कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय,कुरुक्षेत्र में गार्ड इन्द्रजीत, गार्ड अधिकारी गाली-गलोच और मारपीट के खिलाफ़ कार्यवाही हेतु मुझे आपकी कार्यवाही का इंतजार रहेगा
October 31st, 2019 | Post by :- | 98 Views

सेवा में

          पुलिस अधीक्षक

          जिला कुरुक्षेत्र

विषय: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में गार्ड इन्द्रजीत, गार्ड अधिकारी एवं अन्य गार्ड द्वारा प्रार्थी डॉ. जसबीर सिंह के साथ गाली-गलोच और मारपीट के खिलाफ़ कार्यवाही हेतु l

महोदय,

          सविनय निवेदन है कि मैं डॉ. जसबीर सिंह, हिंदी-विभाग कुरुक्षेत्र से पीएचडी संपन्न शोधार्थी हूँ तथा किसी जरूरी काम से जन सूचना अधिकारी पंजीकरण शाखा कु.वि.कु में कार्यालय गया था l तब समय दस बजे के करीब आसपास था l जहाँ सुरक्षा गार्ड परीक्षा भवन-२ के द्वार पर कुर्सी पर बैठे थे l मैं जल्दी में अंदर चला गया l फिर अपना काम पूर्ण कर द्वार से निकलकर परीक्षा भवन -१ से अर्थशास्त्र के एम.फिल कक्ष में जा रहा था जिधर गेट-२ पर तैनात गार्ड परीक्षा-१ से गुजर रहा था तो मुझे अनाब-स्नाब भाषा बोलकर मेरी तलाशी शुरू कर दी l मैंने अपने एम.फिल सम्बन्धी आने का प्रयोजन बतलाया तो मुझ पर एजेंट के शक के रूप में एम.फिल के रूप में दिनेश कुमार जी के कक्ष में ले गया l वहां उन्होंने बताया कि इनकी पत्नी की एम.फिल की डिग्री का काम है l इतने पर वह और आग बबूला होकर मेरा बैग छिनने लगा l फिर गार्ड ने धमकी के लहजे में HR07 AB 1021 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की सुरक्षा वाहन वालों को बुलाया l जिसमें एक लाल फीती वाला हवालदार , एक पतले से गार्ड वर्दी में मुझे बुरा-बुरा बोलते हुए मुख्य सुरक्षा अधिकारी के कक्ष में पीठ के पीछे हाथ मारते हुए ले गए l मैंने हवलदार को हाथ मारने के लिए मना कर दिया l उन्होंने फिर धमकी देते हुए गाली-देते चले l यही फीती वाला हवलदार तो इतना गन्दा बोल गया जिसका मैं यहाँ जिक्र कर लिख भी नहीं सकता l वे सभी मुख्य सुरक्षा अधिकारी ऑफिस में सबको मैंने अपना परिचय डॉ. जसबीर सिंह के रूप में दिया तो एक पतला-सा कर्मचारी/गार्ड ( जिसे मलिक कहकर संबोधित कर रहे थे ) बोला “पीएचडी वाले की चप्पल तो देखो”. . . दूसरी ओर मुख्य सुरक्षा अधिकारी कार्यालय में आये लोग पूछ रहे थे कौन है ये ? . . “टीचर है, ऑफिस में आवाज आई ‘टीचर नहीं, चीटर है’हद तो तब हो गयी जब मुख्य सुरक्षा ऑफिसर में सुरक्षा अधीक्षक ( एक सरदार, काले सूट में , काली पग धारण किये हुए ) के एक गार्ड ने मुझपर थप्पड़ से प्रहार किया और सुरक्षा अधीक्षक सरदार जी मूकदर्शक बने रहे l सरदार सुरक्षा अधीक्षक के साथ तमाम 5-6 सभी जैसे मारने को आगे बढे और फिर रूक गए l उन सबने जबरन मेरा बैग तलाशा और एक पत्र सरदार एवं उनके संग गार्डों ने मुझसे एक पत्र जबरन लिखवा लिया और मुझे कुल मिलकर 40 मिनट के करीब बंदी बनाकर रखा l वे कुल लोग 5-8 के करीब थे l जिसकी डीडीआर—192 दस्ती 30/10/2019 पुलिस चौंकी, थर्ड गेट, कु.वि.कुरुक्षेत्र में दर्ज भी करवाई है तथा हरिभूमि रोहतक मुख्य संस्करण में समाचार पत्र में इस अन्याय के मामला प्रशानिक और आम जन के बीच में लाया है l

          फिर भी मेरी शिकायत सम्बन्धी बिंदु विस्तार से निम्न प्रकार है :-

१. परीक्षा भवन-2 पर तैनात गार्ड इन्द्रजीत कुर्सी पर ही बैठा रहा, उन्होंने मुझे गेट पर ही क्यों नहीं रोका ?

