हरियाणा सरकार का बड़ा कदम- पराली जलाने की सूचना दो, मिलेगा 1000 रुपये इनाम
November 5th, 2019 | Post by :- | 94 Views

उठाया है। मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल ने घोषणा की, कि पराली जलाने की सूचना देने वालों को एक हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। सूचना देने वालों की पहचान गुप्‍त रखी जाएगी। इसके साथ ही हरियाणा ने कहा है कि उसके कारण दिल्‍ली व राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण नहीं फैल रहा है।

कहा- दिल्ली में प्रदूषण को हरियाणा नहीं जिम्मेदार, एक तिहाई घटे पराली जलाने के मामले

मुख्‍यमंत्री ने फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) योजना की समीक्षा बैठक में घोषणा की, कि राज्‍य में पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह खत्‍म करने प्रयास किए जा रहे हैं। बैठक में जिला उपायुक्‍त (डीसी)और अन्‍य अधिकारी शामिल हुए। उन्‍होंने कहा कि जिला उपायुक्‍तों से कहा कि वे पराली जलाने की घटनाएं पूरी तरह रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएं और मामले में पूरी तत्‍परता बरतें।

मनोहरलाल ने कहा कि फसल अवशेष (पराली) जलाने वाले किसानों के मामलों की जानकारी देने वाले व्‍यक्ति को 1000 रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा और सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह से गुप्‍त रखी जाएगी। उन्‍होंने सभी डीसी से इस बारे में अपने जिलों में लोगों को जानकारी देने का भी निर्देश दिया। उन्‍होंने कृषि और किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों से राज्य के 10 ऐसे गांवों का दौरा करने के लिए कहा जहां अधिकतम फसल अवशेष जलाए जाने के मामले सामने आए हैं।
बैठक में राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण को लेकर भी अहम खुलासा हुआ। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण पर छिड़े घमासान के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जहां हरियाणा और पंजाब पर ठीकरा फोड़ रहे हैं, वहीं आंकड़े कुछ और ही तस्वीर बयां कर रहे हैं। बैठक में बताया गया कि हरियाणा में पिछले साल की तुलना में 22 अक्टूबर तक पराली जलाने के क्षेत्र में 34 फीसद की कमी दर्ज की गई है। पिछले साल जहां 57 हजार हेक्टेयर भूमि पर पराली जलाने की शिकायत मिली थी, वहीं इस वर्ष केवल 38 हजार हेक्टेयर में पराली जलाने की जानकारी मिली है। फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में भी 6.5 फीसद की कमी आई है।
मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे किसानों को पराली सहित अन्य फसल अवशेषों को न जलाने के लिए प्रोत्साहित करें। साथ ही उन्हें फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए विभिन्न विकल्पों के बारे में बताएं ताकि पर्यावरण संरक्षण किया जा सके। कृषि महकमे के अफसरों ने मुख्यमंत्री को बताया कि राज्य में फसल अवशेष प्रबंधन पखवाड़े का आयोजन किया गया था, जिसमें लगभग 1.20 लाख छात्रों की सहायता से प्रत्येक गांव को कवर करने का प्रयास किया गया। इसके अलावा, ‘पराली पलटन’ के तहत 20 हजार एनएसएस छात्रों की भागीदारी के साथ किसानों को शपथ दिलाई गई कि वे कृषि अवशेष नहीं जलाएंगे और दूसरों को भी इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे।
बताया गया कि अब तक 1248 कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है जो कि स्थापित किए जाने वाले कुल केंद्रों की संख्या का 90 फीसद है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि संबंधित जिलों के उपायुक्त (डीसी) भी इन गांवों में ग्राम सभा की बैठक आयोजित करें ताकि इस मुद्दे पर किसानों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया जा सके और इसके पीछे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने किसानों से फसल अवशेषों की खरीद के लिए विभिन्न विकल्पों की खोज के लिए दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि बिजली उत्पादन के लिए चीनी मिलों में फसल अवशेषों के उपयोग की संभावनाओं का पता लगाया जाए। इस संबंध में एक रिपोर्ट जल्द दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को फसल अवशेष बेचने और फसल अवशेष प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के नवीनतम उपकरणों और लाभों को देने पर भी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने उपायुक्तों को फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाने के भी निर्देश दिए।

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