बस्तर दशहरा में हो रहा वर्षों से मौत का खुलेआम खेल, सुरक्षा मानकों को ठेंगा दिखाते सजाई जाती हैं यहां मौत के झूलें
October 19th, 2019 | Post by :- | 290 Views
बस्तर दशहरा में हो रहा वर्षों से मौत का खुलेआम खेल, सुरक्षा मानकों को ठेंगा दिखाते सजाई जाती हैं यहां मौत के झूलें

छत्तीसगढ़ (जगदलपुर – राजवाड़ा परिसर) । बस्तर दशहरा उत्सव में आकर जहांं लोग अपने आप को रोमांचित करने के लिए मीना बाजार (डिज्नीलैंड) के झूलों का आनंद लेते हैं, लेकिन उन्हें शायद इस बात का बिल्कुल भी अंदाज़ा नही है कि वे जिन झूलोंं का आनंद उठाना चाहते हैं दरअसल वह उनके लिए कितना अधिक असुरक्षित व ख़तरनाक है। जब इस बात की जानकारी लोकहित एक्सप्रेस ने लिया तब काफी अधिक चौंका देंने वाली जानकारी सामने आई है।

आपको बता देंकि जिस झूलोंं की आप सवारी कर आसमान से बातें करना चाहते हैं उसपर बैठने के बाद आपकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है, हालांकि स्थानीय पुलिस बल द्वारा झूला व मौत का कुंआ सजाने से पहले कुछ सुरक्षा मानकों का परीक्षण कराया जाता है परंतु इस दौरान ना ही कोई विशेसज्ञ इंजीनियर होता है और ना ही इसके सुरक्षित होने की किसी विशेषज्ञ से ही पुष्टि होती है, कि आख़िर यह झूला कितना सुरक्षित है।

अब ऐसे में सवाल उठता हैकि यदि ऐसे में कोई बड़ा हादसा हो जाता है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा ? हद तो इस बात की हैकि इस सवाल का ज़वाब ही किसी को नहीं पता है। सवालिया निशान लगाता मेले की सुरक्षा व्यवस्था ज़िला प्रशासन की तरफ भी उंगली करता हैकि आखिर इतनी बड़ी संख्या जो इन झूलों पर बैठती हैंं उनके सुरक्षा पर ज़िला कलेक्टर तक गंभीर नही हैं।

वर्षों से चले आ रहे इस बाजार में व्यवस्थापक द्वारा इस समस्या से न्रज़र हटाने के बदले दरअसल क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों का मुंह कुछ फ़्री पास देकर जो चुप करा दिया जाते रहे है, तब इस पर कौन बोलेगा यह जग ज़ाहिर बात है। ऐसे जनप्रतिनिधियों को चुनाव के समय क्या मतदान मांगते तनिक भी शर्म नही आती होगी, जिस जनता के जान तक की फ़िक्र इन्हें नही आख़िर इतनी बेशर्मी कहां से आती हैकि उनके ही सामने खड़े होकर वोट मांगने पहुंच जाए करते हैं।
 
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आकाश झूला

परिस्थितियों को भांपकर जब जगदलपुर शहर के स्थानीय राजवाड़ा परिसर में जहां के मैदान में मीना बाजार (मिनी डिज्नी लैंड) सजी है पहुंची व इसके संचालक सजल सिन्हा से मेले में लगे उपकरण और झूलोंं के फिटनेस से संबंधित दस्तावेज देखना चाहा तब उन्होंने बताया कि मेला लगाते समय उनकी संस्था ने स्थानीय कोतवाली पुलिस से वेरिफाई कराया है। फ़िर क्या था मामले की सच्चाई जानने जब हमने कोतवाली थाना पहुंचकर थाना इंचार्ज धनंजय सिन्हा से उक्त संबंध में जानकारी मांगी, तब उन्होंने बताया कि पुलिस के द्वारा मेला लगने से पहले कुछ सुरक्षा संसाधनों की जांंच तो जरूर की गई थी पर इस दौरान उनके टीम में कोई विशेषज्ञ शामिल नही था। इस संबंध में एसडीएम जी.एस. मरकाम ने बताया हैकि उन्हें इस मेले में लगे उपकरण और झूलोंं के फिटनेस से संबंधित दस्तावेज की जानकारी मेला संचालकों द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया है। यदि इसे लेकर किसी को किसी प्रकार से कोई शिकायत है तो उस पर तुरंत कारवाई की जाएगी।


वहीं व्यवसायिक लाभ की मंशा से संचालक द्वारा पांप्लेट बैनर व 8-10 समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर खुब ज़ोर – शोर से  प्रचार-प्रसार करवाया जा रहा है।

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