२. जब मैं परीक्षा भवन-1 में गया था तो वहां किस अधिकार से मेरे साथ अनाब-स्नाब बोलने लगे और मुझे एजेंट मानकर एम.फिल कक्ष में जबरन लेकर गये l वहां उन्होंने मेरे साथ बतमीजी की और धमकी दी l

३. सुरक्षा वाहन में सवार लाल फीती हलवदार ने मेरी बात सही से न सुनकर मुझे पीठ में थक्का-मारते और गाली देते हुए मुख्य सुरक्षा अधिकारी ऑफिस में ले गये

४. मुख्य सुरक्षा अधिकारी की गैर-मौजूदी में ये सभी कार्यपालिका, विधानपालिका और न्यायपालिका के रूप में तानाशाह बने रहा l

५. किसी अधिकारी से लाल फीती वाला मुझे गालियाँ दे रहा था l

६. मुझे अपनी बात रखने के ऑफिस से सफेद कागज़ माँगा तो पतला-सा गार्ड ( मलिक) बोला ये सरकारी कागज़ है, हर किसी को नहीं मिलते

७. किस अधिकार से एक गार्ड को मुझ पर हाथ उठाया और विश्वविद्यालय में सुरक्षा गार्ड, सुरक्षा कैसे छिनने लगे l

८. मेरी शिकायत को डायरी करने से मना किया और कहा “इस ऑफिस में डायरी नहीं होती”

१०. मेरी पीएचडी कहने का बावजूद मुझे 30 से अधिक समय तक बंदी बनाकर रखा, मुख्य रूप से सरदार जोकि सुरक्षा अधिकारी है.

११. कोई भी व्यक्ति समय-स्थिति अनुसार कैसे भी वस्त्र, चप्पल आदि पहन सकता है उसके पहनावे पर तोंड माने का कौन सा कु.वि.कुरुक्षेत्र का अधिकार सुरक्षा गार्ड का बनता . . . कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के तमाम कर्मचारी बताए कि, “कौन सा पीएचडी स्कॉलर सोने-की चप्पल डालकर आता है

१२. मेरा बैग किस शक के आधार पर जांचा गया

१३. इन्द्रजीत द्वारा मुझे एजेंट की संज्ञा दी गई एवं एक अन्य ऑफिस में मुझे चीटर की संज्ञा दी  गई l

१४. इन सब कार्यवाही के पश्चात गार्ड इन्द्रजीत द्वारा मुझे जानकार बुझकर हसंते-उपहास उड़ाते हुए परीक्षा भवन-२ के सबसे ऊपर मुझे बुलाने लगे ( एक दुखी आदमी पर क्या बीतती है, एक दुखी ही समझ सकता है )

१५. कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में ऐसे कर्मचारियों की क्या वाकई में जरूरत है जो अपने पद का दुरूपयोग और संविधान को हाथ में लेते है, क्योंकि पीएचडी को पकड़कर ले जाने और बंदी बनाने के हक़ पुलिस के सबसे बड़े श्रेणी के अधिकारी का होता है, और मारने जैसे हरकते करने क्या दर्शाता है ?

१६. क्या मुख्य सुरक्षा ऑफिस मारने-पीटने का अड्डा बना गया है, हरियाणा पुलिस की कोई जरूरत नहीं, स्वयं ही सब कुछ गार्ड कैसे होते है, जिनके जिम्मेवारी सुरक्षा करना है, जब ये लोग मुझ जैसे पीएचडी उम्मीदवार के साथ ऐसा कर सकते है आमजन के साथ क्या कुछ नहीं कर सकते ???

         कुलमिलाकर मैं अपनी उपरोक्त तमाम व्यथा को समक्ष रखने के उपरांत में जनाब से दुखी मन से यह अपील करना चाहता हूँ कि मेरा गवाह इन सब जगहों पर लगे ‘‘कैमरे’’ में दर्ज विडियो है . उन विडियो को निकालकर उपरोक्त 5-8 तमाम सरदार सुरक्षा, थप्पड़ मारने वाले युवा ( शायद नाम हरजीत), पतला-सा पहनावे पर बोलने वाले ( शायद मलिक ), अभद्रता पूर्ण भाषा प्रयोग करने वाला लाल फीती वाले हवलदार सहित अन्य तमाम लोगों को मेरे पर हुए कार्य सम्बन्धी जो-जो संवैधानिक धारा लगती है, उसके तहत उचित कार्यवाही की जाएँ l क्योंकि कल हुई घटना से सिर में आज तक ( 36 घंटे होने पर भी ) मानसिक तनाव, बैचनी, तरह-तरह के चित्र मस्तिष्क में घूम रहे है..

मूख्य सुरक्षा अधिकारी के ऑफिस में किसी को बंदी बनाकर ले-जाने की बजाय पुलिस के हवाले करने का नियम बनाया जाएँ l क्योंकि ये सभी एकत्रित होकर ऑफिस में लेजा कर ऐसी-ऐसी तानाशाही-जंगलराज जैसी करतुते करते है, जिनका बयाँ यहाँ नहीं किया जा सकता l

          जनाब से विनती है इनके खिलाफ़ जो भी कार्यवाही हरियाणा पुलिस और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा विधि द्वारा कठिन-से-कठिन अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएँ ..

(मुझे आपकी कार्यवाही का इंतजार रहेगा)

पीड़ित प्रेषक:

डॉ. जसबीर सिंह सुपुत्र करतार चंद

142 तेज कॉलोनी, तहसील कैंप, पानीपत

1292 भारत नगर, हिसार ( पत्राचार )

Ph.D Registration 2K-SP-341

9306300451, 8901282156

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