिए तेल व सिंदूर का अभिषेक कराया, जिससे उनका क्रोध शांत हुआ और भगवान शंकर व अन्य देवताओं ने कार्तिकेय को समस्त देव सेना का सेनापति बना दिया। तब भगवान कार्तिकेय पृथुदक पिहोवा में सरस्वती तट पर पिंडी के रूप में स्थित हुए और उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति मेरे शरीर पर तेल का अभिषेक  करवाएगा, उसके मृत्यु को प्राप्त हो गए पितर आदि बैकुंठ में प्रतिष्ठित होकर मोक्ष के अधिकारी होंगे। उन्होंने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा  के अवसर पर व्रत व अभिषेक करने से कई जन्मों के किए पाप नष्ट हो जाते हैं और जातक की जन्म कुण्डली में क्रूर ग्रह शान्त हो जाते हैं। सुख  एवं समृद्धि के साथ-साथ सौभाग्य आदि सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं।
आज कार्तिक पूर्णिमा  के अवसर पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सरल उपाय।
यह इस वर्ष  का अंतिम शुभ अवसर है  व इस पवित्र मास का सर्वोत्तम दिन है जब एक साथ समस्त देवी-देवताओं को प्रसन्न किया जा सकता है।  इस दिन मां लक्ष्मी की आराधना करने से जीवन में खुशियों की बहार आ सकती है।
पूर्णिमा पर्व  के दिन मां लक्ष्मी का पीपल के वृक्ष पर निवास रहता है। पूर्णिमा के दिन जो भी जातक मीठे जल में दूध मिलाकर पीपल के पेड़ पर चढ़ाता है उस पर मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है।
कार्तिक पूर्णिमा पर  गरीबों को चावल दान करने से चंद्र ग्रह शुभ फल प्रदान करता है।
इसी तरह शिवलिंग पर कच्चा दूध, शहद व गंगाजल मिला कर चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न हो जाते है।
कार्तिक पूर्णिमा पर  घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण बांधने से नकारात्मक ऊर्जा घर मे प्रवेश नही कर पाती।
शादीशुदा व्यक्ति पूर्णिमा के दिन भूलकर भी अपनी पत्नी या अन्य किसी से शारीरिक संबंध न बनाएं वरना चंद्रमा के दुष्प्रभाव आपको व्यथित कर सकते है। इस दिन पत्नी या किसी नन्ही बच्ची को उपहार दें।
पूर्णिमा पर्व पर चंद्रमा के उदय होने के पश्चात खीर में मिश्री व गंगा जल मिलाकर मां लक्ष्मी को भोग लगाएं।
द्वार पर रंगोली जरूर बनाएं। इससे विशेष समृद्धि के योग बनते हैं। नवग्रह प्रसन्न होते हैं।

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