सरकारी निर्माण कार्यों में प्रतिबंधित मिट्टी के ईंटों का इस्तेमाल, ठेकेदार उड़ा रहें पर्यावरण संरक्षण अधिनियमों की खुलेआम धज्जियां
November 3rd, 2019 | Post by :- | 142 Views
निर्माणाधीन भवन के सामने डंप प्रतिबंधित मिट्टी के इंटों का ढेंर

छत्तीसगढ़ (कोंडागांव) अरुण पाण्डेय् । सरकारी व निजी सेक्टर के निर्माण कार्यों पर मिट्टी से निर्मित लाल ईंटों पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाते हुए निर्माण कार्यों के लिए फ्लाई ऐश से निर्मित ईंटों को अनिवार्य किया गया है।

छत्तीसगढ़ शासन के आवास एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा इस संबंध में वर्षों पूर्व नगरीय निकायों व निर्माण एजेंसियों को मिट्टी से बने ईंटों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए गए थे। सरकार ने सरकारी निर्माण कार्यों सहित निजी सेक्टर की कंस्ट्रक्शन एजेंसियों को फ्लाई ऐश से बनी ईंटों का उपयोग सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश भी दिए थे, साथ ही सड़क निर्माण कार्यों में भी फ्लाई ऐश का इस्तेमाल करने कहा गया था। 

शासन के निर्देश के बावजूद राज्यभर में लगातार निर्माण एजेंसियों द्वारा नगरीय निकाय व अन्य निर्माण संबंधित विभागीय अधिकारियों के सांठगांठ से मिट्टी निर्मित लाल ईंटों का उपयोग निरंतर जारी है।

ताज़ा मामला कोंडागांव ज़िला मुख्यालय का है जहां लगभग 40 लाख की अनुमानित राशि से नगर पालिका परिषद द्वारा नगर सौंदर्यीकरण के नाम पर जगदलपुर व कोंडागांव को जोड़ने वाले चौक के किनारे विश्व प्रसिद्व तीरथगढ़ जलप्रपात की प्रतिकृति व चौपाटी निर्माण कराया जा रहा है।

स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी कार्यादेश के बावजूद निर्माण एजेंसी कार्य से जुड़े ठेकेदार द्वारा नगरपालिका अधिकारी व ज़िला कलेक्टर की आंखों में धूल झोंकते हुए उक्त निर्माण कार्य में प्रतिबंधित लाल ईंटों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारी अब क्या कार्यवाही करेंगे यह तो समय ही बताएगा।

बहरहाल कोंडागांव ज़िला में लगातार पर्यावरण को बर्बाद करने का यह कार्य प्रशासन के नांक के नीचे ही जारी है,  ज़िला मुख्यालय से ही जुड़े आसपास के कई गांवों में लागातर प्रतिबंधित लाल ईंटों का निर्माण व सप्लाई भी लगातार जारी है। उक्त मामले में नगर पालिका अमले की जिम्मेदारी भी संदेहास्पद प्रतीत हो रही है। इस संबंध में जब लोकहित एक्सप्रेस. न्यूज़ ने कोंडागांव नगर पालिका के मुख्य अधिकारी सूरज सिदार से चर्चा करनी चाही तब राजधानी बैठक में सम्मिलित होने जाने के कारण उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

निर्माणाधीन भवन के सामने डंप प्रतिबंधित मिट्टी के इंटों का ढेंर

बढ़ रहा है नदियों का कटाव:

वर्तमान में राज्य भर के सभी नदियों के किनारे ही ईंट भट्टे स्थापित किए गए हैं। ईंट भट्टा के संचालक नदी के किनारे मिट्टी खोदकर ईंटों का निर्माण कर रहे हैं। इसके कारण नदियों का कटाव तेजी से बढ़ रहा है। नदियों का कटाव बढ़ने से पर्यावरण  खतरा बढ़ने के साथ ही नदियों का स्वरूप बिगड़ने से आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगा है।
 ऐश के उड़ने से बढ़ रहा प्रदूषण:
फ्लाई ऐश का निबटान करना पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी माना गया है। अधिकारियों ने बताया कि फ्लाई ऐश से बनी ईंटे और फिलिंग सहित अन्य निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश का इस्तेमाल न होने पर भविष्य में सबसे बड़ी समस्या बन जाएगी। पॉवर प्लांट, सीमेंट प्लांट सहित अन्य फैक्ट्रियों से निकले फ्लाई ऐश का ढेंर कई स्थानों पर लगातार बढ़ रहा है।

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