साध्य रोग निवारण के लिए गौमाता की पूजा गाय दूध का सेवन विशेष फलदायक
November 2nd, 2019 | Post by :- | 211 Views

कुरुक्षेत्र, ( सुरेश पाल सिंहमार )    ।    कुरुक्षेत्र यज्ञ मन्दिर ट्रस्ट दुखभंजन मार्ग कुरुक्षेत्र के सचिव वैद्य पण्डित  प्रमोद कौशिक ने गौमाता की पूजा के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस बार गोपाष्टमी का पर्व 4 नवम्बर दिन सोमवार को मनाया जा रहा है। जिसका विशेष महत्व माना जाता है।

हिन्दू धर्म परम्परा के अनुसार गाय को माता समान माना गया है। गाय का शृंगार एवं पूजा करने का हमारे प्राचीन ग्रंथों में विशेष महत्व बताया गया है। गाय को तिलक लगाकर पुष्प की माला पहनाकर गौमाता की पूजा करने से एक साथ कई देवी-देवताओं की पूजा हो जाती है। वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक ने बताया कि गाय को गुड़ मिलाकर आटे का पेड़ा अर्पित करने का भी शुभ फल है। गाय में सभी देवी-देवताओं का वास है। गौमाता की सेवा करने से सर्वपाप नष्ट हो जाते हैं सोया हुआ भाग्य भी जाग जाता है असाध्य रोग निवारण में गाय पूजा व गाय का दूध विशेष फलदायक माना जाता है और सुख समृद्धि व मानसिक शांति का आभास होता है। गौमाता के गोमूत्र और गोबर दोनों पवित्र हैं। गोमूत्र में पारद और गंधक के तात्विक गुण अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। गोमूत्र के सेवन करने से प्लीहा और यकृत के रोग नष्ट हो जाते हैं। धर्मशास्त्रों में गोदुग्ध को पवित्र माना गया है। गोसेवा से संतान, पुत्र रत्न प्राप्ति संभव है। ऐसा भी माना गया है कि गोमूत्र असाध्य समझे जाने वाले कैंसर जैसे भयानक रोगों को भी ठीक करने में सहायक है। संक्रमण से उत्पन्न बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं। इस तरह वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह पवित्र है। वैद्य पण्डित  प्रमोद कौशिक के अनुसार पौष्टिक एवं सतोगुण प्रधान गाय का दूध देवताओं को चढ़ाया जाता है। गाय के दूध के सेवन से संग्रहणी आदि रोग नष्ट हो जाते हैं। यह स्थूलता, मोटापा और मेदावृद्धि को भी दूर करता है। इसमें प्रोटीन एवं विटामिन उचित मात्रा में पाया जाता है जो बालकों के लिए अति उत्तम है। शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चें व जिनकी याददाश्त कमजोर है, उनको गाय का दूध अवश्य पीना चाहिए। मां के दूध के बाद डाक्टर भी बच्चों को गाय का दूध पिलाने की सलाह देते हैं।

उन्होंने सलाह दी कि कारोबार में बढ़ोतरी के लिए हरी घास कम से अपने वजन के बराबर गोशालाओं में अर्पित करनी चाहिए। जो व्यक्ति भूमि व्यवसाय से संबंधित हैं और उनके कारोबार मंदी के दौर से गुजर रहे हैं उन्हें इस दिन का लाभ उठाकर रक्तदान स्वयं या रक्तदान शिविर लगाने चाहिएं। उन्होंने बताया कि गोदान कर मनुष्य धर्म मार्ग द्वारा स्वर्ग को जाते हैं।

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